नागरिकता क़ानून पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कैसे हैं हालात?- ग्राउंड रिपोर्ट

  • 23 दिसंबर 2019
सुलैमान के परिजन
Image caption मुहम्मद सुलैमान के परिजन

उत्तर प्रदेश में बिजनौर के नहटौर क़स्बे और इसके आस-पास के इलाक़े शांति के लिए प्रसिद्ध हैं लेकिन शुक्रवार से ये चर्चा में है.

नागरिकता संशोधन क़ानून विरोधी प्रदर्शन में दो युवकों की मौत के कारण ये क़स्बा सुर्ख़ियों में है.

रविवार को कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी भी मृतकों के परिवार से मिलने पहुंची, उन्होंने कहा कि इन मौतों की जाँच होनी चाहिए. उन्होंने मृतकों के परिवारों से उनकी आवाज़ संसद में उठाने का वादा किया.

मरने वाले युवकों में से एक मोहम्मद सुलेमान के परिवार में मातम का माहौल था. उनकी माँ, पिता, बहनें और भाई उनकी तस्वीर को सीने से लगा कर रोते हुए उन्हें याद कर रहे थे.

बड़े भाई मोहम्मद शोएब ने कहा, "वो सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी कर रहा था, उससे हमने काफ़ी उम्मीदें बांध रखी थीं."

शुक्रवार को नगरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झड़पें हुईं.

Image caption मृतको के परिजन से मिलती कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी

पुलिस की गोली से हुई मौत?

शोएब के अनुसार उनका भाई प्रदर्शन में शामिल नहीं था. वो कहते हैं, "मेरा भाई जुमे की नमाज़ पढ़ने गया था लेकिन वापस लौट कर नहीं आया."

शोएब का दावा है कि उनका भाई पुलिस की गोली से मारा गया.

लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नवीन अरोड़ा के अनुसार इस बात की जाँच हो रही है कि पुलिस की गोलियों से दोनों युवकों की मौत हुई है या नहीं.

उन्होंने ये स्वीकार किया कि मजबूरी में उत्तेजित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ राउंड की फ़ायरिंग करनी पड़ी.

क़स्बे के मेन बाज़ार में गोलियों के निशान अब भी मौजूद थे. नहटौर में दहशत का माहौल है.

कई युवक पुलिस की हिरासत में हैं. कम से कम 120 युवकों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

नवीन अरोड़ा के अनुसार हिरासत में लिए गए उन युवकों की गिरफ़्तारी नहीं होगी जो "बलवे" में शामिल नहीं थे.

Image caption पुलिस अधिकारी अखिलेश नारायण सिंह

'भारत माता के लाल शहीद हो गए'

भाजपा को भी स्थानीय मुस्लिम युवकों की मौत पर अफ़सोस है.

बिजनौर के एक स्थानीय भाजपा नेता महेंद्र धनौरिया कहते हैं कि मारे जाने वाले दोनों बच्चे शहीद हुए हैं, "ये एक संयोग की बात है कि उस घटना में मेरे दो भारत माता के लाल शहीद हो गए. ये बहुत दुख की बात है."

उनके अनुसार उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय के ज़ख्मों पर मरहम लगाने में पीछे नहीं है. महेंद्र धनौरिया कहते हैं, "नए क़ानून से भारत के मुसलमानों का कोई नुक़सान नहीं होगा."

भाजपा ने अपने तीन लाख कार्यकर्ताओं को देश भर में मुसलमानों के घरों में भेजने का फ़ैसला किया है ताकि "नए क़ानून को लेकर उनकी ग़लतफहमियों को दूर किया जा सके."

वैसे तो भाजपा का ये कार्यक्रम मुस्लिम समुदाय तक ही सीमित है लेकिन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हिंदू और दूसरे समुदायों के लोग भी कर रहे हैं.

प्रदर्शन देश भर में हो रहे हैं. सबसे ज़्यादा हिंसक प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं. राज्य में अब तक हिंसा में कम से कम 18 लोगों की जानें गई हैं, सैंकड़ों लोगों को या तो हिरासत में लिया गया है या इन्हें गिरफ़्तार किया गया है.

Image caption बिजनौर के एक स्थानीय भाजपा नेता महेंद्र धनौरिया

प्रशासन की सख़्ती

प्रशासन ने इंटरनेट और ब्रॉडबैंड की सेवाएँ स्थगित कर दी हैं. कई शहरों में दफ़ा 144 लागू कर दिया गया है. माहौल तनावपूर्ण है.

प्रदर्शनों से छोटे व्यापारी भी प्रभावित हुए हैं. मेरठ सिटी के पुलिस अधिकारी अखिलेश नारायण सिंह के अनुसार मेरठ के व्यापारियों को अब तक 51 करोड़ रुपयों का नुक़सान हो चुका है.

राज्य के कुछ जगहों पर अब भी प्रदर्शन जारी हैं

शुक्रवार को मेरठ शहर में हुई झड़पों में पाँच प्रदर्शनकारी मारे गए थे, उनमें से तीन बच्चों के बाप 45 वर्षीय ज़हीर भी थे.

ज़हीर के पिता मुंशी कहते हैं कि उनके बेटे की मौत का ज़िम्मेदार प्रशासन है. अन्य मृतकों के परिवार वाले भी हिंसा का ज़िम्मेदार पुलिस और प्रशासन को ठहराते हैं, लेकिन पुलिस क्या कहती है?

Image caption ज़हीर के पिता मुंशी

मेरठ के एसपी अखिलेश नारायण सिंह कुछ राउंड गोलियां चलाने की बात स्वीकार तो करते हैं लेकिन उनके अनुसार अधिकतर गोलियाँ प्रदर्शनकारियों की तरफ़ से चलाई गई थीं.

वो कहते हैं, "भीड़ को तितरबितर करने के लिए हवाई फ़ायरिंग ज़रूर की गई थी लेकिन 315 बोर के 37 राउंड गोलियाँ हमें मिलीं जो ये दर्शाता है कि बलवाइयों की तैयारी किस क़दर थी."

राज्य में और ख़ासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माहौल तनावपूर्ण है. लोगों में दहशत है. इस क्षेत्र में 150 से अधिक प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार किए गए हैं. यहाँ लोगों में डर है कि पुलिस जिसे चाहे गिरफ़्तार कर सकती है.

कई युवक और प्रदर्शनकारी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के घरों में पनाह लिए हुए हैं. कुछ लोग जो थोड़ी हिम्मत दिखाकर बात कर रहे हैं उनका कहना है कि नए क़ानून के ख़िलाफ़ आगे भी प्रदर्शन होंगे.

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