झारखंड में क्यों नहीं हो पा रही है गठबंधन की घोषणा?

  • 8 नवंबर 2019
बाबूलाल मारांडी इमेज कॉपीरइट Ravi Prakash /BBC

झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब सिर्फ 23 दिन बचे हैं. इसके बावजूद न तो सत्ता पक्ष का गठबंधन बन सका है और न विपक्षी पार्टियों का.

दोनों ही पक्षों के नेता यह दावा कर रहे हैं कि उनका दिल एक है. लिहाजा, दलों का मिलना औपचारिकता भर है. फिर भी यह औपचारिकता पिछले कई महीनों में पूरी नहीं की जा सकी है.

न तो भाजपा-आजसू पार्टी का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बन सका है, और न झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस और दूसरी गैर भाजपा पार्टियों का महागठबंधन.

इस बीच सभी दलों के नेताओं की तरफ से की जा रही बयानबाजी भी गठबंधन के पेंच को और पेचीदा कर रही है.

आखिर क्यों?

वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क कहते हैं कि गठबंधन किनका और किन पार्टियों से होगा, यह करीब-करीब तय है.

दिक्कत सीटों को लेकर है. दोनों ही गठबंधनों में कुछ ख़ास सीटों को लेकर पार्टियां अड़ी हुई हैं. यह पेंच सुलझते ही गठबंधनों का औपचारिक ऐलान हो जाएगा.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "यह तय है कि भाजपा और आजसू पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी साथ में चुनाव लड़ेगी. इसी तरह कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का गठबंधन बनना भी तय माना जा रहा है."

"सीटों की संख्या और उनके अलाटमेंट की बात हल होते ही, इनके महागठबंधन की भी घोषणा कर दी जाएगी. हालांकि, इसमें एक-दो दिनों का वक्त लग सकता है. तब तक पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी होगी."

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Image caption रांची में बीजेपी के दफ्तर चुनाव समिति की एक बैठक में रघुवर दास, लक्ष्मण गिलुवा और ओम माथुर

भाजपा-आजसू गठबंधन

भाजपा के झारखंड प्रमुख लक्ष्मण गिलुवा ने बीबीसी से कहा कि आजसू पार्टी से सीटों को लेकर कोई जिच नहीं है. जो थोड़ी-बहुत जिच है भी, वह दूर कर ली जाएगी.

हम लोग लगातार संपर्क में हैं और आज हमारी फिर से बातचीत होने वाली है. यह तय है कि हम गठबंधन में ही चुनाव लड़ेंगे.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "यह सच है कि हमने सभी 81 सीटों पर संभावित प्रत्याशियों की सूची बनायी है. लेकिन, इसका यह मतलब नहीं है कि हम सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे. दरअसल, प्रमंडल स्तरीय रायशुमारी में कार्यकर्ताओं ने हमें सभी सीटों के लिए कुछ लोगों के नाम सुझाए थे."

"हमने उन्हीं नामों की लिस्टिंग भर की है. यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. इससे गठबंधन के स्वरुप पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि आजसू पार्टी झारखंड में हमारी पारंपरिक सहयोगी रही है."

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Image caption कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष राजेठ ठाकुर

आजसू का तर्क

झारखंड के उपमुख्यमंत्री रह चुके सुदेश महतो की आजसू पार्टी भी यही दावा कर रही है. पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि उनकी पार्टी राजग के साथ है और रहेगी.

हम हर सीट पर जीत के हिसाब से उम्मीदवारों का चयन करेंगे और सीटों का बंटवारा भी इसी फ़ॉर्मूले पर होगा.

देवशरण भगत ने बीबीसी से कहा, "हमारी पार्टी आज तक इकाई अंक में विधायकों को विधानसभा भेजती रही है. इस बार हम दहाई अंक में विधानसभा में जाना चाहते हैं. हमने भाजपा से अपनी मंशा जाहिर कर दी है. उम्मीद है अगले 2-3 दिनों में हमारे गठबंधन का स्वरुप सार्वजनिक कर दिया जाएगा."

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Image caption एक सभा में शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन

विपक्ष का महागठबंधन

लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस, शिबू सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम) ने महागठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा था.

इस महागठबंधन को करारी हार मिली. तब कांग्रेस और जेएमएम के सिर्फ एक-एक उम्मीदवार चुनाव जीत सके थे. उस चुनाव में बाबूलाल मरांडी, शिबू सोरेन और सुबोधकांत सहाय सरीखे कद्दावर नेताओं की हार हुई.

अब बाबूलाल मरांडी अकेले प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लडेगी.

बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा, "अब चुनावों की घोषणा हो चुकी है. गठबंधन की बातचीत उससे पहले की जाती है. लिहाजा, हमलोग प्रचार और दूसरी कवायदों में व्यस्त हैं. झारखंड में विधानसभा की 81 सीटें हैं. जाहिर है कि हम उन्हीं 81 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे."

उनके इस बयान के बाद जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हमने मरांडी जी से मिलने का समय मांगा है लेकिन यह वक्त अभी तक नहीं मिल सका है.

बकौल हेमंत सोरेन, वे भाजपा विरोधी मतों का बिखराव रोकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. यह रणनीति कामयाब भी होगी. क्योंकि, भाजपा की सरकार ने पिछले पांच साल के दौरान कुछ नहीं किया है.

हेमंत सोरेन ने कहा, "जेएमएम कमसे कम 42 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. यह संख्या 43 या 45 हो सकती है. इसके साथ ही हम चाहते हैं कि महागठबंधन की घोषणा के साथ ही नेतृत्व की भी घोषणा कर दी जाए, क्योंकि बगैर पायलट हवाई जहाज नहीं उड़ता है."

इधर, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व प्रमुख रणनीतिकार राजेश ठाकुर ने बीबीसी से कहा कि विपक्षी पार्टियों के महागठबंधन में अब कोई विवाद नहीं है.

यह करीब-करीब तय है कि कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी और कुछ वाम दलों का महागठबंधन होगा. इसकी घोषणा जल्दी ही कर दी जाएगी.

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Image caption पार्टी की एक बैठक में सुदेश महतो

अब इंतजार

इस बीच झारखंड की सियासत दिल्ली शिफ्ट हो चुकी है.

मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत बीजेपी के सभी बड़े नेता दिल्ली में हैं. वहां केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद उम्मीदवारों के नाम और गठबंधन दोनों की घोषणा की जानी है.

वहीं, कांग्रेस के झारखंड प्रमुख रामेश्वर उरांव, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर, विधानसभा में विधायक दल के नेता आलमगीर आलम आदि भी दिल्ली में जमे हैं.

हेमंत सोरेन इससे पहले दिल्ली का चक्कर लगा चुके हैं. उन्होंने जेल में बंद आरजेडी प्रमुख लालू यादव से भी मुलाकात की है. ऐसे में झारखंड की सियासत के लिए अगले 56 घंटे काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

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