उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनों के दौरान 16 में से 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुईः प्रेस रिव्यू

  • 23 दिसंबर 2019
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Image caption कानपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मी

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में सबसे ज़्यादा हिंसक प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में देखने को मिले हैं. यहां इन प्रदर्शनों के दौरान 15 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मरने वाले 16 में से 14 लोगों की मौत गोली लगने से हुई. अख़बार से इस बात की पुष्टि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने की है.

बाकी के दो लोगों में फ़िरोज़ाबाद में राशिद की मौत सिर पर चोट लगने से और वाराणसी में आठ वर्षीय मोहम्मद सगीर की मौत भगदड़ में दबने से हुई.

लोगों की मौत गोली लगने से हुई है उनकी पहचान इस प्रकार की गई है. मोहम्मद वकील (32 साल) लखनऊ, आफ़ताब आलम (22 साल) और मोहम्मद सैफ़ (25 साल) कानपुर में, अनस (21 साल) और सुलैमान (35 साल) बिजनौर में, बिलाल (24 साल) और मोहम्मद शेहरोज़ (23 साल) संभल में, जहीर (33 साल), आसिफ़ (20 साल) और आरिफ़ (20 साल) मेरठ में, नबी जहान (24 साल) फ़िरोज़ाबाद में और फ़ैज़ ख़ान (24 साल) रामपुर में.

पुलिस ने बताया है कि उन्होंने 15 मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिए हैं. जब इंडियन एक्सप्रेस ने इन परिवारों से संपर्क किया तो चार परिवारों ने बताया कि उन्हें अभी भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है.

अख़बार लिखता है कि एक तरफ परिजनों का मानना है कि उनके अपनों की मौत पुलिस की गोली से हुई है तो वहीं पुलिस कह रही है कि ये गोलियां प्रदर्शनकारियों की तरफ से ही चलाई गई.

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प्लेन में धरने पर बैठींप्रज्ञा ठाकुर

भोपाल से बीजेपी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर सीट आबंटन और ख़राब सेवाओं को लेकर स्पेस जेट एयरलाइन के अंदर ही धरने पर बैठ गईं. जिस वजह से फ्लाइट में क़रीब 45 मिनट की देरी हुई. बाद में काफ़ी मनाने पर वो प्लेन से उतरीं और शिकायत दर्ज कराई.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित समाचार के अनुसार दिल्ली-भोपाल फ्लाइट के दौरान क्रू सदस्यों ने प्रज्ञा ठाकुर से इमरजेंसी की जगह नॉन-इमरजेंसी सीट पर बैठने का आग्रह किया था. जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया.

स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली-भोपाल उड़ान बोम्बार्डियर क्यू400 विमान (78 सीटों वाली) द्वारा संचालित है. इस विमान में पहली पंक्ति आपात पंक्ति है और व्हीलचेयर वाले यात्रियों को यहां सीट नहीं दी जाती है.

भाजपा सांसद अपनी व्हीलचेयर से आईं थी और टिकट एयरलाइन के जरिए बुक नहीं कराई गई थी, इसलिए स्टाफ को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह व्हीलचेयर वाली यात्री हैं.

प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा कारणों के चलते उनसे सीट बदलने का आग्रह किया गया था.

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झेलम नदी पर पुल के लि मस्जिद तोड़ने पर समहत मुस्लिम समुदाय

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में झेलम नदी पर लंबे समय से अटके पुल का निर्माण पूरा करने के लिए मुस्लिम समुदाय ने मिसाल पेश की है.

हिंदुस्तान अख़बार में प्रकाशित समाचार के अनुसार पुल निर्माण के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 40 साल पुरानी मस्जिद को गिराने पर सहमति दे दी है.

अधिकारियों ने बताया है कि मस्जिद और कुछ आवासीय तथा वाणिज्यिक संरचनाओं की मौजूदगी समेत अन्य अड़चनों की वजह से पुल नहीं बन पा रहा था.

उन्होंने बताया कि कमरवारी के रामपुरा क्षेत्र में श्रीनगर ज़िला विकास आयुक्त शाहिद इकबाल चौधरी और मस्जिद 'अबू तुराब' की प्रबंध समिति के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के बाद मस्जिद गिराने का काम शुरू हो गया.

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Image caption झेलम नदी

कॉलेजों को अब यूनिवर्सिटी से मान्यता लेने की जरूरत नहीं

दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक्सक्लूसिव ख़बर के अनुसार नई शिक्षा नीति-2020 तैयार कर ली गई है, इसे जनवरी में कैबिनेट बैठक में लाने की तैयारी है. इसका कैबिनेट नोट अंतिम चरण में है.

मानव संसाधन मंत्रालय के अफसरों ने बताया कि इसमें 30 देशों की शिक्षा नीति के कुछ अंश शामिल किए गए हैं.

कैबिनेट नोट के अनुसार, सबसे बड़ा बदलाव कॉलेजों की कार्यप्रणाली को लेकर है. सरकारी और निजी कॉलेजों को अब किसी यूनिवर्सिटी से मान्यता लेने की ज़रूरत नहीं होगी. वे डिग्री भी अब खुद ही देंगे.

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