प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के दौरान हिरासत में लिए गए कई आदिवासी

नरेंद्र मोदी, Narendra Modi, SardarVallabhbhaiPatel

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सत्ता में आने के बाद 2014 से हर साल प्रधानमंत्री मोदी की सरकार सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाती है. इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात पहुंचे, जहां उन्होंने अपने भाषण में कहा कि हर भारतीय सरदार पटेल की एकता के विचार को महसूस कर सकता है.

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी पर अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "आज, सबसे ऊंची मूर्ति के नीचे हम सरदार की आवाज़ सुन सकते हैं."

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प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं खुश हूं कि (मैं) सरदार के सपने को सच कर पाया. सरदार के जन्मदिन पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख एक सुनहरे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं."

उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को सिर्फ अलगाववाद और आतंकवाद दिया."

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मोदी ने कहा, "ये देश में अकेली ऐसी जगह थी जहां अनुच्छेद 370 मौजूद था. जहां पिछले तीस सालों में चालीस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई और आतंकवाद की वजह से कई माओं ने अपने बेटों को खोया. अब 370 की ये दीवार गिर गई है."

"अनुच्छेद 370 के हटने के बाद उनकी आत्मा को शांति मिलेगी. सरदार पटेल ने कश्मीर को भारत में मिलाने का सपना देखा था."

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इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि "भारत की एकता पर हमले की हर कोशिश को हम नाकाम कर देंगे."

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस की परेड में भी हिस्सा लिया.

प्रदर्शन

दूसरी तरफ जिन लोगों से स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी बनाने के लिए ज़मीनें ली गईं वे प्रदर्शन कर रहे हैं.

ये स्थानीय आदिवासी ज़मीन और रोज़गार के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय एकता दिवस को 'काला दिवस' कह रहे हैं.

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के नज़दीक सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, जिसकी वजह से वहां प्रदर्शन नहीं हो सके. लेकिन इन लोगों ने गांवों में इकट्ठा होकर प्रदर्शन किए.

आदिवासी लोगों का दावा है कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के लिए उनकी ज़मीने ले ली गई, लेकिन उन्हें उचित रोज़गार नहीं दिया गया.

गांव वालों का दावा है कि उन्हें स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के नज़दीक फेरीवाले के तौर पर खाने का सामना बेचने की इजाज़त दी गई थी, लेकिन अब उन्हें इससे रोक दिया गया है.

स्थानी आदिवासी महिला पिनल ताडवी ने बीबीसी से कहा, "जब वनबंधु योजना के तहत फेरीवाला बनने की इजाज़त दी गई तो लोग हमारे पास आते थे, जिससे हम कुछ पैसे कमा लेते थे. मुझे लगा कि इससे मुझे अपने बच्चों को पालने-पोसने और पढ़ाने में मदद मिलेगी."

वो कहती हैं, "लेकिन फिर अचानक उन्होंने हमें फेरीवाले के तौर पर काम करने से रोक दिया और अब हमारे पास कोई काम नहीं है. मेरे सारे सपने टूट गए."

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182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी, दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है

प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

लोग केवड़िया में स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी पर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उन्हें राजपीपला पुलिस मुख्यालय ले गई.

पुलिस सब-इंस्पेक्टर सीएम गमित ने कहा कि 25 प्रदर्शनकारियों को केवड़िया से हिरासत में लिया गया है.

राजपीपला में पुलिस इंस्पेक्टर आरएन राठवा ने कहा कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के नज़दीक प्रधानमंत्री का कार्यक्रम चल रहा था. उस वक्त गांव वाले प्रदर्शन कर रहे थे, इसलिए हमने उन्हें हिरासत में लिया है.

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अधिकारियों ने क्या कहा?

आदिवासी लोग सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि विभिन्न पर्यटन स्थलों के विकास के लिए उनकी ज़मीनें ले ली गईं, लेकिन उचित मुआवज़ा और रोज़गार देने का वादा पूरा नहीं किया गया.

सरदार सरोवर पुनर्वास एजेंसी के सीईओ और पुनर्वास आयुक्त आई के पटेल दावा करते हैं कि ये आरोप ग़लत हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "जिन पांच सौ से अधिक आदिवासियों की ज़मीनें ली गईं, उन्हें आउटसोर्सिंग प्रोसेस के ज़रिए स्थाई नौकरियां दी गईं. इसके अलावा करीब एक हज़ार लोगों को कई अन्य योजनाओं में नौकरियां दी गईं."

उनके मुताबिक, "बदले में स्थानीय लोगों को उचित मुआवज़ा और ज़मीनें दी गई. जिन लोगों को मुआवज़ा नहीं मिला है, सरकार ने उन्हें मुआवज़ा देने के प्रस्ताव दिए हैं."

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गुजरात से बीबीसी की ख़ास पड़ताल

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