जम्मू-कश्मीर में बदलावों पर जश्न या डर का माहौल

  • मोहित कंधारी
  • जम्मू से बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू और कश्मीर

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर से दो नए केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आ गए.

शीतकालीन राजधानी जम्मू में होने के बावजूद पुनर्गठन का सारा कार्यक्रम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रीनगर में हुआ.

जम्मू में नागरिक सचिवालय में कामकाज विधिवत रूप से 4 नवम्बर से शुरू होगा.

संसद से पारित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर विधान सभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश बन गया और दूसरी ओर बिना विधानसभा वाला लद्दाख सीधे केंद्र शासित बन गया है.

किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जगह-जगह अर्धसैनिक बलों के साथ-साथ जम्मू और कश्मीर पुलिस की तैनाती की गई है.

श्रीनगर के साथ-साथ जम्मू में भी सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं. आम दिनों के मुकाबले अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में संवदेनशील इलाकों में तैनाती की गई.

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अगर बात आम आदमी की करें यानी व्यापारी वर्ग की तो जम्मू में सब नई व्यवस्था के पूरी तरह से लागू होने का इंतज़ार कर रहे थे.

जम्मू शहर में रेजीडेंसी रोड स्थित एक दुकानदार विजय कुमार ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, "बाज़ार में डर और खौफ का माहौल पसरा हुआ है. किसी जगह कोई जश्न नहीं मना रहा. अफवाहें फैल रहीं हैं की सरकार फिर से कर्फ़्यू लगा देगी, अधिक संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.''

विजय कुमार कहते हैं कि 5 अगस्त को जब जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म किया गया उस दिन से हम सिर्फ कश्मीर के बारे में सुन रहे हैं. कश्मीर में 50000 सरकारी नौकरियां दी जाएंगी, कश्मीरी व्यापारियों के लिए पैकेज दिया जाएगा, कोई भी जम्मू के बारे में, यहां के व्यापारियों के बारे में नहीं बोल रहा.

वो कहते हैं कि अगर धारा 370 जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए बाधक थी तो आने वाले दिनों में सीधे तौर पर पता चल जाएगा कि इसे समाप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में कितना विकास हुआ है.

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नयी व्यवस्था में क्या-क्या बदलेगा?

इस समय जम्मू-कश्मीर विधान सभा में 107 सदस्य हैं लेकिन परिसीमन के बाद इनकी संख्या 114 तक पहुंच जाएगी. उपराज्यपाल के पास दो महिला सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार प्राप्त होगा.

जम्मू और कश्मीर पुदुचेरी के मॉडल और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की तर्ज़ पर काम करेगा.

केंद्र सरकार ने दोनों क्षेत्रों के बीच संसाधनों के बंटवारे को अमलीजामा पहनाने के लिए पूर्व रक्षा सचिव की अगुवाई वाली समिति को 6 महीने के अन्दर रिपोर्ट सौंपने को कहा है. यह समिति दोनों प्रदेशों की देनदारियों का बंटवारा करेगी और दोनों क्षेत्रों के राजस्व का बंटवारा उनकी जनसंख्या के अनुपात में होगा.

इस तबदीली के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में आधार कार्ड सहित 106 नए कानून पहली बार लागू हो गए हैं. इनमें मुस्लिम विवाह विच्छेद कानून, शत्रु सम्पति कानून, मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन एक्ट, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार शामिल हैं. विशेष राज्य का दर्जा होने से यहां विशेष रूप से लागू 153 कानून अब ख़त्म हो गए.

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आईपीसी के तेहत दर्ज होंगे मामले

अब जम्मू-कश्मीर के थानों में इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) के तहत ही मामले दर्ज किए जाएंगे. इससे पहले रणबीर पीनल कोड (आरपीसी) के अंतर्गत मामले दर्ज किए जाते थे.

देखा जाए तो आईपीसी और आरपीसी में कुछ ज़्यादा अंतर नहीं है लेकिन कुछ अपराध ऐसे हैं जिसके तहत कार्रवाई करने के लिए जम्मू-कश्मीर में विशेष अधिकार प्राप्त था. जम्मू-कश्मीर में कुल मिला कर 227 पुलिस स्टेशन हैं जहां पर आईपीसी धारा से सम्बंधित अपराध और इनके तेहत दर्ज होने वाले मामलो की जानकारी वाली किताबें पहुंच गई हैं.

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सात सरकारी आयोगों को बंद करने का फैसला

31 अक्टूबर से जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने सात सरकारी आयोगों को बंद करने का भी फैसला किया है.

इनमें मानवाधिकार आयोग, महिला एवं बाल विकास आयोग और सूचना आयोग मुख्य रूप से शामिल हैं.

इस संबंध में सामान्य प्रशासनिक विभाग द्वारा 23 अक्टूबर को आधिकारिक आदेश जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि 31 अक्टूबर से राज्य के सात आयोग अस्तित्व में नहीं रहेंगे. हालांकि, इन आयोगों को बंद करने का कोई कारण नहीं बताया गया.

ये आदेश 31 अक्‍टूबर से प्रभावी हो गए और जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया.

राज्य में जिन आयोगों को बंद किया जा रहा है, वे हैं.

  • जम्मू कश्मीर मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी)
  • राज्य सूचना आयोग (एसआईसी)
  • राज्य उपभोक्ता निवारण आयोग (एससीडीआरसी)
  • राज्य विद्युत नियामक आयोग (एसईआरसी)
  • महिला एवं बाल विकास आयोग (एससीपीडब्ल्यूसीआर)
  • दिव्यांग जनों के लिए बना आयोग (एससीपीडब्ल्यूडी)
  • राज्य पारदर्शिता आयोग (एसएसी)

इस संबंध में जारी आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत इन आयोगों को बंद करने का फैसला किया गया है.

इस संबंध में जारी आदेश में सातों आयोगों के सचिवों से इमारतें, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि डायरेक्टर एस्टेट को सौंपने को कहा गया है. इसके साथ ही आयोगों से कहा गया है कि वे संबंधित रिकॉर्डों को कानून, संसदीय मामलों, न्याय विभाग को सौंप दें.

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न्यायिक व्यवस्था में भी बदलाव

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के अस्तित्व में आते ही यहां की न्यायिक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगा.

सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए पब्लिक प्रासिक्यूटर (पीपी) के पद खत्म हो गए. इससे पहले सरकार की तरफ से 40 से अधिक पीपी तैनात किए हुए थे.

केंद्र शासित प्रदेश बनते ही सरकार की यह व्यवस्था खत्म हो गई. ऐसे में पुलिस के प्रासिक्यूटरों का काम बढ़ सकता है.

उसी पद पर बने रहने वाले अधिकारी

जम्मू और कश्मीर राज्य के केंद्र शासित प्रदेश बनने पर यहां के विभागीय अधिकारी पहले जैसे ही समान पदों पर कार्य करते रहेंगे. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 91 के तहत सभी प्रशासिनिक सचिव विभागाध्यक्ष, उपायुक्त और अन्य अधिकारी समान पदों पर बने रहेंगे.

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क्या कहती है जम्मू की जनता

जम्मू के कच्ची छावनी में रहने वाले राजीव कुमार ने बताया, "कश्मीर घाटी में फैले अलगाववाद को ख़त्म करने के लिए धारा 370 को हटाया गया है. जम्मू पहले भी जम्मू-कश्मीर इकाई का हिस्सा था और आज भी है. अब उस इकाई को चाहे राज्य का दर्जा हासिल हो या केंद्र शासित क्षेत्र का इससे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता".

राजीव कुमार ने कहा, "स्थानीय व्यापारियों के मन में चिंता घर कर गई है कि उन्हें इस नई व्यवस्था के अंतर्गत बाहरी राज्यों के व्यापारियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है, इसलिए वो चाहते हैं की उन्हें उनके हक से महरूम न किया जाए और सरकार उन्हें इस बात का विश्वास दिलाए कि उनका हक उनसे छीना नहीं जायेगा."

जम्मू चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रधान राकेश गुप्ता ने कहा, "जब तक हम नई व्यवस्था के अंतर्गत लागू होने वाले नियम कानूनों के बारे में ठीक से जानकारी हासिल नहीं कर लेते हम कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहते".

राकेश गुप्ता ने कहा, "अगर केंद्र सरकार ने राष्ट्र हित में कोई फैसला लिया है तो हमें उसका स्वागत करना चाहिए." इसके साथ-साथ वो यह भी कहने से नहीं चूकते हैं कि जम्मू संभाग से लगातार हो रहा भेदभाव अब समाप्त होना चाहिए और हम उम्मीद करते हैं कि नए उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू इस भेदभाव को समाप्त करेंगे.

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राजनीतिक दलों की राय

वहीं, दूसरी ओर जम्मू में कांग्रेस के नेता रविंदर शर्मा ने कहते हैं, "केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों से उनका हक छीना है. जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा हासिल था लेकिन इस समय उसे देश का सबसे कमज़ोर हिस्सा माना जा रहा है."

शर्मा कहते हैं, ''हमने केंद्र शासित क्षेत्रों को राज्य का दर्जा हासिल करते देखा है लेकिन इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब एक रियासत को दो केंद्र शासित क्षेत्र में बांट दिया गया. किस ने यह मांग की थी? राज्य की जनता को हासिल विशेष अधिकार उनसे छीन लिए गए हैं. विधान सभा की ताकत कमज़ोर कर दी गई है, विधान परिषद् समाप्त कर दी गई है.''

रविंदर शर्मा का कहना है कि आने वाले दिनों में जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा वापिस दिलाने के लिए आंदोलन होगा और आम जनता उस में शामिल होगी.

जम्मू-कश्मीर पंथेर्स पार्टी के नेता हर्षदेव सिंह कहते हैं, "भाजपा ने जम्मू के लोगों के साथ एक भद्दा मज़ाक किया है".

उनका मानना है कि अगर सरकार को कश्मीर में हालात ठीक करने थे तो वो कश्मीर को सिर्फ केंद्र शासित क्षेत्र बनाते, जम्मू को क्यों सज़ा दी गई है. उन्होंने कहा आने वाले दिनों में भाजपा को इसका जवाब देना पड़ेगा कि क्यों उन्होंने महाराजा की रियासत को एक नगर पालिका बना दिया और उसे एक एडिशनल सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी के हवाले कर दिया.

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जश्न

हालांकि, इस बदलाव से खुश होने वाले नेता भी हैं जो जश्न मना रहे हैं.

वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी नेता लाभा राम गांधी ने कहा कि वो 31 अक्टूबर के दिन एक बार फिर दिवाली मना रहे हैं क्योंकि 70 सालों के बाद उन्हें उनका हक हासिल हुआ है.

लाभा राम गांधी कहते हैं कि केंद्र शासित क्षेत्र बन जाने के बाद अब उनके बच्चे भी सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकेंगे. उन्होंने सरकार से अपील की है कि कश्मीरी पंडित विस्थापित परिवारों की मदद के लिए जिस प्रकार एक विशेष रिलीफ कमिश्नर कार्यालय बनाया गया है उनके लिए भी ऐसी ही व्ययवस्था की जानी चाहिए ताकि सभी परिवारों को उनका हक मिल सके और वो अपना जीवनस्तर सुधर सकें.

जम्मू में भाजपा प्रवक्ता अनिल गुप्ता ने बताया, ''5 अगस्त को जो निर्णय हुआ था वो एक ऐतिहासिक निर्णय था जिसे जम्मू के लोगों का पूर्ण समर्थन हासिल है. जम्मू के लोग इस बात को लेकर बहुत खुश हैं कि जम्मू के साथ जो भेदभाव होता था अब वो बिलकुल खत्म हो जाएगा. यहां भी विकास होगा और जम्मू के लोग अपने भाग्य के खुद विधाता होंगे.''

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