पश्चिम बंगाल: गाय चोरी के शक में दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या

  • 22 नवंबर 2019
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पश्चिम बंगाल के कूचबिहार ज़िले में गाय चोरी करने के शक़ में दो लोगों को पीट-पीटकर मार देने का मामला सामने आया है. इनके नाम प्रकाश दास (32) और रबीउल इस्लाम (40) हैं.

पुलिस ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ़्तार किया है. यह घटना ज़िले के पुटीमारी फूलेश्वरी ग्राम पंचायत में गुरुवार को हुई.

पुलिस ने बताया कि माथाभांगा के रहने वाले प्रकाश दास (32) और रबीउल इस्लाम (40) गुरुवार सुबह एक पिकअप वैन में दो गायों को लेकर जा रहे थे. उसी समय स्थानीय लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया और उनकी पिटाई करने लगे. उनकी गाड़ी में भी आग लगा दी.

इस घटना की सूचना मिलने पर मौक़े पर पहुंची पुलिस दोनों लोगों को गंभीर हालत में कूचबिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गई. लेकिन वहां डाक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उनके पास मौजूद दोनों गाएं चोरी की थीं या नहीं.

दोनों मृतकों के कामकाज और पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है.

पुटीमारी फूलेश्वरी ग्राम पंचायत की प्रधान आलना यास्मीन कहती हैं, "ऐसी घटनाओं का समर्थन नहीं किया जा सकता. हो सकता है कि ग़लतफ़हमी की वजह से यह घटना घटी हो."

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Image caption कूचबिहार ज़िले के पुलिस अधीक्षक निम्बालकर

गायों कीरखवाली की जाती थी

उधर, जिस गांव में यह घटना हुई है उसके तमाम पुरुष सदस्य फ़रार हो गए हैं.

मौक़े पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी जितेन दास (बदला हुआ नाम) बताते हैं, "हमारे गांव में रोज़ाना रात को पशु चोर आते हैं. उनके साथ गाय तस्करों के भी संबंध हैं. यहां बांग्लादेश सीमा नज़दीक ही है. चोरों को पकड़ने के लिए गांव वाले बारी-बारी पहरा देते हैं."

घटना का ब्यौरा देते हुए वो बताते हैं कि गुरुवार तड़के गाड़ी की आवाज़ से लोगों को संदेह हुआ. लोगों ने घर से निकलकर देखा कि दो लोग पिकअप वैन पर दो गाएं ले जा रहे हैं. इससे लोगों की नाराज़गी फूट पड़ी.

उसके बाद लोगों ने दोनों को गाड़ी से उतारकर उनकी पिटाई शुरू कर दी. इलाक़े के लोगों ने गायों को गाड़ी से उतारकर उसमें (गाड़ी में) आग लगा दी. स्थानीय लोगों का दावा है कि गाड़ी में कोई नंबर प्लेट नहीं थी. इससे उनका संदेह यक़ीन में बदल गया. हालांकि पुलिस ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है.

गांव के एक अन्य सदस्य नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि बीते एक सप्ताह के दौरान गांव से चार गाएं चुरा ली गई थीं. पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई थी. लेकिन उससे जब कोई फ़ायदा नहीं हुआ तो गांव वालों ने रात को ख़ुद ही पहरा देने का फ़ैसला किया.

मृतकों को बताया बेकसूर

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एक मृतक प्रकाश दास के चाचा सोमेश्वर दास दावा करते हैं कि उनका भतीजा बेकर था.

वो कहते हैं, "मेरा भतीजा पशुओं की ख़रीद-फरोख़्त का काम ज़रूर करता था. लेकिन वो पशु चोरी या उनकी तस्करी में शामिल नहीं था. सोमेश्वर ने कहा कि प्रकाश अपने कारोबारी साझीदार बबलू के साथ गायों को लेकर किसी को बेचने जा रहा था."

प्रकाश अपने घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था. उन्होंने राज्य सरकार से दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने और मृतक के परिजनों को मुआवज़ा देने की भी मांग की है.

दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि फ़िलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि दोनों लोग क्या काम करते थे.

कूचबिहार कोतवाली थाने के एक अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "इलाक़े में बांग्लादेश से सटी सीमा के कई जगह से खुली होने के कारण यहां पशुओं की तस्करी आम है. हाल के महीनों में इलाक़े में कई गाएं ग़ायब हो चुकी हैं. इलाक़े में पशु तस्करों के कई गिरोह सक्रिय हैं."

पुलिस अधीक्षक निम्बालकर बताते हैं, "हमने 14 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है और बाक़ी अभियुक्तों की तलाशी में छापेमारी चल रही है. इस मामले की जांच की जा रही है. मृतकों की पृष्ठभूमि का भी पता लगाया जा रहा है. इसलिए जांच पूरी होने से पहले इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहना मुश्किल है."

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Image caption पिकअप वैन.

भीड़ हत्या पर अंकुश नहीं

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार भीड़ के हाथों पिटाई और हत्या की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए तीन महीने पहले द वेस्ट बंगाल (प्रीवेंशन आफ लिंचिंग) बिल, 2019 को विधानसभा में पारित कर चुकी है.

हालांकि, अब तक इसे राज्यपाल का अनुमोदन नहीं मिला है. इस क़ानून में किसी पर हमला करने और उसे घायल करने के दोषी लोगों को तीन साल से लेकर आजीवन सज़ा तक का प्रावधान है.

भीड़ की पिटाई से संबंधित व्यक्ति की मौत की स्थिति में दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा के साथ ही पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी भरना होगा. लेकिन बावजूद इसके बीते तीन महीनों में अलग-अलग घटनाओं में कम से कम नौ लोगों की भीड़ की पिटाई से मौत हो चुकी है.

बीती जुलाई में उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी और अलीपुरदुआर ज़िलों में बच्चा चोर होने के संदेह में एक महिला और पुरुष की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी.

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इसी तरह मालदा ज़िले में मोटरसाइकिल चुराने के संदेह में सनाउल शेख नामक एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इलाज के लिए कोलकाता लाने के बावजूद भी उसे बचाया नहीं जा सका था.

उसके बाद पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में संजय चंद्र नामक एक युवक को भी चोर होने के संदेह में पीटकर मार डाला गया था.

इससे पहले कथित गोरक्षकों ने उत्तर बंगाल में तीन लोगों को पीट-पीटकर मार डाला था.

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष का दावा है कि देश में भीड़ के हाथों हत्या की सबसे ज़्यादा घटनाएं पश्चिम बंगाल में ही होती हैं.

घोष कहते हैं, "बंगाल में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह ढह चुकी है. राजनीतिक दबाव की वजह से पुलिस प्रशासन का मनोबल पूरी तरह से टूट गया है. ऐसी घटनाओं में वृद्धि से साफ़ है कि महज़ क़ानून बनाकर इन पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता."

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