अयोध्या फ़ैसला: राम मंदिर निर्माण आंदोलन चलाने वाले आडवाणी क्या बोले

  • 9 नवंबर 2019
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अयोध्या मामले पर फ़ैसला आने के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले लालकृष्ण आडवाणी ने बयान दिया है.

पढ़िए उन्होंने क्या कहा..

मैं अपने देशवासियों के साथ मिलकर अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के ऐतिहासिक फ़ैसले का तहेदिल से स्वागत करता हूं.

आज मैं सही साबित हुआ, और बहुत ही सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से फ़ैसला देकर अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भगवान राम का भव्य मंदिर बनाने का रास्ता खोल दिया है.

मेरे लिए ये लम्हा संतुष्टि से भरा है, क्योंकि भगवान ने मुझे जन आंदोलन में अपना योगदान देने का मौक़ा दिया था. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बाद ये सबसे बड़ा जन आंदोलन था. आज सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से उस आंदोलन का मक़सद पूरा हो सका है.

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रामजन्मभूमि के लिए दिलों में ख़ास जगह

मैं हमेशा से इस बात पर ज़ोर देता रहा हूं कि राम और रामायण की भारत की संस्कृति और विरासत में सम्मानित जगह रही है और भारत के अंदर और बाहर रहने वाले करोड़ों देशवासियों के दिल में राम जन्मभूमि के लिए ख़ास और पवित्र जगह रही है.

इसलिए ये बहुत ही संतुष्टि देने वाली बात है कि उनकी आस्था और भावनाओं का सम्मान किया गया है.

मैं शीर्ष अदालत के उस फ़ैसले का भी स्वागत करता हूं, जिसमें कहा गया है कि आयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए एक प्रमुख जगह पर पांच एकड़ ज़मीन दी जाएगी.

दशकों से चल रहे इस मामले में तरह-तरह के विवाद जुड़ते जा रहे थे, लेकिन आज इस लंबी और विवादित प्रक्रिया का समापन हो गया.

अब लंबे वक़्त से चला आ रहा अयोध्या का ये मंदिर-मस्जिद विवाद ख़त्म हो गया है. वक़्त आ गया है कि अब सभी विवादों और कड़वाहट को पीछे छोड़कर, सांप्रदायिक एकता और शांति को अपनाया जाए.

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मैं समाज के सभी वर्गों से अपील करूंगा कि वो भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मज़बूत करने के लिए साथ मिलकर काम करें.

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान, मैंने कई बार कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का असली उद्देश्य एक शानदार राष्ट्र मंदिर का निर्माण करना है. भारत को एक मज़बूत, समृद्ध, शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण राष्ट्र बनाना है. जिसमें सभी को न्याय मिले और कोई इसके दायरे से बाहर ना रहे.

आइए हम आज उस महान मिशन के लिए ख़ुद को समर्पित करें.

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