नागरिकता संशोधन क़ानून: मुज़फ़्फ़रनगर में अनवार इलाही के घर की तबाही का ज़िम्मेदार कौन?

  • 24 दिसंबर 2019
हाजी अनवार इलाही

हाजी अनवार इलाही कंबल में लिपटे अपने घर के अंदर हुई तबाही का मातम मना रहे थे.

उनके परिवार की तीन महिलाएँ सहमी हुई बग़ल की एक चारपाई पर बैठी आपस में बातें कर रही थीं.

मुज़फ़्फ़रनगर में थोक जूतों का कारोबार करने वाले 73 वर्षीय इलाही शुक्रवार की भयानक रात को याद करते हुए कहते हैं, "टोप वाले भी थे और कुछ सादी वर्दी में थे. वो अंदर आकर तोड़फोड़ करने लगे."

हाजी इलाही विकलांग हैं. वे कहने लगे, "एक ने हमें डंडे से मारा. मैं ज़मीन पर गिर गया. दूसरे ने कहा इसे मत मारो."

मुज़फ़्फ़रनगर शहर में दाखिल होते ही मीनाक्षी चौक आता है जिसके आसपास की गलियों में मुस्लिम समुदाय के लोग आबाद हैं.

हाजी अनवार अली का घर यहीं है.

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़

शुक्रवार को मुज़फ़्फ़रनगर में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ एक बड़ा प्रदर्शन हुआ. पुलिस का कहना है कि ये विरोध हिंसक प्रदर्शन में बदल गया था.

इस हिंसा में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए और कई पुलिस वाले भी.

शहर के पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतील ने कहा कि उन्हें भी एक गोली लगी है. पुलिस ने बताया कि सोमवार तक 48 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

चश्मदीदों के अनुसार शुक्रवार को रात बारह बजे के समय एक बड़ी भीड़ इलाही और उनके पड़ोसियों के घरों में घुस कर तोड़फोड़ करने लगी थी.

इलाही को उनके घर पर हमला करने वाले पकड़ कर अपने साथ ले गए. हमने पूछा आपको उठा कर कौन ले गया तो उन्होंने कहा, "पुलिस वाले थे. टोप वाले."

वो बोले, "हमें पुलिस लाइन ले जाया गया जहाँ पहले से कई लोगों को लाकर रखा गया था. उनकी पिटाई हो रही थी और लोगों की चीख़ें सुनाई दे रही थी."

हाजी अनवर इलाही के घर

अगले दिन शाम में उनका एक रिश्तेदार आया और उन्हें छुड़ा कर घर ले गया, "जाने से पहले उन्होंने हम दोनों से हिंदी में लिखे एक बयान पर दस्तख़त कराये."

सोमवार को हम जब इलाही के घर गए तो हमने देखा कि उनके घर के बाहर गाड़ी और अंदर सामान टूटे हुए थे.

तीन मंज़िला इमारत के हर कमरे में फ़र्श पर काँच के टुकड़े बिखरे पड़े थे. किचन में बर्तन और फ़्रिज ज़मीन पर गिरे हुए थे.

इलाही के अलावा घर में उस समय उनके परिवार की तीन महिलाएँ मौजूद थीं.

उनमें से एक ने कहा, "हम ने उनसे कहा कि क्यों तबाही मचा रहे हो तो उनमें से एक ने कहा कि आप अपने कमरे में रहो. हमारे घर शादी थी. वो तीन लाख रुपये का ज़ेवर अपने साथ ले गए."

सीसीटीवी कैमरे के वीडियो

इस मुहल्ले के कई घरों का यही हाल था. एक घर के हर कमरे में सामान तोड़ दिए गए थे.

घनी आबादी वाले इस मुहल्ले की एक मस्जिद के गेट पर लगे शीशे टूटे हुए थे. मोहल्ले के बाहर खड़ी गाड़ियों का भी यही हाल था.

एक दुकान वाले ने हमें सीसीटीवी कैमरे के वीडियो दिखाए जिसमें वर्दी पहने कुछ लोगों को लाठियों से गाड़ियों को तोड़ते देखा जा सकता है.

वीडियो रिकॉर्डिंग ठीक उस समय बंद हो जाती है जब सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया जाता है.

यहाँ लोगों में दहशत है, भय का माहौल है. एक घर की महिलाओं ने हमसे बात करने से इनकार कर दिया.

एक बड़ी भीड़ जमा थी...

हम घर के किसी पुरुष सदस्य से मिलना चाहते थे जिसके बारे में हमें बताया गया कि उनकी पुलिस ने पिटाई की थी.

एक दूसरे घर में भी मर्द मौजूद थे लेकिन वो बाहर आने से डर रहे थे.

एक युवा वकील अदनान अली हमें इस शर्त पर वीडियो इंटरव्यू देने को तैयार हुए कि उनके चेहरे को हम साफ़ तरीक़े से ना दिखाएँ.

उन्होंने उस रात का हाल कुछ यूँ बयान किया, "बाहर बड़ी भीड़ जमा थी. घरों से औरतों के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी. वो हमारे घर से होकर गुज़रे."

वो आगे बोले, "वो लोग वर्दी में थे लेकिन ये नहीं मालूम कि वो पुलिस वाले थे. वो तंज़ में कह रहे थे तुम्हें आज़ादी चाहिए, लो आज़ादी."

सवाल ये है कि हमला करने वाले कौन थे? मुहल्ले वालों को शक है कि अधिकतर बाहर वाले थे लेकिन उनके साथ कुछ पुलिस वाले भी थे.

तोड़फोड़ में कौन था?

शहर के एसपी सतपाल अंतील के अनुसार तोड़फोड़ की शिकायतें इन्हें अभी नहीं मिली हैं.

उनका कहना था , "अगर हमें शिकायतें मिलेंगी तो हम जाँच करेंगे और कार्रवाई करेंगे."

पुलिस वाले भी तोड़फोड़ में शामिल थे इसका जवाब उन्होंने नहीं दिया. अलबत्ता उन्होंने इशारों में ज़रूर बताया कि तोड़फोड़ में कौन था.

उनके अनुसार हर तरफ़ से लोग मीनाक्षी चौक पर उमड़ आए थे और उन्हें "जब खदेड़ा गया तो वो अंदर गलियों में भागे. देर रात तक ये चलता रहा."

प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोग शामिल थे. पुलिस अधिकारी ने कहा, "मीनाक्षी चौक प्रदर्शन का गढ़ था."

Image caption मुज़फ़्फ़रनगर के एसपी सतपाल अंतील

हालात नियंत्रण में है...

इन गलियों में रहने वाले लोगों की मेन रोड पर दुकानें हैं. उनकी 50 से ऊपर दुकानों पर ताले पड़े हुए थे जो सील कर दिए थे. प्रशासन ने इन दुकानों को बंद कराया है.

प्रशासन ने इन्हें बंद कराने का कोई ठोस कारण नहीं बताया लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासन इन्हें प्रदर्शन में शामिल होने की सज़ा दे रहा है.

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मुज़फ़्फ़रनगर में हिंसा कैसे भड़की, घरों में किसने तोड़फोड़ की?

शुक्रवार को पूरे राज्य में और ख़ास तौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ लाखों लोगों ने प्रदर्शन किया.

कई जगहों पर हिंसा हुई. अब तक 18 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं. पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में हालात नियंत्रण में है.

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नागरिकता कानून: पश्चिमी यूपी में मातम और दहशत

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