CAA: कानपुर हिंसा में दो लोगों की मौत, कई घायल; महिलाओं से मारपीट का आरोप- ग्राउंड रिपोर्ट

  • 21 दिसंबर 2019
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कानपुर में शुक्रवार को नमाज़ के बाद भड़की हिंसा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है और बारह घायलों का इलाज मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में चल रहा है.

मृतकों और घायलों के परिजनों का आरोप है कि इन सभी को पुलिस ने गोली मारी है जबकि पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने और अपनी जान बचाने के लिए सिर्फ़ लाठी चार्ज, आंसू गैस और रबर की गोलियां दागने की ही बात कर रही है.

कानपुर में बाबूपुरवा और यतीमख़ाना इलाक़ा हिंसा से काफ़ी प्रभावित रहा, ख़ासकर बाबूपुरवा. कानपुर परिक्षेत्र के एडीजी प्रेम प्रकाश के मुताबिक, दोनों मृतक भी बाबूपुरवा के ही हैं.

इसके अलावा ज़्यादातर घायल भी बाबूपुरवा और उसके आस-पास के इलाक़ों यानी बेगपुरवा, मुंशीपुरवा और अजीतपुर के हैं. मृतकों में सैफ़ और आफ़ताब आलम शामिल हैं और दोनों ही तीस-बत्तीस साल के बताए जा रहे हैं.

कानपुर के पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मौजूद सैफ़ के भाई ने आरोप लगाया कि दोनों की मौत पुलिस की गोली से हुई है.

पुलिस के मुताबिक हिंसा की शुरुआत ग्वालटोली इलाक़े से हुई जो मछरिया क्षेत्र से होते हुए हलीम कॉलेज, यतीम ख़ाना तक पहुंची. लेकिन सबसे ज़्यादा हिंसा प्रभावित क्षेत्र बाबूपुरवा ही रहा. यतीमख़ाना इलाक़े में हुई हिंसा में कई पुलिसवाले भी घायल हुए हैं.

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स्थानीय पत्रकार प्रवीण मोहता इस पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी रहे.

वो बताते हैं, "क़रीब दो बजे से जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हुए. क़रीब साढ़े चार बजे तक यतीमख़ाने से परेड ग्राउंड होते हुए फूल बाग और माल रोड का इलाक़ा पूरी तरह से प्रदर्शनकारियों के कब्ज़े में था. यहां पुलिस पूरी तरह असहाय दिख रही थी. पुलिस के अधिकारियों के बीच किसी तरह का कोई समन्यव नहीं दिख रहा था और न ही ऐसा लग रहा था कि उन्हें ऐसी स्थिति का एहसास था. मॉल रोड दो तरफ़ से ब्लॉक हो गया था. ख़ुद डीएम और एसएसपी भी जाम में फंसे थे. यही वजह है कि क़रीब तीन घंटे तक हंगामा होते रहने के बाद ये लोग शाम पांच बजे बाबूपुरवा इलाक़े में पहुंच पाए. पूरे घटनाक्रम के दौरान साफ़ दिख रहा था कि पुलिस के पास फ़ोर्स की कमी थी. ज़िले के बड़े अधिकारी बिना फ़ोर्स के खड़े थे."

आगजनी

बाबूपुरवा में ईदगाह मस्जिद में नमाज़ के बाद क़रीब पांच हज़ार लोग प्रदर्शन करते हुए सड़क पर आ गए. ये लोग चाह रहे थे कि उन्हें क़रीब पांच सौ मीटर दूर चौराहे तक प्रदर्शन करने दिया जाए.

ईदगाह के ठीक सामने वाले मोहल्ले बेगमपुरवा के निवासी अजमल बताते हैं, "यदि पुलिस ने वहां तक जाने दिया होता तो शायद ऐसी स्थिति न होने पाती. हालांकि हमारे जैसे तमाम बुज़ुर्ग लोग ये समझाते रहे कि प्रदर्शन यहीं किया जाए लेकिन नौजवान लड़के नहीं माने. वो आगे बढ़े. उन्हीं में से किसी ने हो सकता है पत्थरबाज़ी भी की हो. लेकिन पुलिस ने मोहल्ले में घुसकर मारा-पीटा, क़रीब डेढ़ सौ लोगों को उठाकर ले गई है जिनका कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है."

इस इलाक़े में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की चार मोटरसाइकिलों में भी आग लगा दी और काफ़ी देर तक पत्थरबाज़ी करते रहे. पुलिस का कहना है कि पत्थर घरों के भीतर और छतों से भी फेंके जा रहे थे.

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शनिवार को सड़क पर साफ़-सफ़ाई के बावजूद सड़कों पर ईंट-पत्थरों के टुकड़े और इधर-उधर बिखरे गाड़ियों के शीशों के टुकड़े अभी भी देखे जा सकते हैं और उन्हें देखकर घटना की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

बाबूपुरवा में हुए पथराव और आगज़नी के दौरान स्थानीय पुलिस अफ़सर यानी पुलिस क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार गुप्त को भी गले के नीचे पत्थर लगे थे जिससे वो भी घायल हो गए थे. शनिवार को वो फिर इलाक़े का मुआयना करने निकले थे.

मनोज गुप्त ने बीबीसी को बताया, "हम लोगों ने कोशिश की कि लोग शांतिपूर्वक नमाज़ के बाद अपने घरों को लौट जाएं लेकिन थोड़ी ही देर में माहौल हिंसक होने लगा. कुछ लोग पुलिस पर पथराव करने लगे तो फिर पुलिस को भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए और अपनी सुरक्षा के लिए बल प्रयोग करना पड़ा."

वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदर्शन और हिंसा ख़त्म होने के बाद पुलिस ने बाबूपुरवा इलाक़े के मोहल्लों में घुसकर लोगों को मारा-पीटा, दुकानों और वाहनों में तोड़-फ़ोड़ की और कई लोगों को ज़बरन उठा ले गए. यहां कोई भी व्यक्ति अपना नाम नहीं बताना चाहता था और न ही अपनी तस्वीर मीडिया में आने देना चाहता था.

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क़रीब 22 वर्षीय एक युवक ने बेहद ग़ुस्से में कहा, "मेरी मिठाई की दुकान पूरी तोड़ दी और सारे सामान फेंक दिए. सामने बैटरी रिक्शे की क्या हालत कर रखी है आप ख़ुद देख लीजिए. जो मिला पुलिस वाले उसी को पीटने लगे. यहां से कई लोगों को उठा ले गए हैं."

'महिलाओं से भी मारपीट'

बाबूपुरवा के सीओ मनोज कुमार गुप्त के मुताबिक कुल 39 लोगों को हिरासत में लिया गया था. हालांकि शनिवार को ज़िला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों, धर्मगुरुओं और शहर काजी के साथ हुई बैठक में इनमें से पैंतीस लोगों को छोड़ देने पर सहमति बनी क्योंकि पुलिस को इनके ख़िलाफ़ हिंसा के कोई सबूत नहीं मिले.

बेगमपुरवा की कुछ महिलाओं का कहना था कि पुलिसवालों ने औरतों को भी बहुत मारा-पीटा और घरों के दरवाज़े तक तोड़ दिए.

एक महिला कहने लगीं, "बेगमपुरवा की तमाम महिलाएं पीछे मस्जिद में जाकर रुकी हुई हैं क्योंकि उनके भीतर शनिवार रात को हुई घटना का ख़ौफ़ है. पुलिस वाले बिना समझे-बूझे पीट रहे थे औरतों को जबकि उनके साथ कोई महिला पुलिसकर्मी भी नहीं थी. जान और इज़्ज़त बचाने के लिए औरतें घरों को छोड़कर मस्जिद में चली गई हैं."

दरअसल, बाबूपुरवा स्थित ईदगाह की मस्जिद में ही बेगमपुरवा, अजीतनगर और मुंशीपुरवा के लोग भी शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने आते हैं. इस मस्जिद के पास ही ईदगाह भी है.

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स्थानीय लोगों के मुताबिक, शुक्रवार की नमाज़ में यहां वैसे ही काफ़ी भीड़ होती है लेकिन नागरिकता क़ानून का विरोध करने और उसके बाद प्रदर्शन करने की चर्चा की वजह से भीड़ कुछ ज़्यादा ही इकट्ठी हो गई.

मुंशीपुरवा के एक बुज़ुर्ग का साफ़ कहना था कि तमाम युवक ऐसे थे जिन्हें वो लोग नहीं पहचानते थे लेकिन बेगमपुरवा मोहल्ले के लोग प्रदर्शन में बाहरी लोगों के होने की बात से इनकार करते हैं.

लेकिन सबसे आश्चर्यजनक स्थिति हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज के बाहर देखने को मिली जब एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, "देखते ही देखते मुंह पर काला कपड़ा बांधे हज़ारों लड़के इकट्ठा हो गए और नारेबाज़ी करने लगे."

कॉलेज बंद होने के बावजूद ये लड़के कहां से आए और ये कौन थे, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है, पुलिस को भी नहीं.

19 दिसंबर को यूपी के कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बावजूद उसके अगले दिन यानी शुक्रवार को भी हुई हिंसक प्रदर्शनों की पुनरावृत्ति ने पुलिस की तैयारी, सूचना और कार्यप्रणाली पर तो सवाल उठाते ही हैं, इस दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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पूरे उत्तर प्रदेश में हिंसा में सरकारी तौर पर भले ही नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई हो लेकिन यह संख्या दस के ऊपर बताई जा रही है. कानपुर में शुक्रवार की नमाज़ के बाद प्रदर्शनकारियों का जगह-जगह इकट्ठा होना और फिर हिंसक हो जाना सीधे तौर पर पुलिस की अक्षमता को दर्शाता है.

शहर में धारा 144 लागू होने के बावजूद यह सब हो गया और देर शाम तो पुलिस के आला अधिकारी इन सबको छिटपुट घटनाएं बताकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में होने की सूचना दे रहे थे. यही नहीं, शनिवार को भी बेकनगंज इलाक़े में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे होकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ़ पत्थर फेंके बल्कि पेट्रोल बम और एसिड बम भी फेंके गए और फ़ायरिंग भी की गई जिसमें कई पुलिसकर्मियों के अलावा मीडिया वालों को भी चोटें आईं.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाबूपुरवा में क़रीब पांच बजे पहुंचे ज़िलाधिकारी विजय विश्वास पंत और एसएसपी अनंतदेव पर भी पत्थर गिरे और कुछ प्रदर्शनकारियों ने डीएम के साथ धक्का-मुक्की भी की. ये अधिकारी भी मुश्किल से अपनी जान बचा पाए.

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