चीन को लेकर अमरीका ने भारत को किया आगाह- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 30 अक्तूबर 2019
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Image caption अमरीकी पैसिफिक फ्लीट कमांडर एडमिरल जॉन एक़्यूलिनो भारत में हैं

अमरीकी पैसिफिक फ्लीट कमांडर ने मंगलवार को कहा कि विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता कम नहीं हो रही है. दक्षिण चीन सागर वैश्विक कारोबार का अहम रूट है. कहा जा रहा है कि चीन की बढ़ती आक्रामकता के कारण कई देशों पर रणनीतिक असर पड़ेगा.

एडमिरल जॉन एक़्यूलिनो भारत में हैं और उन्होंने भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मबीर सिंह के अलावा कई अधिकारियों से मुलाक़ात की. एडमिरल जॉन ने कहा कि उन्होंने एडमिरल सिंह से दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी और मज़बूत करने को लेकर बात की.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एडमिरल जॉन ने पत्रकारों से कहा, ''अमरीका और भारत की ज़रूरतें साझी हैं. हमें इसे लेकर कोई दुविधा नहीं है कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का पालन होना चाहिए और दक्षिण चीन सागर में भी ऐसा ही होना चाहिए.''

एडमिरल जॉन हवाई बेस्ड पैसिफ़िक फ्लीट के प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि चीन विवादित दक्षिण चीन सागर में सैन्य ठिकाना विकसित कर रहा है और इससे कई देशों को ख़तरा है और इनमें से कई अमरीका के सहयोगी हैं.'' दक्षिण चीन सागर पर ताइवान, वियतनाम, फिलीपीन्स, मलेशिया और ब्रूनेई के भी दावे हैं.

एडमिरल जॉन ने कहा, ''मैं यहां लगातार देख रहा हूं कि कैसे कई देशों को डराया जा रहा है. मैं दक्षिण चीन सागर में मानव निर्मित द्वीप, चट्टान और कई तरह के निर्माण कार्य को देख रहा हूं.'' एडमिरल जॉन से पूछा गया था कि क्या उन्होंने दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता में कोई कमी देखी है.

एडमिरल जॉन ने कहा, ''इस इलाक़े के सभी देशों के लिए यह ख़तरनाक है. सभी हमारे दोस्त और सहयोगी हैं. लेकिन किसी में यह क्षमता नहीं है कि चीन के बनाए इन द्वीपों को हटा सकें. ऐसे में मै यह कह सकता हूं कि यहां चीन की आक्रामकता में कोई कमी नहीं आई है. चीन इस इलाक़े में अपना मक़सद हासिल करने के लिए दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है. यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं जिनसे हमारे दोस्तों और सहयोगियों के लिए मुश्किलें भी बढ़ रही हैं. अमरीका और भारत इंडो-पैसिफिक में स्वतंत्र आवाजाही को लेकर साथ मिलकर काम करते रहेंगे.'

क्या चीन हिन्द महासागर में चीनी एयरक्राफ़्ट की तैनाती कर सकता है? इस सवाल के जवाब में एडमिरल जॉन ने कहा कि वो इस इलाक़े में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती देख रहे हैं और संभव है कि हिन्द महासागर में भी ऐसा ही करे. एडमिरल जॉन ने कहा कि चीन अगर ऐसा करता है तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए. एडमिरल जॉन ने कहा कि आने वाले सालों में हिन्द महासागर में चीन की मौजूदगी और बढ़़ेगी.

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पाकिस्तान और अफ़ागानिस्तान के सैनिक भिड़े

अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच भारी गोलीबारी हुई है. दोनों तरफ़ से हुई गोलीबारी में पाकिस्तान के छह सैनिक और पाँच आम लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

मंगलवार को पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ने इसकी सूचना दी है. पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन ने कहा है कि अफ़ग़ान सुरक्षा बलों ने कुनार प्रांत में नरी ज़िले के चित्राल गाँव में मोर्टार और भारी मशीन गन से आम लोगों को निशाना बनाया.

आईएसपीआर के बयान में कहा गया है, ''पाकिस्तान के सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया. हमने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर कांडी और दिलबार पोस्ट को निशाने पर लिया जहां से गोलीबारी शुरू हुई थी. हमारी जवाबी कार्रवाई में अफ़ग़ानिस्तान को भारी नुक़सान हुआ है.''

इस गोलीबारी को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अफ़ग़ानिस्तान के सामने कड़ विरोध दर्ज कराया है.

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सऊदी और भारत अब केवल विक्रेता और क्रेता नहीं हैं: पीएम मोदी

सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत और सऊदी के बीच संबंध विशुद्ध क्रेता-विक्रेता से आगे निकल चुका है और दोनों देश एक मज़बूत साझेदार बन चुके हैं. पीएम मोदी ने कहा कि सऊदी भारत में तेल और गैस प्रोजेक्ट में निवेश करेगा.

पीएम मोदी ने कहा, ''भारत सऊदी अरब से 18 फ़ीसदी कच्चा तेल आयात करता है. हमारे तेल का दूसरा बड़ा स्रोत सऊदी अरब है. हम विशुद्ध क्रेता-विक्रेता वाले संबंध से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी की तरफ़ बढ़ रहे हैं. इसमें तेल और गैस प्रोजेक्ट में सऊदी अरब का निवेश भी शामिल है.''

''हमारा मानना है कि तेल की स्थिर क़ीमत वैश्विक अर्थव्यवस्था में गति के लिए ज़रूरी है. ख़ासतौर पर विकासशील देशों के लिए. सऊदी की अरामको तेल कंपनी भारत के पश्चिम समुद्री तट पर बड़ी रिफ़ाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में शामिल हो रही है. हम इस बात की संभावना भी देख रहे हैं कि अरामको रणनीतिक तेल भंडार में भी शामिल हो.''

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लेबनान के राष्ट्रपति का इस्तीफ़ा

लेबनान में पिछले दो हफ़्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी ने इस्तीफ़े की पेशकश की है. उन्होंने कहा कि लेबनान राजनीतिक गतिरोध की स्थिति में पहुंच गया है और इस संकट से उबरने के लिए उसे एक चौंकाने वाले फ़ैसले की ज़रूरत है.

इस्तीफ़े के बाद हरीरी ने कहा,"लेबनान के लोग पिछले 13 दिनों से एक फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे थे, एक ऐसे राजनीतिक समाधान का इंतज़ार कर रहे थे जो ये हालात बदतर होने से रोक सके. मैंने इस दौरान लोगों की आवाज़ सुनने और देश को आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा सम्बन्धित ख़तरों से बचाने की कोशिश की है. आज मैं आपसे ये नहीं छिपाऊंगा, कि मेरे सब्र का अंत हो चुका है. मैं इस्तीफ़ा देने जा रहा हूं. अल्लाह लेबनान की रक्षा करे."

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मुख्यमंत्री पद बाँटने को तैयार नहीं बीजेपी

शिव सेना और बीजेपी में महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर विवाद अभी थमा नहीं है लेकिन कहा जा रहा है कि शिव सेना कैबिनेट में अहम विभागों को लेकर मान सकती है.

शिव सेना बीजेपी के सामने गृह, शहरी विकास और राजस्व विभाग की मांग कर सकती है. हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए यह मांग भी आसान नहीं होगी.

बीजेपी मुख्यमंत्री का पद ढाई साल के लिए शिव सेना को देने को लेकर बिल्कुल राज़ी नहीं है. मंगलवार को देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच सत्ता में भागीदारी को लेकर बातचीत चल रही है. शिव सेना ने कैबिनेट में संख्या में बीजेपी के जितने ही मंत्री पद की भी मांग की है और इस पर दोनों के बीच बात बन सकती है.

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