Ayodhya Verdict: अयोध्या पर ऐतिहासिक फ़ैसले पर अब तक जो जो हुआ

  • 9 नवंबर 2019
रंजन गोगोई, Ranjan Gogoi, Ayodhya Verdict,
  • अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला. विवादित भूमि हिंदू पक्ष को मिली. मुसलमानों को मस्जिद के लिए 5 एकड़ ज़मीन उपयुक्त जगह पर.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फ़ैसले का हर वर्ग, हर संप्रदाय के लोगों ने खुले दिल से स्वीकार किया है.
  • ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने फ़ैसले का स्वागत किया और लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले, 'रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, सबके लिए ज़रूरी है भारतभक्ति.'
  • संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि फ़ैसले को किसी की हार, किसी की जीत की तरह न देखें.
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने फ़ैसले पर असंतोष जताया.

अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद ज़मीन के दशकों पुराने विवाद में सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने फ़ैसला सुना दिया है.

जहां बाबरी मस्जिद के गुंबद थे, 2.77 एकड़ की वो ज़मीन अब हिंदू पक्ष को मिलेगी. साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन उपयुक्त जगह पर दी जाएगी.

40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को इस दशकों पुराने मामले में पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अपना फ़ैसला दिया.

भारत के ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है और लोगों से शांति और भाईचारे की अपील की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम 6 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. इसमें उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फ़ैसला आने के बाद जिस प्रकार से हर वर्ग, हर संप्रदाय, हर समुदाय और हर पंथ के लोगों ने और पूरे देश ने खुले दिल से इसे स्वीकार किया है वो भारत की पुरातन संस्कृति, परंपराओं सद्भावना की भावनाओं को प्रतिबिंबित करता है.

उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया भारत को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है लेकिन दुनिया आज यह भी जान लिया है कि भारत का लोकतंत्र कितना जीवंत और मज़बूत है."

उन्होंने कहा कि देश की जनता आज नया इतिहास रच रही है और उसमें स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कोर्ट ने अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान सबको धैर्य से सुना और पूरे देश के लिए ख़ुशी की बात है कि फ़ैसला सर्वसम्मति से आया, यह कार्य सरल नहीं है.

ज़मीन पर हिंदुओं का दावा उचित मानते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर अयोध्या पर एक कार्ययोजना तैयार करने का कहा है.

सुप्रीम कोर्टने अपने फ़ैसले में और क्या कहा

  • पक्षकार गोपाल विशारद को मिला पूजा-पाठ का अधिकार.
  • कोर्ट ने कहा है कि बनायी गई ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को शामिल करना है या नहीं ये फ़ैसला केंद्र सरकार करेगी.
  • आस्था के आधार पर मालिकाना हक़ नहीं दिया जा सकता.
  • निर्मोही अखाड़ा का दावा खारिज.
  • बाबरी मस्जिद के नीचे एक संरचना पाई गई है जो मूलतः इस्लामी नहीं थी. विवादित भूमि पर अपने फ़ैसले में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान को नकारा नहीं जा सकता.
  • अंदर के चबूतरे पर कब्ज़े को लेकर गंभीर विवाद रहा है. 1528 से 1556 के बीच मुसलमानों ने वहां नमाज़ पढ़े जाने का कोई सबूत पेश नहीं किया गया.
  • बाहरी चबूतरे पर मुसलमानों का क़ब्ज़ा कभी नहीं रहा. 6 दिसंबर की घटना से यथास्थिति टूट गई.
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड इस स्थान के इस्तेमाल का सबूत नहीं दे पाया.
  • बाहरी चबूतरे पर हमेशा से हिन्दुओं का क़ब्ज़ा रहा. ऐतिहासिक यात्रा वृतांतों को भी ध्यान में रखा गया है.
  • ऐतिहासिक यात्रा वृतांत बताते हैं कि सदियों से मान्यता रही है कि अयोध्या ही राम का जन्मस्थान है.
  • हिन्दुओं की इस आस्था को लेकर कोई विवाद नहीं है. आस्था उसे मानने वाले व्यक्ति की निजी भावना है.
  • मस्जिद मीर बाक़ी ने बनाई थी, अदालत के लिए धर्मशास्त्र के क्षेत्र में दख़ल देना अनुचित होगा.
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सरकार की प्रतिक्रिया

अयोध्या विवाद पर जब सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया तो नरेंद्र मोदी करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए डेरा बाबा नानक में थे.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है. यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में क़ानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है.''

''हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया. न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीक़े से समाधान कर दिया. देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फ़ैसला सुना दिया है.''

''इस फ़ैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है. देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें.''

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, ''दशकों से चले आ रहे श्री राम जन्मभूमि के इस क़ानूनी विवाद को आज इस निर्णय से अंतिम रूप मिला है. मैं भारत की न्याय प्रणाली व सभी न्यायमूर्तियों का अभिनन्दन करता हूँ.''

संघ की प्रतिक्रिया

नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी फ़ैसले का स्वागत किया है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सभी से संयम बनाए रखने की अपील की और 'झगड़ा-विवाद' समाप्त करने की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि इसे हार-जीत की तरह नहीं देखना चाहिए.

उन्होंने कहा, "हम योगदान करने वाले सभी सहयोगियों और बलिदानियों को याद करते हैं. भाईचारा बनाए रखने के लिए सरकारी और समाज स्तर पर हुए प्रयासों का भी हम स्वागत और अभिनंदन करते हैं. संयमपूर्वक न्याय का इंतज़ार करने वाली भारतीय जनता भी बधाई की पात्र है. इसे जय-पराजय के रूप में नहीं देखना चाहिए. सभी से अनुरोध है कि संयमित और सात्विक तरीके से अपने आनंद को व्यक्त करें. अतीत की सभी बातों को भुलाकर हम सभी श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करेंगे."

संघ प्रमुख मोहन भागवत से पत्रकारों ने पूछा कि क्या संघ अब मथुरा-काशी पर सक्रिय होगा, जैसा संघ के आनुषांगिक संगठनों की ओर से पहले नारे लगाए जाते थे?

संघ प्रमुख ने ऐसी संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा, "मैं संघ में राष्ट्रीय पदाधिकारी भी नहीं था जब संघ इस आंदोलन से जुड़ गया. संघ आंदोलन करने वाला संगठन नहीं है. वह एक अपवाद के तौर पर इससे जुड़ा. अब हम दोबारा मनुष्य निर्माण के काम में लगेंगे."

असंतोष

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और मुसलमान पक्ष के वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने असंतोष ज़ाहिर किया है.

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह ज़मीन की लड़ाई नहीं थी, यह क़ानूनी हक़ की लड़ाई थी.

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा,, "ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरह मेरा भी यह मानना है कि हम इससे संतुष्ट नहीं है. सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम ज़रूर है पर अचूक नहीं है. ये जस्टिस जेएस वर्मा ने कहा था. जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराया, आज उन्हीं को सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि ट्रस्ट बनाकर मंदिर का काम शुरू कीजिए. मेरा कहना ये है कि अगर मस्जिद नहीं गिराई गई होती तो कोर्ट क्या फ़ैसला देता?"

ओवैसी ने शीर्ष अदालत की ओर से मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ ज़मीन दिए जाने के फ़ैसले पर भी असहमति जताई.

उन्होंने कहा, "हम अपने क़ानूनी अधिकार के लिए लड़ रहे थे. तमाम मजबूरियों के बावजूद मुसलमान इतना गया-गुज़रा नहीं है कि अपने अल्लाह के घर के लिए पांच एकड़ ज़मीन न ख़रीद सके. हमें किसी को ख़ैरात या भीख की ज़रूरत नहीं है."

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Image caption ज़फ़रयाब जिलानी

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने भी इससे पहले फ़ैसले पर असंतोष जताया.

उन्होंने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं लेकिन हम संतुष्ट नहीं हैं. हम देखेंगे कि आगे इस पर क्या किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, "उन्होंने आर्टिकल 142 के तहत ये फ़ैसला दिया. हमें देखना होगा कि क्या 142 को इस सीमा तक खींचा जा सकता है. हम दूसरे वकीलों से ये समझेंगे और तय करेंगे कि हमें पुनर्विचार याचिका दायर करनी है या नहीं. लोगों से अपील करता हूं कि शांति और संयम बनाए रखें. ये किसी की हार या जीत नहीं है."

क्या बोले राजनीतिक दल

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) ने एक बयान में कहा है कि उनकी पार्टी हमेशा कहती रही है कि अगर बातचीत से हल नहीं निकलता तो न्यायिक फ़ैसले से इसका हल होना चाहिए.

हालांकि पार्टी ने ये भी कहा है कि इस फ़ैसले के कुछ हिस्सों पर सवालिया निशान ज़रूर हैं.

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी फ़ैसले का स्वागत किया और लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की.

बसपा प्रमुख मायावती ने भी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हुए सौहार्द की अपील की है.

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी से जद्दोजहद का सामना कर रही शिवसेना ने भी इस फ़ैसले का स्वागत किया है. पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने 'जय श्रीराम' ट्वीट किया और पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने लिखा, "पहले मंदिर फिर सरकार!!! अयोध्या में मंदिर,महाराष्ट्र मे सरकार...जय श्रीराम!"

एनसीपी नेता शरद पवार ने भी फ़ैसले का सम्मान करते हुए बाकी राजनीतिक दलों और संगठनों से ऐसा करने की अपील की है.

तेलुगूदेशम पार्टी के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी इस फ़ैसले का सम्मान करने की अपील की है.

हाशिम अंसारी के पुत्र "पूरी तरह संतुष्ट"

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राम जन्मभूमि और बाबरी विवाद के सबसे उम्रदराज़ याचिकाकर्ता रहे दिवंगत हाशिम अंसारी के बेटे इक़बाल अंसारी ने कहा है कि वह अदालत के फ़ैसले से पूरी तरह संतु्ष्ट हैं.

उन्होंने कहा, "हम 200 फ़ीसदी संतुष्ट हैं. कोर्ट ने जो फ़ैसला किया वो सही किया. हम पहले भी कोर्ट का सम्मान करते रहे हैं और आज भी यही कर रहे हैं. सरकार ने अगर ये मसला तय कर दिया तो ये अच्छी बात है. सरकार जो करेगी हम उसे मानेंगे. मैं हिंदू और मुसलमान दोनों भाइयों को कहना चाहता हूं कि सरकार ने ये मसला ख़त्म कर दिया, इसे मानें."

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

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Image caption आसिफ़ ग़फ़ूर

भारत में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की चर्चा पाकिस्तान में भी है. पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर भी यह मामला ट्रेंड में रहा.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने इसे 'भारत का अतिवादी' चेहरा बताया है.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ़ ग़फ़ूर ने ट्वीट कर कहा, ''दुनिया ने एक बार फिर से अतिवादी भारत का असली चेहरा देख लिया है. पाँच अगस्त को कश्मीर का भारत ने संवैधानिक दर्जा ख़त्म किया और आज बाबरी मस्जिद पर फ़ैसला आया. दूसरी तरफ़ पाकिस्तान दूसरे धर्म का आदर करते हुए गुरु नानक के सेवकों के लिए करतारपुर कॉरिडोर खोल दिया.''

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