नागरिकता क़ानूनः विरोध प्रदर्शनों में तीन की मौत, सैकड़ों हिरासत में

  • 20 दिसंबर 2019
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नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार प्रदर्शन जारी हैं. गुरुवार को अलग-अलग संगठनों की तरफ़ से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन बुलाए गए थे.

इन विरोध प्रदर्शनों में अभी तक तीन लोगों के मारे जाने की ख़बर है जबकि सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है. इस बीच विरोध प्रदर्शनों को बढ़ता देख प्रशासन की तरफ से राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में धारा 144 लागू की गई.

देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गईं. साथ ही राजधानी दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशन भी गुरुवार को बंद रखे गए.

नए नागरिकता क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले अवैध गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है.

इन क़ानून के आलोचकों का कहना है कि इससे भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि पर असर पड़ेगा, उनका मानना है कि धर्म को नागरिकता का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि ये सभी चिंताएं बेबुनियाद हैं और विपक्ष इस क़ानून के संदर्भ में भ्रांतियां फैलाने का काम कर रहा है.

कई जगह हुए विरोध प्रदर्शन और तीन मौतें

गुरुवार को देशभर में जगह-जगह हज़ारों लोग इस क़ानून के विरोध में सड़कों पर उतरे. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कर्नाटक के मंगलुरु में विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हुई है.

बताया जा रहा है कि मंगलुरु में कुछ लोग एक पुलिस स्टेशन पर आग लगाने की कोशिश कर रहे थे जिसके जवाब में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग की.

पुलिस कमिश्नर पी एस हर्षा ने पत्रकारों को बताया है शहर में कर्फ़्यू लगाया गया है और वो फ़िलहाल मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं.

बेंगलुरु से हमारे सहयोगी पत्रकार इमरान कुरैशी ने बताया कि प्रशासन ने मंगलुरु में 48 घंटं तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं.

एक अन्य व्यक्ति की मौत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई. यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प देखने को मिली. दोपहर के वक़्त प्रदर्शनकारियों ने कई बसों को आग के हवाले भी कर दिया था.

Image caption लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान जलाई गई एक बस

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन्होंने भी हिंसा की है उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी.

उत्तर प्रदेश में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और एसएमएस सेवा को अगले 45 घंटों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है.

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Image caption उत्तर प्रदेश प्रशासन की तरफ से जारी अधिसूचना

दिल्ली के लाल क़िले इलाक़े से 1200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने निषेधाज्ञा के उल्लंघन के मामले में गिरफ़्तार किया.

अलग-अलग वर्गों के लोग हुए विरोध में शामिल

देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों में आम लोगों के अलावा विभिन्न वर्गों के लोग भी शामिल हुए. इनमें राजनीतिक दल, छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और फ़िल्म जगत के लोग शामिल हैं.

बेंगलुरू में आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंचे प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा को पुलिस ने हिरासत में भी लिया. वहीं दिल्ली में राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव को हिरासत में लिया गया.

बीबीसी के कार्यक्रम न्यूज़आर में रामचंद्र गुहा ने बताया कि उन्हें सैंकड़ों अन्य लोगों के साथ पुलिस ने हिरासत में लिया. उन्होंने कहा, ''यह दर्शाता है कि भारतीयों का एक बड़ा वर्ग इस विभाजनकारी क़ानून के ख़िलाफ़ है.''

मुंबई में भी सैंकड़ों की संख्या में लोग इस क़ानून के विरोध में सड़कों पर उतरे. बॉलीवुड के कई फ़िल्मी सितारों और निर्देशकों ने भी इस क़ानून का विरोध किया.

मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में विरोध करने निकले अभिनेता फ़रहान अख़्तर ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीक़े से अपना विरोध दर्ज कराने का हक़ है. उन्होंने कहा कि इस क़ानून में भेदभाव निहित है.

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Image caption मुंबई में विरोध प्रदर्शन का एक दृश्य

नागरिकता संशोधनक़ानून में क्या है?

भारत के पूर्वोत्तर में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर विरोध होता रहा है जिसका उद्देश्य पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से ग़ैर-मुसलमान अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए नियमों में ढील देने का प्रावधान है.

इस बार भले ये क़ानून बन गया हो लेकिन इससे पहले भी मोदी सरकार ने इसे पास कराने की कोशिश की थी. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान इसी वर्ष 8 जनवरी को यह लोकसभा में पारित हो चुका है.

लेकिन इसके बाद पूर्वोत्तर में इसका हिंसक विरोध शुरू हो गया, जिसके बाद सरकार ने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया. सरकार का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही यह विधेयक स्वतः ख़त्म हो गया.

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मई में नरेंद्र मोदी की सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ. इस दौरान अनुच्छेद 370 समेत कई बड़े फ़ैसले किए गए और अब नागरिकता संशोधन विधेयक भी क़ानून बन गया है.

संसद में इसे विधेयक के रूप में पेश करने से पहले ही पूर्वोत्तर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

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