झारखंड: रघुबर दास की क़िस्मत का फ़ैसला आज

  • 23 दिसंबर 2019
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आज झारखंड चुनाव के फ़ैसले का दिन है. 81 सदस्यों वाली झारखंड विधान सभा के चुनावी नतीजे आज घोषित किए जाएंगे. सुबह आठ बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी.

झारखंड में मतदान दो दिन पहले शुक्रवार को ही ख़त्म हुआ है. राज्य में पांच चरणों में मतदान कराए गए थे.

पहले चरण का मतदान 30 नवंबर को हुआ था. इसके बाद दूसरे चरण का मतदान 7 दिसंबर को हुआ, जबकि तीसरे चरण का मतदान 12 दिसंबर को हुआ था. इसके अलावा चौथे चरण का मतदान 16 दिसंबर को हुआ था और पांचवें चरण का मतदान शुक्रवार को संपन्न हुआ.

देश भर में हो रहे नागरिकता संशोधन क़ानून विरोधी प्रदर्शनों के बीच आ रहे इस चुनाव परिणाम को बीजेपी के लिए लिटमस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है.

इस समय राज्य में बीजेपी की सरकार है. बीजेपी के रघुबर दास राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने पाँच साल का कार्यकाल पूरा किया है. मौजूदा विधानसभा में बीजेपी के पास 44 सीटें हैं.

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त्रिशंकु विधान सभा का अनुमान

शुक्रवार को मतदान खत्म होने के बाद आए एक्ज़िट पोल्स में झारखंड में त्रिशंकु विधान सभा बनने का अनुमान जताया गया.

ज़्यादातर एक्ज़िट पोल्स में जेएमएम-कांग्रेस-राजद गठबंधन को ज़्यादा सीटें मिलने की बात कही गई.

इस बार बीजेपी के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने गठबंधन बनाया था. इस गठबंधन ने हेमंत सोरेन को अपना मुख्यमंत्री पद का दावेदार भी घोषित किया है.

India Today-Axis-My India के एक्ज़िट पोल के मुताबिक 81 सदस्यों वाली विधान सभा में इस गठबंधन को 38-50 सीटें मिल सकती हैं.

वहीं CVoter-ABP के एक्ज़िट पोल के मुताबिक बीजेपी को 28 से 36 के बीच सीटें मिल सकती हैं.

बहुमत का आकड़ा छूने के लिए किसी को भी 41 सीटों की ज़रूरत होगी. कहा जा रहा है कि त्रिशंकु विधान सभा की स्थिति में ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) और पूर्व मुख्यमंत्री और जेवीएम प्रमुख बाबुलाल मरांडी, किंग मेकर की भूमिका में उभर सकते हैं.

इस चुनाव से पहले आजसू बीजेपी गठबंधन से बाहर आ गई थी. हालांकि पार्टी प्रमुख सुदेश महतो कह चुके हैं कि बीजेपी के साथ गठबंधन का दरवाज़ा बंद नहीं हुआ है.

रघुर दास बनाम सरयू राय

कई बड़े राजनेताओं की किस्मत इस बार दांव पर लगी है.

मुख्यमंत्री रघुवर दास का मुक़ाबला बीजेपी के बाग़ी नेता सरयू राय से है. पार्टी ने सरयू राय को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था, क्योंकि वो जमशेदपुर पूर्व से मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ निर्दलीय रूप से खड़े हो गए थे.

दरअसल पार्टी ने सरयू राय को टिकट देने से मना कर दिया था. सरयू राय का आरोप था कि ऐसा मुख्यमंत्री रघुबर दास के कहने पर हुआ.

वहीं मुख्यमंत्री रघुबर दास ख़ुद सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहे हैं, साथ ही वो ग्रामीण संकट, नौकरियों की कमी पर लोगों की नाराज़गी और यहां तक ​​कि पार्टी में फूट से भी वे जूझ रहे हैं.

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Image caption रघुवर दास और हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन

आज आ रहे नतीजे पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता हेमंत सोरेन की किस्मत का भी फैसला करेंगे.

हेमंत सोरेन ने दो सीटों से चुनाव लड़ा है. सोरेन, दुमका में बीजेपी के लुइस मरांडी और बरहेट में सिमोन मालतो के ख़िलाफ़ मैदान में हैं.

जेएमएम को अपनी सिटिंग विधायक सीता सोरेन से भी उम्मीद है, जो पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन की बहू हैं.

वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री और सिटिंग जेएमएम विधायक स्टीफन मरांडी फिर से महेशपुर से चुनाव मैदान में हैं.

चुनावी मुद्दे

बीजेपी ने शुरुआत में आर्टिकल 370, राम मंदिर और तीन तलाक़ जैसे मुद्दों पर प्रचार किया, लेकिन बाद के चरणों में पार्टी का फोकस नागरिकता संशोधन क़ानून पर हो गया.

वहीं विपक्ष ने स्थानीय मुद्दों को तरजीह दी - रोज़गार, पानी की कमी, "जल, जंगल, ज़मीन" की सुरक्षा और एक एंटी-लिंचिंग क़ानून.

2014 के विधान सभा चुनावों में बीजेपी ने 37 सीटें जीती थीं और पांच सीटें जीतने वाले गठबंधन सहयोगी आजसू के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.

चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली जेवीएम-पी के छह विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. जबकि जेएमएम ने 17 और कांग्रेस ने 6 सीटें हासिल की थीं.

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