CAA: विरोध की वो तस्वीरें जो दस्तावेज़ की तरह दर्ज हुईं

  • 22 दिसंबर 2019
विरोध प्रदर्शन

नागरिकता क़ानून में संशोधन को संसद से मंज़ूरी मिलने के बाद भारत के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

इस क़ानून के मुताबिक़ पड़ोसी देशों से शरण के लिए भारत आए हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है.

पूर्वोत्तर समेत देश के कई हिस्सों में इस क़ानून का विरोध हो रहा है. विरोध करने वालों का दावा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता देना, भारतीय संविधान के ख़िलाफ़ है.

इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाख़िल की गई हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नए क़ानून पर फौरन रोक लगाने से इंकार कर दिया है और जनवरी में इसकी सुनवाई की तारीख़ तय की है.

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ है.

प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और आगज़नी के बाद पुलिस पर छात्रों पर ज़्यादती के आरोप लगे. इसके बाद विरोध प्रदर्शनों को सिलसिला बढ़ता गया.

असम से शुरु हुआ विरोध प्रदर्शन, जामिया के बाद दिल्ली के सीलमपुर इलाके में उग्र हुआ जहां पुलिस पर एक बार फिर तोड़फोड़ करने के आरोप लगे.

इसके बाद उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी हिंसक प्रदर्शन हुए हैं.

विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसवालों को ग़ुलाब के फूल बांटे. जंतर-मंतर पर पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों को चाय-बिस्कुट खिलाई.

प्रदर्शनकारियों के विपरीत सरकार का कहना है कि नागरिकता क़ानून में बदलाव की वजह से भारत में रहने वाले मुसलमानों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है.

लेकिन विपक्ष और प्रदर्शनकारी नए क़ानून को भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के लिए ख़तरा मानते हैं. सरकार भी लगातार अपील कर रही है कि एनआरसी की प्रक्रिया और नागरिकता क़ानून में संशोधन को जोड़कर ना देखा जाए, दोनों अलग-अलग हैं.

लेकिन विपक्ष और प्रदर्शनकारी सरकार की नीति और नीयत पर सवाल खड़े करके अपना संदेह जताते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं.

सरकार का दावा है कि विपक्ष लोगों को गुमराह कर रहा है, लेकिन विपक्ष सरकार पर संविधान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहा है.

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