मूडीज़ ने भारत की अर्थव्यवस्था की रेटिंग 'स्थिर' से 'नकारात्मक' की

  • 8 नवंबर 2019
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क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग पर अपने आउटलुक यानी नज़रिये को बदलते हुए इसे 'स्थिर' से 'नकारात्मक' कर दिया है.

उसने इसकी वजह भारत की आर्थिक विकास की स्थिति पहले की तुलना में कम रहना बताई है. एजेंसी का कहना है कि सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर जोखिम बढ़ रहा है.

रेटिंग एजेंसी ने गुरुवार को कहा कि यह आउटलुक आंशिक रूप से आर्थिक सुस्ती को दूर करने में सरकार की नीतिगत अक्षमता को दिखाता है, इसके कारण पहले से बहुत अधिक कर्ज़ के दबाव में डूबे भारत पर कर्ज़ का बोझ और बढ़ा है.

दो साल पहले मूडीज़ ने भारत की रेटिंग को Baa3 से Baa2 किया था लेकिन अपनी नई रिपोर्ट में मूडीज़ ने लिखा कि, "देश में आर्थिक सुस्ती को गहराने और इस अवधि को लंबा होने से रोकने के भारत सरकार के उपायों के बावजूद, ग्रामीण परिवारों की आमदनी पर लंबे समय से पर रहे प्रभाव, रोज़गार सृजन की कमज़ोर स्थिति और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों में बढ़ती क्रेडिट के संकट ने आर्थिक सुस्ती की संभावना को बढ़ा दिया है."

एजेंसी ने लिखा कि, "अगर जीडीपी दर में मामूली वृद्धि अपने उच्च दर पर नहीं लौटती, तो सरकार को बजटीय घाटे और बढ़ते कर्ज़ को रोकने जैसी मुश्किलों को कम करने में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ेगा."

अन्य रेटिंग्स पर भारत का समर्थन करते हुए अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी ने कहा कि, "ऐसा लगता है कि भारत में यह सुस्ती अभी लंबे वक्त तक चलने वाली है."

अप्रैल-जून के बीच भारत की अर्थव्यवस्था में केवल 5 फ़ीसदी की वृद्धि हुई. इसकी वजह वैश्विक व्यापार में उपजे मतभेद, उपभोक्ता मांग और सरकारी खर्च में कमी को बताया गया है.

मूडीज़ ने 2004 में यूपीए सरकार के दौरान रेटिंग को गिराकर Baa3 कर दिया लेकिन नवंबर 2017 में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में इसे बढ़ाकर Baa2 कर दिया गया था.

हालांकि मूडीज़ पहले भी जीडीपी, नोटबंदी, नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) को लेकर सवाल उठाता रहा है. और बीते कुछ दिनों के दौरान मूडीज़ ने साल 2019-20 के लिए भारत के सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) की अनुमानित वृद्धि दर घटा कर 5.8 फ़ीसदी कर दी जो पहले 6.2 प्रतिशत थी.

अगर देश की आर्थिक विकास दर में आगे भी गिरावट का दौर जारी रहा तो मूडीज़ की रेटिंग पर और भी असर पड़ सकता है.

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क्या नहीं बदला?

हालांकि ऐसा नहीं है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी में सबकुछ नकारात्मक हो गया है.

इसमें भारत के दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा बांड और बैंक जमा सीमा में कोई बदलाव नहीं आया है. ये क्रमशः Baa1 और Baa2 हैं.

अल्पकालिक विदेशी मुद्रा बांड और बैंक जमा सीमा भी प्राइम-2 पर बरकरार हैं. जबकि दीर्घावधि स्थानीय मुद्रा बांड और जमा सीमा A1 पर ही मौजूद हैं.

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क्रेडिट रेटिंग क्या है?

किसी भी विदेशी या घरेलू कंपनी के लिए ये आकलन करना कठिन होता है कि भारत या किसी अन्य देश में अर्थव्यवस्था की मौलिक ​स्थिति कैसी है.

ऐसे में कंपनियां उस देश की क्रेडिट रेटिंग पर निर्भर करते हुए अपने निवेश की योजनाएं बनाती हैं.

ऐसा माना जाता है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी किसी अमुक देश में वहां के हर आयाम को देखते हुए एक रेटिंग देती है.

ये वहां की राजनीतिक स्थिति, पॉलिसी फ्रेमवर्क, आयात-निर्यात और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिस्पर्धा करने की ताक़त आदि को देखते हुए यह रेटिंग बनाती हैं.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां इसके बाद उन देशों को अलग अलग टैग देती हैं. मूडीज़ ए, बी और अनुमानित सी रेटिंग देती है.

Aaa सबसे बेहतरीन और C सबसे ख़राब रेटिंग मानी जाती है. इस रेटिंग के आधार पर कंपनियां अपनी निवेश योजनाएं बनाती हैं. हालांकि, ये रेटिंग निवेश करने के लिए आकलन के सिर्फ़ एक फैक्टर होते हैं.

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