शिवसैनिकों की 'दादागिरी' पर आदित्य ठाकरे और किरीट सोमैया में भिड़ंत

  • 24 दिसंबर 2019
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Image caption हीरामणि तिवारी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में फ़ेसबुक पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखने वाले हीरामणि तिवारी की शिवसैनिकों के हाथों पिटाई के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है.

रविवार को हीरामणि तिवारी के फ़ेसबुक पोस्ट के बाद शिवसैनिकों ने उनका सिर मुंडवा दिया था और पिटाई भी की थी. वडाला के शांतिनगर इलाके में रहने वाले हीरामणि तिवारी फ़ेसबुक पर राहुल तिवारी के नाम से जाने जाते हैं.

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इसकी तुलना जालियांवाला बाग़ नरसंहार से की थी.

हीरामणि तिवारी ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री के इसी बयान पर ऐतराज़ जताया था. इसके बाद उस इलाके के शिवसैनिकों ने उनकी पिटाई की और उनका सिर मुंडवा दिया था.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. हीरामणि तिवारी ने अपने साथ हुई इस घटना पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "जामिया में हुई हिंसा की तुलना जालियांवाला बाग़ से करना ग़लत है. मैंने फ़ेसबुक पर अपनी पोस्ट में यही लिखा था. उसके बाद 25-30 लोगों ने मेरी पिटाई की. मैं पुलिस स्टेशन गया. उन्होंने मेरी शिकायत दर्ज की. उसके बाद पुलिस ने मुझे समझौते के लिए राज़ी करने की कोशिश की. इस मामले में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए."

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तूल पकड़ रहा मामला

ये मामला अब राजनीतिक तौर पर तूल पकड़ रहा है. इस मामले में शिवसैनिकों पर कार्रवाई की मांग करते हुए बीजेपी आक्रामक हो गई है.

शिवसेना के विरोध में हमेशा आगे रहने वाले बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने कहा, "महाराष्ट्र में दहशत फैली हुई है. दादागिरी का दौर चालू है. मुंडन करने वाले लोग वीडियो में दिख रहे हैं. वो चांद से तो नहीं आए थे. फिर पुलिस क्यों शांत बैठी है. अगर ये वीडियो सच है तो धमकी देने वाले लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई है. अगर कार्रवाई नहीं हुई तो हम राज्यपाल और कोर्ट के पास जाएंगे. मुख्यमंत्री को अपने नेताओं को दहशत का मतलब समझाना चाहिए. उन्होंने पार्टी और क़ानून व्यवस्था पर नियंत्रण खो दिया है."

महाराष्ट्र में गृह मंत्रालय शिवसेना के पास है. एकनाथ शिंदे राज्य के गृह मंत्री हैं. इसी वजह से पुलिस अब क्या कार्रवाई करती है, इस पर सबका ध्यान है.

बीजेपी की ओर से ये मुद्दा उठाने की वजह से शिवसेना बचाव की मुद्रा में दिख रही है. पार्टी और सरकार का बचाव करने करने की जिम्मेदारी आदित्य ठाकरे ने उठाई है.

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आदित्य ठाकरे ने एक बयान जारी कर कहा, "नागरिकता संशोधन क़ानून के बाद महाराष्ट्र में शांति बनाए रखने की कोशिश जारी है. उसी बीच एक ट्रोल ने मुख्यमंत्री के बारे में अपमानजनक भाषा में सरकार की कोशिशों में बाधा पहुंचाई. पर क़ानून व्यवस्था सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी है. और किसी को क़ानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए. ट्रोल्स सभी के बारे में आपत्तिजनक भाषा में ही बात करते हैं. ऐसे लोगों को जवाब देना हमारा काम नहीं है. उनको अनदेखा करना चाहिए. उनकी तर्कहीन बातें कोई सुनता नहीं है. इसलिए वे निराश और हताश रहते हैं."

ठाकरे की सफ़ाई

"ऐसे लोगों को भारतीय जनता ने नकारा है. और उनकी दशा आज पूरा देश देख रहा है. ये लोगों को धमकाते हैं. सोशल मीडिया पर मॉब लिंचिंग करते हैं. वो समाज में अशांति फैलाना चाहते हैं. अपने नेता के ख़िलाफ़, समाज के ख़िलाफ़ किसी ने कुछ कहा तो गुस्सा आना स्वाभाविक है. इन ट्रोल्स को देश के कई बड़े नेता भी फॉलो करते हैं. मेरा मानना है कि इससे अच्छा ये होगा कि हम हमारे मुख्यमंत्री को फ़ॉलो करें. वे शांत रहते हैं. जब आश्वासन पूरा करने की या लोगों की सेवा करने की बात आती है, तभी वे आक्रामक होते हैं."

आदित्य ठाकरे ने इस तरह से बीजेपी का नाम न लेते हुए अपने पुराने सहयोगी दल की आलोचना की. शिवसेना के साथ सत्ता में भागीदार कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की भूमिका पर सबका ध्यान है.

भाजपा के विधायक आशीष शेलार ने शरद पवार से ट्विटर पर पूछा कि उनकी पार्टी की क्या भूमिका है. जब तक शिवसैनिकों पर कार्रवाई नहीं होती है, तबतक हम शांत नहीं बैठेंगे. ऐसा बीजेपी के प्रवक्ताओं ने अलग-अलग न्यूज़ चैनल्स से बात करते हुए कहा.

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