दुष्यंत चौटाला को उनके बड़े-बड़े वादे पूरे करने देंगे मनोहर लाल खट्टर?

  • 30 अक्तूबर 2019
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महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी-शिवसेना के बीच पेच फंसा हुआ है.

शिवसेना नेता संजय राउत ने बीजेपी से गठबंधन धर्म निभाने की बात कहते हुए याद दिलाया है कि महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं है जिसके पिता जेल में हो.

उन्होंने परोक्ष रूप से हरियाणा में बीजेपी-जेजेपी के 'अप्राकृतिक' कहे जा रहे गठबंधन पर सवाल खड़े किए हैं.

हरियाणा में एक दूसरे के ख़िलाफ़ प्रचार करते हुए लड़ने वाली बीजेपी और जेजेपी ने चुनाव के बाद मिलकर सरकार बनाने का फ़ैसला किया है.

बीजेपी से मनोहरलाल खट्टर दोबारा मुख्यमंत्री बने हैं, वहीं जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री पद मिला है.

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बीजेपी के साथ चले जाने को लेकर जेजेपी के वोटरों में भी असंतोष की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने भी इस गठबंधन पर तंज कसते हुए उन वायदों की याद दिलाई है जो जेजेपी ने अपने प्रचार अभियान में किए थे.

योगेंद्र यादव ने इसे "दुष्यंत के पिता को जेल में कुछ राहत और दुष्यंत को डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर के पद" वाली डील कहा है और यह भी कहा है कि बाक़ी मुद्दों की ओर किसी का ध्यान नहीं है.

सवाल उठ रहे हैं कि बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार में जेजेपी वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर 5,100 रुपये प्रति महीना करने और हर बेरोज़गार को रोज़गार देने जैसे वादे पूरे कर पाएगी या नहीं?

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अपने जाट वोटरों की नाराज़गी की सुगबुगाहटों के बीच जेजेपी के लिए अपने ये वादे पूरे करना और अहम हो गया है.

हालांकि दोनों दलों का न्यूनतम साझा कार्यक्रम (कॉमन मिनिमम प्रोग्राम) अभी सामने नहीं आया है.

मुख्यमंत्री के ओएसडी जवाहर यादव कहते हैं कि दोनों पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र में जो भी व्यवाहरिक बातें रखी हैं, उन्हें अमलीजामा पहनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है जो सभी बातों पर विचार करके एक 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' बनाएगी.

जेजेपी के थिंक टैंक माने जाने वाले नेता केसी बांगर भी अभी कुछ स्पष्टता से कहने से बच रहे हैं. उनका भी यही कहना है कि समिति पर चर्चा होगी और कोशिश होगी कि 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' में उनकी पार्टी अपने वादों पर खरा उतरे.

बीजेपी-जेजेपी के वादों का विरोधाभास

लेकिन मुश्किल यह है कि दोनों पार्टियों का घोषणा पत्र अपने आप में विरोधाभास का परिचय देता है. जेजेपी ने कई बड़े वादे किए हैं जिन्हें कई जानकार 'लोकप्रियतावादी' भी बताते हैं जबकि बीजेपी ने एक सीमित और संतुलित घोषणा पत्र जारी किया था.

ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि बीजेपी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थी, बल्किन उसने चुनाव अभियान में 75 से ज़्यादा सीटें जीतने का दम भरा था. जबकि साल भर पुरानी जेजेपी ख़ुद को स्थापित करने की जुगत में बड़े-बड़े वादे कर बैठी.

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बुढ़ापा पेंशन की रकम क्या होगी?

सबसे ज़्यादा नज़रें जेजेपी के बुढ़ापा पेंशन के वादे पर टिकी हुई हैं. दुष्यंत चौटाला ने इसे बढ़ाकर 5,100 रुपये प्रति माह करने की बात कही है जबकि बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में इसे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह करने की बात कही थी. यह अभी 2000 रुपये प्रति माह है.

चुनाव के दौरान चुटकी लेते मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विपक्ष के घोषणा पत्र को ज़मीनी सच्चाई से दूर बताया था और कहा था कि विपक्ष का घोषणा पत्र लागू करने के लिए एक लाख छब्बीस हज़ार करोड़ रुपये चाहिए जो कि समझदारी वाला फ़ैसला नहीं लगता.

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स्थानीय युवाओं को आरक्षण कैसे देगी जेजेपी?

अपने घोषणा पत्र में जेजेपी ने सभी नौकरियों में स्थानीय युवाओं के लिए 75 फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा किया था और कहा था कि हर बेरोज़गार को रोज़गार गारंटी के तहत नौकरी दी जाएगी और जब तक वह बेरोज़गार रहेगा उसे हर महीने 11 हज़ार रुपये का भत्ता दिया जाएगा.

बीजेपी ने इस मुद्दे पर सिर्फ युवाओं के कौशल विकास के लिए ज़िला स्तर पर मॉडल केंद्र खोलने की बात कही थी.

हिंदुस्तान टाइम्स के असिस्टेंट एडिटर हितेंद्र राव भी जेजेपी के वादे को अव्यावहारिक बताते हैं.

वह कहते हैं, "जेजेपी ने स्थानीय युवाओं के लिए प्राइवेट सेक्टर में भी 75 फीसदी आरक्षण की जो बात कही है, वो प्राइवेट इंडस्ट्री वालों के लिए मुश्किल खड़ा करने वाला फ़ैसला लगता है. क्योंकि बाहर से निवेश करने वाली कंपनियां इस बात की चिंता भी करेंगी कि लोकल पूल में उन्हें जिस तरह का स्किल सेट चाहिए वो उसे मिल रहा है या नहीं और कही ऐसा न हो कि स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण उसके लिए अभिशाप बन जाए."

हालांकि जेजेपी के नेता बांगर 75 फीसदी आरक्षण को संभव बताते हैं और कहते हैं कि कुछ राज्यों में इस तरह के प्रावधान पहले किए जा चुके हैं.

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किसानों को किए वादे भी अलग अलग

किसानों को लुभाने के लिए जेजेपी ने कोऑपरेटिव सोसाइटीज बैंकों में ऋण माफ़ी की बात कही थी, जबकि मनोहर लाल खट्टर ने किसानों के लोन का ब्याज माफ़ करने की बात की थी.

जेजेपी ने किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने के लिए 'मिनिमम सपोर्ट प्राइस' अधिनियम बनाने और किसान की आय निर्धारित करने की बात की थी. साथ ही पार्टी ने एमएसपी से कम कीमत पर फसल की ख़रीद को अपराध घोषित किए जाने की बात भी कही थी.

दूसरी ओर बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कोई बड़ा वादा नहीं किया था. उसने किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम की बात कही थी.

जेजेपी ने फसलों के नुकसान का बीमा प्राइवेट कंपनियों के बजाय सरकारी निगम से करवाने का वादा किया था और सभी तरह के फसलों के नुकसान को उसमें शामिल करने की बात की थी जबकि बीजेपी पिछले पांच साल तक इस मुद्दे पर अपने स्टैंड पर कायम रही और अपने घोषणा पत्र में ऐसी कोई बात नहीं की.

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फसल बेचने की ऑनलाइन बुकिंग स्कीम पर मतभेद

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाली जेजेपी ने फ़सलों को बेचने के लिए ऑनलाइन बुकिंग स्कीम हटाने की बात की है जबकि 2014 में बनी बीजेपी सरकार ने इसे अपनी उपलब्धि बताते हुए कहा था कि उनकी सरकार ने लेन-देन को पारदर्शी बनाया है जबकि जेजेपी ने गांव स्तर पर बिक्री केंद्र खोलने का वादा किया है.

जेजेपी ने किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन फ्री देने की बात की है जबकि ऐसा करना सरकारी ख़ज़ाने पर एक बड़ा बोझ होगा क्योंकि ट्यूबवेल कनेक्शन देते वक़्त सरकार किसान से सिर्फ सामान का पैसा ही लेती है और किसान को वो पहले ही सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध करवा रही है.

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पुरानी पेंशन नीति से क्या होगा

सरकारी कर्मचारियों को साधने के लिए जेजेपी ने अपने घोषणा पत्र में उनके लिए पुरानी पेंशन नीति लागू करने की बात की है जबकि बीजेपी ने इस बारे में कोई चर्चा नहीं की. पिछले एक साल में सरकारी कर्मचारी यूनियन के कई बार अपनी इस मांग को लेकर प्रदर्शन किया पर बीजेपी सरकार ने इस पर अपनी सहमति नहीं दिखाई.

हितेंद्र राव कहते हैं, "लगता है कि जेजेपी ने अतिउत्साह में हरियाणा में पंजाब के समान वेतनमान लागू करने की बात कह दी है जबकि हरियाणा तो सेंट्रल कमीशन को फॉलो करता हैं और ज़्यादातर कर्मचारी पहले ही पंजाब के कर्मचारियों से ज़्यादा सैलरी ले रहे हैं, हां कुछ काडर ऐसे हैं जिनके वेतन कम हैं पर पंजाब के सामान नीति लागू करने से ज़्यादातर कर्मचारियों को नुकसान ही होगा."

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