भोपाल गैस त्रासदी: 35 साल और उसके ज़ख्म

  • 2 दिसंबर 2019
Union Carbide plant, Bhopal, India इमेज कॉपीरइट Judah Passow

भोपाल गैस त्रासदी को 35 साल हो चुके हैं. 2-3 दिसंबर 1984 की रात को हुआ ये भयावह हादसा हज़ारों लोगों को निगल गया.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड कैमिकल प्लांट से निकली ज़हरीली गैस से 24 घंटों में तीन हज़ार लोगों की जान चली गई और हज़ारों उसके बाद अलग-अलग तरह की शारीरिक विसंगतियों का शिकार हो गए.

कई लोगों को फेफड़ों संबंधी बीमारी हो गई तो कई ज़िंदगी भर के लिए विकलांग हो गए. वो बच्चे भी इसके कहर से न बच सके जो उस वक़्त गर्भ में थे.

फोटोग्राफ़र जूडा पासो ने उन लोगों की ज़िंदगी को तस्वीरों में उतारने की कोशिश की जो उस भयावह हादसे के जख़्मों के साथ जीने को मजबूर हैं.

शाकिर अली खान अस्पताल में सांस संबंधी समस्याओं की जांच के लिए एक्स-रे कराता एक मरीज. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption शाकिर अली ख़ान अस्पताल में सांस संबंधी समस्या की जांच के लिए एक्स-रे कराता एक मरीज. यह शख़्स हादसे के दौरान ज़हरीली गैस के संपर्क में आ गया था.
चिरायू कैंसर हॉस्पिटल में मरीज का इलाज़ करते डॉक्टर इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption हादसे के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अभियान चालने वालों का कहना है कि ज़हरीली गैस के कारण करीब 20 हज़ार लोगों की जान चली गई थी. कई लोग अब भी उसके परिणाम झेल रहे हैं.
ब्लू मून कॉलोनी में रहने वालीं एक महिला इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption ब्लू मून कॉलोनी में रहने वालीं एक महिला. 1984 में पांच लाख 50 हजार लोग इससे प्रभावित हुए थे, जो भोपाल की दो तिहाई जनसंख्या के बराबर है.
यहां के लोगों को पाइप के ज़रिए साफ़ पानी पहुंचाया जाता है. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption यहां के लोगों को पाइप के ज़रिए साफ़ पानी पहुंचाया जाता है. वैज्ञानिकों और अभियानकर्ताओं का मानना है कि मिट्टी और ज़मीन के पानी में लगातार केमिकल का रिसाव हुआ है.
पीड़ितों का कहना है कि बच्चे अब भी विसंगतियों के साथ पैदा हो रहे हैं. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption पीड़ितों का कहना है कि बच्चे अब भी विसंगतियों के साथ पैदा हो रहे हैं.
प्राची चुग को सेरेब्रल पाल्सी है और उनका ठीक से मानसिक विकास नहीं हो पाया है. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption प्राची चुग को सेरेब्रल पाल्सी है और उनका ठीक से मानसिक विकास नहीं हो पाया है. उनकी मां ज़हरीली गैस के संपर्क में आ गई थीं जिसके कारण गर्भ के अंदर ही प्राची पर गैस का असर हो गया.
भोपाल में संभावना ट्रस्ट क्लीनिक में एक पीड़ित का स्टीम थेरेपी से इलाज हो रहा है. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption भोपाल में संभावना ट्रस्ट क्लीनिक में एक पीड़ित का स्टीम थेरेपी से इलाज हो रहा है. ये क्लीनिक पारंपरिक आयुर्वेदिक दवाई के ज़रिए पीड़ितों का इलाज करता है.
चिंगारी ट्रस्ट फिजिकल-थेरेपी क्लीनिक में जिन बच्चों का इलाज हुआ उनके हाथों के निशान. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption चिंगारी ट्रस्ट फिजिकल-थेरेपी क्लीनिक में जिन बच्चों का इलाज हुआ उनके हाथों के निशान.
ओरिया प्राथमिक स्कूल में खेलते बच्चे. इस स्कूल का भविष्य भी अनिश्चित है. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption ओरिया प्राथमिक स्कूल में खेलते बच्चे. इस स्कूल का भविष्य भी अनिश्चित है.
भोपाल गैस त्रासदी के विरोध में प्रदर्शन करते लोग. इमेज कॉपीरइट Judah Passow
Image caption पीड़ितों को दिये गये मुआवज़े को 1989 में सुप्रीम कोर्ट ने उचित बताया था. लेकिन, कई लोग मानते हैं कि और मुआवज़ा मिलना चाहिए और इलाक़े की ठीक से सफ़ाई होनी चाहिए.

सभी तस्वीरें फोटोग्राफर जुडा पासो की हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार