उत्तर प्रदेश होमगार्ड ड्यूटी में घोटाला कैसे किया गया

  • 1 दिसंबर 2019
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Image caption होमगार्डों के फ़र्ज़ी मस्टर रोल तैयार कर करोड़ों रुपये के सरकारी कोष का गबन किया जा रहा था (फ़ाइल फ़ोटो)

उत्तर प्रदेश के दो ज़िलों में होमगार्ड जवानों की फ़र्ज़ी तैनाती दिखाकर सरकारी पैसा हड़पने के आरोप में अब तक नौ अधिकारियों की गिरफ़्तारी हो चुकी है और कई लोग अभी भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं.

लेकिन बताया जा रहा है कि इस विभाग में भ्रष्टाचार का ये खेल, दो ज़िलों तक ही सीमित नहीं है और न ही ड्यूटी में हेर-फ़ेर तक, बल्कि इसका दायरा काफ़ी व्यापक है और ये पिछले कई साल से होता चला आ रहा है.

क़रीब दो हफ्ते पहले नोएडा में होमगार्ड विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से होमगार्ड जवानों की 'ड्यूटी का खेल' सामने आया.

पता चला कि थानों में होमगार्डों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दर्ज कराई जाती थी जबकि वास्तव में भेजे गए जवानों की संख्या इससे काफ़ी कम होती थी. बढ़े हुए जवानों के वेतन भुगतान की राशि का अधिकारी बंदरबांट कर लेते थे.

मामला संज्ञान में आते ही पांच अधिकारियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई और होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान ने राज्य के सभी ज़िलों में इस तरह की अनियमितता की जांच के आदेश दे दिए.

लेकिन उसके अगले ही दिन यानी 18 नवंबर को नोएडा के ज़िला कमांडेंट होमगार्ड के दफ़्तर में उस कमरे में आग लग गई जहां इस कथित घोटाले से संबंधित दस्तावेज़ रखे हुए थे.

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Image caption नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण

व्हिसलब्लोअर पर ही आरोप

बुधवार को कथित तौर पर आग लगाने वाले प्लाटून कमांडर राजीव कुमार को जब पुलिस ने गिरफ़्तार किया तो वो ख़ुद भी हैरान रह गई कि दस्तावेज़ों को जलाने के पीछे वही व्यक्ति है जिसने सबसे पहले कथित घोटाले की जानकारी दी थी.

नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण बताते हैं, "इसी साल जुलाई महीने में राजीव कुमार ने इस घोटाले के बारे में लिखित शिकायत दी थी जिसके आधार पर विभागीय जांच कराई गई और दोषी पाए गए लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करके उन्हें गिरफ़्तार किया गया. सीसीटीवी फ़ुटेज के आधार पर राजीव कुमार को दस्तावेज़ जलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है."

इससे पहले बीस नवंबर को नोएडा पुलिस ने इसी मामले में पांच लोगों को गिरफ़्तार किया था जिनमें डिविज़नल कमांडेंट राम नारायण चौरसिया और असिस्टेंट कमांडेंट सतीश चंद्र भी शामिल थे. चौरसिया साल 2017 से साल 2019 तक नोएडा में होमगार्ड कमांडेंट के पद पर रह चुके हैं.

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Image caption राम नारायण चौरसिया

ज़िला होमगार्ड कमांडेंट गिरफ्तार

जुलाई में प्लाटून कमांडर राजीव कुमार की शिकायत के बाद एसएसपी वैभव कृष्ण ने एसपी सिटी से सात थानों की जांच कराई तो जांच में शिकायत सही पाई गई.

पता चला कि होमगार्डों के फ़र्ज़ी मस्टर रोल तैयार कर करोड़ों रुपये के सरकारी कोष का गबन किया जा रहा था. नोएडा में यह मामला सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में इसकी जांच के आदेश दिए गए.

इसी दौरान, राजधानी लखनऊ में भी होमगार्डों की फ़र्ज़ी ड्यूटी लगाकर वेतन हड़पने का मामला उजागर हुआ. लखनऊ के गुडंबा थाने के इंस्पेक्टर ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कराई जिसके बाद लखनऊ के ज़िला होमगार्ड कमांडेंट कृपा शंकर पांडेय को गिरफ़्तार कर लिया गया.

डीजीपी ओपी सिंह ने बताया, "जांच में पता चला है कि फ़र्ज़ी दस्तावेज़ के आधार पर मस्टर रोल तैयार कर सरकारी धन का गबन किया गया है. सिर्फ़ एक थाने में दो महीने के भीतर पांच लाख रुपये से ज़्यादा का गबन हुआ है. गुडंबा थाने में सिर्फ़ नौ होमगार्ड के जवान ड्यूटी पर तैनात थे जबकि काग़ज़ पर 23 जवान तैनात दिखाए गए थे."

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Image caption कृपा शंकर पांडेय

ड्यूटी का रिकॉर्ड

इसी मामले में बुधवार को लखनऊ की गोमतीनगर पुलिस ने होमगार्ड विभाग के ब्लॉक अफ़सर को भी गिरफ्तार किया जबकि एक अन्य अभियुक्त और होमगार्ड के कंपनी कमांडर ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया.

लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी का कहना था कि इस मामले में इन दोनों को पुलिस एक हफ़्ते से तलाश रही थी. इससे पहले, सरकार ने मेरठ के डिविजनल कमांडेट होमगार्ड डीडी मौर्या को निलंबित कर दिया था.

इस मामले के संज्ञान में आते ही पूरे प्रदेश में होमगार्ड जवानों की ड्यूटी का सत्यापन नए सिरे से कराया जा रहा है और ज़िला कमांडेट और मंडलीय कमांडेट से एक सप्ताह में सत्यापन की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं. कार्रवाई पूरी होने तक ड्यूटी का भुगतान रोक देने के निर्देश दिए गए हैं.

प्रमुख सचिव होमगार्ड अनिल कुमार के मुताबिक, "अभी तक होमगार्ड जवानों की ड्यूटी का रिकॉर्ड केवल ज़िला कमांडेंट के पास ही होता था. अब ऐसी व्यवस्था की जा रही है ताकि थाना स्तर पर भी इसका रिकॉर्ड रखा जा सके. अभी तक ड्यूटी के लिए मस्टर रोल की एक ही कॉपी बनती थी जिसकी मूल प्रति ज़िला कमांडेंट के यहां जमा हो जाती थी. उसका कोई अन्य रिकार्ड ही नहीं होता था और न ही कहीं उपस्थिति दर्ज होती थी. ड्यूटी करने वाले होमगार्डों की थानों की जीडी में ड्यूटी के पहले दिन उपस्थिति दर्ज होती थी, उसके बाद कब तक ड्यूटी की और कहां-कहां ड्यूटी की, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता था."

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Image caption क़रीब दो हफ्ते पहले नोएडा में होमगार्ड विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से होमगार्ड जवानों की 'ड्यूटी का खेल' सामने आया (फ़ाइल फ़ोटो)

नई व्यवस्था

प्रमुख सचिव के मुताबिक़ अब तक मस्टर रोल पर ड्यूटी लेने वाले ज़िम्मेदार पुलिस अधिकारी का न तो स्पष्ट नाम होता था और न ही स्पष्ट हस्ताक्षर.

लेकिन अब ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि इन्हें ड्यूटी प्रभारियों से सत्यापित कराकर उनके स्पष्ट पद और नाम के साथ मुहर लगवाई जाएगी. मस्टर रोल की एक प्रति ड्यूटी स्थल यानी संबंधित थानों पर भी रखी जाएगी, ताकि सही और ग़लत ड्यूटी पता चल सके.

होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "हर ज़िले में जांच कराई जा रही है. साथ ही थानों में भी जांच की जा रही है. इसके अलावा कई होमगार्ड जवानों से भी पूछताछ की जा रही है. जांच में सब कुछ सामने आ जाएगा. कोई भी दोषी बख़्शा नहीं जाएगा."

होमगार्ड के जवानों की ड्यूटी पुलिसकर्मियों के सहायक के तौर पर लगाई जाती है. पुलिस थानों और ट्रैफ़िक व्यवस्था में जितने होमगार्डों की ड्यूटी की ज़रूरत होती है, होमगार्ड विभाग से उतने जवान भेज दिए जाते हैं.

जानकारों के मुताबिक़, ये पूरा सिस्टम ज़िला कमांडेंट के दफ़्तर से संचालित होता है और ड्यूटी में अनियमितता की पूरी रूपरेखा भी वहीं बनती है. कमांडेंट के अधीनस्थ अधिकारी इसमें उसके सहयोगी की भूमिका अदा करते हैं.

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में होमगार्ड जवानों का वेतन बढ़ाने के आदेश दिए थे (फ़ाइल फ़ोटो)

'घोटाला इससे भी बड़ा है'

होमगार्ड विभाग में उच्च पद पर काम कर रहे एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, "जो घोटाला सामने आया है, वह तो कुछ नहीं है. इससे बड़ा घोटाला तो यह है कि हर एक होमगार्ड के जवान से अभी तक उसे ड्यूटी देने की एवज़ में अनिवार्य रूप से कमीशन लिया जाता था और इस कमीशन की राशि सीधे कमांडेंट दफ़्तर तक पहुंचती थी जहां इसकी बंदरबांट की जाती थी. सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती और ड्यूटी के दिन निश्चित करने के बाद इसमें कुछ कमी ज़रूर आई है लेकिन खेल अभी भी जारी है."

इस बात की पुष्टि होमगार्ड के कई जवान करते हैं. ये जवान अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते लेकिन इनका साफ़ कहना है कि वो नियमित तौर पर अपनी ड्यूटी लगवाने और मनचाही जगह पर लगवाने के लिए अधिकारियों को पैसे देते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में होमगार्ड जवानों का वेतन बढ़ाने के आदेश दिए थे जिसके बाद इनका प्रतिदिन का वेतन 500 रुपये से बढ़कर 672 रुपये हो गया था.

लेकिन राज्य सरकार ने इस वेतन को समायोजित करने के लिए महीने में ड्यूटी के दिन 25 से घटाकर 15 कर दिए थे. बताया जा रहा है कि अधिकारी इन पंद्रह दिनों की ड्यूटी भी अपने हिसाब से ही देते हैं.

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