राहुल गांधी पर एक बार फिर शरद पवार के तीखे बोल!

  • 20 दिसंबर 2019
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Image caption शरद पवार के साथ राहुल गांधी

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन और तेज़ होता जा रहा है. ऐसे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी के सामने 'एक ऐसे विकल्प की ज़रूरत है जो देश में टिक सके.'

शरद पवार ने अपने इस बयान में 'देश में टिकने' की बात कह कर किसका ज़िक्र कर रहे थे यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया लेकिन अटकलों का बाज़ार गरम हो गया कि उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था.

दरअसल जहां एक तरफ नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं राहुल गांधी दक्षिण कोरिया चले गए.

वहां उन्होंने मंगलवार को दक्षिण कोरियाई प्रधानमंत्री ली नाक-योन से मुलाक़ात की.

जब राहुल के विदेश जाने पर मचा हड़कंप

ऐसे कई मौक़े आए, जब राहुल गांधी के असमय विदेश जाने पर तंज कसा जाता रहा है.

दिसंबर 2012 को जब निर्भया रेप और हत्या मामले में देशभर में आंदोलन चल रहा था और केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी, तब भी वे विदेश चले गए थे.

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद 2015 में जब भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष एकजुट हो रहा था तब भी राहुल सदन में नहीं थे.

उन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर छुट्टी मांगी थी और दो महीने के क़रीब विदेश में रहे थे.

उसी वर्ष जब बिहार विधानसभा का प्रचार जोरों पर था तो सितंबर के महीने में राहुल विदेश चले गए जिसका तब खूब मज़ाक भी उड़ा था.

नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद विरोध करते हुए राहुल गांधी बैंक की क़तार में लगे लेकिन इसके कुछ समय बाद ही वे विदेश चले गए.

और तो और, अभी हाल ही में जब महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो उसके बाद भी राहुल 21 अक्तूबर को कंबोडिया चले गए थे.

अब एक बार फिर ऐसा ही हुआ. सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने भी इस पर तल्ख टिप्पणी की, तो महाराष्ट्र की सत्ता में सहयोगी पार्टी एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने सीधे तौर पर तो नहीं बल्कि इशारों में उन पर यह टिप्पणी की.

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क्या पवार का इशारा राहुल की तरफ था?

बीबीसी मराठी के संपादक आशीष दीक्षित कहते हैं कि बिल्कुल यह इशारा राहुल की तरफ़ ही था. जब पवार से यह पूछा गया कि देश में नरेंद्र मोदी की जगह कोई विकल्प दिखता है आपको तो उन्होंने कहा कि विकल्प तो हो सकता है लेकिन वो उस समय देश में होना चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया लेकिन उन्हीं पर निशाना साधते हुए यह तल्ख टिप्पणी की है.

आशीष कहते हैं, "यह पहली बार नहीं है जब पवार ने राहुल को लेकर कुछ कहा हो. उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए थे. जब राहुल गांधी ने बिल की कॉपी फाड़ दी थी तब पवार ने कहा था कि उन्हें यह परिपक्व तरीक़ा नहीं दिखता."

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यूपीए सरकार के दौरान जब एक बार शरद पवार ने इस्तीफ़ा दिया था तब भी उन्होंने राहुल के नेतृत्व को लेकर सवाल पैदा किए थे. उस दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि राहुल गांधी को अभी बहुत कुछ सीखना बाक़ी है.

आशीष कहते हैं, "जब भी ये बात चलती थी कि अगर मनमोहन सिंह की जगह राहुल गांधी नेतृत्व संभालेंगे तो क्या शरद पवार इसे स्वीकार करते हुए उनके तहत काम करना पसंद करेंगे. एनसीपी के कई नेता यह कहा करते थे कि सोनिया के नेतृत्व में पवार काम कर सकते हैं लेकिन राहुल के नेतृत्व में काम करना उन्हें गंवारा नहीं होगा."

"नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ कांग्रेस की रामलीला मैदान की रैली में अपने भाषण से राहुल गांधी ने एक तरह से कमबैक किया है. उसके बाद यह चर्चा भी शुरू हुई है कि क्या राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर वापसी करने वाले हैं. सोनिया गांधी वैसे भी कुछ ही समय के लिए कांग्रेस की अध्यक्ष बनी हैं और महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश में कांग्रेसी नेता यह मांग करते रहे हैं."

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"लेकिन ऐसे समय में शरद पवार का यह बयान यह बताता है कि समूचा विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व को नहीं स्वीकारता है."

शरद पवार का राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर बहुत से सवाल हैं, लिहाजा वे इस बात को आगे बढ़ाना नहीं चाहते.

हालांकि महाराष्ट्र में सेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन को लेकर ये शरद पवार ही थे जिन्होंने सोनिया से पूरे मसले पर बात की थी.

लिहाजा हाल के इस प्रकरण से यह साफ़ जाहिर है कि उन्हें सोनिया गांधी के नेतृत्व को लेकर परहेज नहीं है. ऐसा दिखता है कि 10 साल काम करने के बाद उनके सोनिया गांधी से संबंध को सुखद कहा जा सकता है. हालांकि, यह बात भी सभी जानते हैं कि सोनिया गांधी को लेकर ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी.

कांग्रेस के नेता इस पूरे मुद्दे पर कुछ बयान नहीं दे रहे. उनका कहना है कि शरद पवार ने यह बयान कैमरे पर नहीं दिया और अगर कहा भी है तो उन्होंने किसी भी नाम नहीं लिया है, न ही हम यह मानते हैं कि गठबंधन का कोई सहयोगी ऐसा बयान दे सकता है.

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क्या शरद पवार ने राहुल को भावी नेता के तौर पर देखते हुए ऐसा कहा?

देश भर में चल रहे नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में अगल-अलग राज्यों में बड़े स्तर पर छात्र इससे जुड़ गए हैं.

बीते पांच वर्षों के दौरान इस तरह का कोई देशव्यापी आंदोलन नहीं खड़ा हुआ. ऐसे में पवार इस आंदोलन में छात्रों और युवकों के विरोध को गंभीरता से लेने की बात कर रहे थे.

उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस आंदोलन को गंभीरता से लेने की बात कही.

पवार ने कहा कि बीजेपी की इस उम्मीद के विपरीत कि नए क़ानून का स्वागत किया जाएगा, खुद उसके शासन वाले असम में इसका विरोध हो रहा है

आशीष दीक्षित कहते हैं, "वर्तमान में चल रहे इस आंदोलन का स्वरूप दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. जो अब तक विपक्ष नहीं कर सका वो ये छात्र कर रहे हैं."

पवार ने कहा कि कुछ समान मुद्दों पर कई गैर-बीजेपी दल एकजुट हो रहे हैं लेकिन सरकार का मुक़ाबला करने के लिए एक अधिक संगठित ढांचा बनाने के लिए गैर-बीजेपी दलों को थोड़ा और वक्त चाहिए.

आशीष दीक्षित कहते हैं, "ऐसे में शरद पवार नेतृत्व को लेकर विकल्प की तलाश करते दिखे. उन्हें यह स्पष्ट है कि बीजेपी का विकल्प कांग्रेस ही हो सकती है लेकिन राहुल गांधी नेतृत्व न करें यह बताने की कोशिश शरद पवार ने की है."

"कुल मिलाकर शरद पवार ने एक बार फिर राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की है."

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