ब्रेग्ज़िट पर बोरिस जॉनसन की योजना को संसद में समर्थन

बोरिस जॉनसन

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ब्रितानी सांसदों ने ब्रिटेन को 31 जनवरी तक यूरोपीय संघ से निकालने की प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की योजना का समर्थन किया है.

उन्होंने यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के समझौते वाले विधेयक के पक्ष में मतदान किया. इस विधेयक के पक्ष में 358 और विरोध में 234 मत पड़े.

अब इस विधेयक पर संसद में आगे चर्चा होगी. सांसदों ने इस विधेयक पर आगे की चर्चा के लिए तीन दिन तय करने के पक्ष में भी मतदान किया.

क्रिसमस के बाद जब संसद की कार्यवाही शुरू होगी तब सात, आठ और नौ जनवरी को इस पर चर्चा होगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश ब्रेग्ज़िट को अंजाम देने की दिशा में एक क़दम और बढ़ गया है.

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लेबर पार्टी के छह सांसदों ने भी किया समर्थन

लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने अपने सांसदों को यह कहते हुए इस विधेयक के विरोध में मतदान करने को कहा था कि यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का 'एक बेहतर और अच्छा रास्ता' उपलब्ध है. फिर भी, छह लेबर सांसदों ने सरकार के पक्ष में मतदान किया.

इस विधेयक में ट्रांज़िशन पीरियड को 2020 से आगे बढ़ाने पर भी रोक लगा दी गई है.

ट्रांज़िशन पीरियड वह अवधि होगी जिस दौरान ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर तो हो चुका होगा मगर इसके कुछ नियमों का पालन करता रहेगा.

प्रधानमंत्री जॉनसन ने कहा कि ट्रांज़िशन पीरियड ख़त्म होने के बाद यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता किया जा सकता है. मगर आलोचकों का कहना है कि इसके लिए जो समयसीमा तय की गई है, वह व्यावहारिक नहीं है.

पिछले हफ़्ते आम चुनावों में कंज़र्वेटिव पार्टी को बहुमत मिलने के बाद यह माना जा रहा था कि ब्रेग्ज़िट विधेयक आसानी से पारित हो जाएगा.

सरकार का कहना है कि वह ब्रेग्ज़िट के लिए तय समयसीमा (31 जनवरी) से पहले ही इस विधेयक को क़ानून में बदल देगी.

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क्या है इस विधेयक में

यह क़ानून उस समझौते को लागू करेगा जो अक्टूबर में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और यूरोपीय संघ के बीच हुआ था. इसे गुरुवार को महारानी के भाषण में शामिल किया था और अगले साल के लिए सरकार की प्राथमिकताओं में बताया था.

अक्तूबर में जिस विधेयक को हाउस ऑफ़ कॉमन्स का समर्थन मिला था, सरकार ने उसे वापस ले लिया था. इस बार उस विधेयक में कुछ बदलाव किए गए हैं.

2016 में हुए जनमतसंग्रह में 52 प्रतिशत ब्रितानी नागिरकों ने यूरोपीय संघ छोड़ने के पक्ष में मतदान किया था जबकि 48 प्रतिशत इसके ख़िलाफ थे.

मगर ब्रेग्ज़िट को अंजाम देने के रास्ते में संसद में कई अड़चनें आती रहीं. जब टेरीज़ा मे प्रधानमंत्री थीं, तब यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते को सांसदों ने तीन बार ख़ारिज किया था.

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