रामपुर हिंसाः क्या पुलिस मुसलमानों को निशाना बना रही है?

  • 26 दिसंबर 2019
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Image caption रामपुर के एसएसपी अजय पाल शर्मा ने हिंसा में शामिल संदिग्ध लोगों की तस्वीरें भी जारी की हैं.

उत्तर प्रदेश के रामपुर में प्रशासन ने बीते शुक्रवार को हुई हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुक़सान की भरपाई के लिए हिंसा में शामिल संदिग्ध लोगों को वसूली के नोटिस भेजे हैं.

पुलिस ने शहर के चौराहों पर हिंसा में शामिल लोगों के पोस्टर भी लगाए हैं. यूपी के कई अन्य शहरों में भी पुलिस ऐसी ही कार्रवाई कर रही है.

पुलिस के वाहनों को हुए नुक़सान के अलावा पुलिस के हेलमेट और टूटे हुए डंडों को भी नुक़सान माना गया है इसकी भरपाई के लिए नोटिस भेजे गए हैं. जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं उनमें मज़दूर भी शामिल हैं.

रामपुर के ज़िलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा कि अभी तक 28 लोगों को रिकवरी के नोटिस भेजे गए हैं और ये संख्या बढ़ भी सकती है.उन्होंने कहा, "पुलिस ने वीडियो और तस्वीरों के ज़रिए ऐसे लोगों की पहचान की है जिन्होंने 21 दिसंबर को सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाया है. पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुक़सान का आकलन भी किया है. वीडियो और तस्वीरों में दिखे 28 लोगों की नोटिस भेजी गई है, बाक़ी की पहचान की जा रही है."ज़िलाधिकारी ने कहा, "जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है उन्हें जवाब का मौक़ा दिया जाएगा और उसके बाद रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी."

उन्होंने बताया कि अभी तक 20-25 लाख रुपए की रिकवरी के नोटिस भेजे गए हैं. जांच पूरी होने के बाद संदिग्धों से रिकवरी की जाएगी. हालांकि भेजे गए क़ानूनी नोटिस में कुल नुक़सान 1486500 रुपए बताया गया है. ज़िलाधिकारी ने अभी ये नहीं बताया है कि ये वसूली कैसे की जाएगी.

बीते शुक्रवार को देशभर में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान यूपी के कई ज़िलों में हिंसा भड़की थी. रामपुर में शनिवार को प्रदर्शन का आयोजन किया गया था जिस दौरान कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं थीं.

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स्थानीय पत्रकारों ने जब ज़िलाधिकारी से पूछा कि क्या कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी संदिग्धों में शामिल है?

इस प्रश्न के जवाब में ज़िलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने कहा, "पुलिस अभी भी वीडियो और तस्वीरें देख रही है, अन्य लोगों की पहचान की जा रही है, संदिग्ध में कई लोग एक राजनीतिक दल से भी जुड़े हैं, अभी पहचान की प्रक्रिया जारी है. प्रशासन जो भी कार्रवाई करेगा, पूरे सबूतों के साथ करेगा, अभी हमारी जांच चल रही है, अगर कुछ राजनीतिक लोग भी सामने आए तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी."

रामपुर में हुई हिंसा में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत भी हुई है. हालांकि ज़िलाधिकारी ने कहा है कि पुलिस की ओर से कोई गोली नहीं चलाई गई है. उन्होंने कहा, "पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की ओर से कोई गोली नहीं चलाई गई है. जिसकी मौत हुई है उसकी हत्या का मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है."वहीं रामपुर पुलिस ने शुक्रवार को हुई हिंसा में शामिल लोगों की तस्वीरें भी जारी की हैं. रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल सिंह ने कहा, "मौके पर पुलिस की ओर से वीडियोग्राफ़ी की गई थी, हमें कुछ तस्वीरें जनता और सीसीटीवी के ज़रिए भी मिली है. ये तस्वीरें हमने जारी की हैं और उपद्रवियों की पहचान के लिए जनता का सहयोग मांगा है. दर्ज मुक़दमों में इनकी गिरफ़्तारी की भी तैयारी की जा रही है."

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नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंह ने कहा था कि उपद्रवियों से बदला लिया जाएगा.

यूपी के कई ज़िलों में हिंसा हुई है जिसमें कम से कम 16 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. ऐसे कई वीडियो आए हैं जिनमें यूपी पुलिस प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती दिख रही है, हालाँकि यूपी पुलिस ने कहा है कि पुलिस की ओर से कोई गोली नहीं चलाई गई है.बुधवार को रामपुर में प्रशासन ने हिंसा में शामिल संदिग्ध लोगों के घरों पर नोटिस भिजवाए. ऐसा ही एक नोटिस थाना गंज क्षेत्र के नई बस्ती इलाक़े में रहने वाले पप्पू के घर भी भेजा गया है. पप्पू फ़िलहाल हिंसा के आरोप में जेल में है.पप्पू के भाई नदीम ने बीबीसी को बताया कि उनके भाई न तो प्रदर्शन में शामिल थे ना किसी तरह की हिंसा में.उन्होंने कहा, "मेरा भाई अपने घर में सो रहा था जब पुलिस आई और उसे बिस्तर से खींचकर ले गई. हमें तो ये भी नहीं पता कि उन्हें गिरफ़्तार क्यों किया गया है."

पाँच बच्चों के पिता पप्पू पेशे से मज़दूर हैं और डेटिंग-पेटिंग का काम करते हैं. नदीम बताते हैं कि उनके इलाक़े की मस्जिद से ये ऐलान किया गया था कि कोई भी प्रदर्शन में न जाए इसलिए उनके घर से कोई इसमें शामिल नहीं हुआ. वो कहते हैं, "पुलिस के पास पावर है, वो जो चाहे कर सकती है, ग़रीब आदमी दबता ही है, हमारे पास तो वकील करने के भी पैसे नहीं है. हमारे साथ ज़ुल्म हो रहा है, हमें नहीं पता कि आगे क्या करना है."नदीम कहते हैं, "सुबह पुलिस आई, घर का दरवाज़ा तोड़ा और मेरे भाई को उठाकर ले गई. उनका घर गली के शुरू में ही है, हमें लगता है कि पुलिस को जो हाथ लग रहा है उसे उठा रही है, भले ही वो बेगुनाह ही क्यों न हो."रामपुर के गंज थानाक्षेत्र के ही रहने वाले इस्लाम के नाम भी पुलिस ने वसूली का नोटिस जारी किया है.

36 साल के इस्लाम भैंसे ख़रीदने-बेचने का काम करते हैं. उनके भाई आशू का आरोप है कि शनिवार सुबह के वक़्त वो घर के बाहर कुछ लोगों के साथ आग ताप रहे थे जब पुलिस उन्हें उठा कर ले गई.आशू कहते हैं, "पुलिस ने आग ताप रहे छह लोगों को पकड़ा, सबके नाम पूछे, तीन हिंदू थे उन्हें छोड़ दिया, जो मुसलमान थे उन्हें थाने ले गए. हमें बताया भी नहीं गया कि हमारे भाई को क्यों गिरफ्तार कर ले."आशू कहते हैं, "हम अपने भाई से मिलने थाने गए, हमें मिलने भी नहीं दिया गया. हमारे पास पैसे भी नहीं है जो पुलिस को देकर अपने भाई को छुड़ा लें."वो कहते हैं, "शहर में बलवा हुआ, पुलिस अब जिसे चाहे उठा रही है, मेरे भाई के ख़िलाफ़ कोई सबूत है तो उसे दिखाया जाए. अगर मेरा भाई दंगे में शामिल है तो उसे जेल में सड़ा दो और अगर वो बेगुनाह है तो उसे छोड़ों. पुलिस बस हमें परेशान कर रही है."बुधवार शाम को नोटिस लेकर आए पुलिसकर्मी ने इस्लाम के परिवार से कहा, "इस्लाम ने जो तोड़फोड़ की है, उसका जुर्माना लगा है, अब जुर्माना जमा करना होगा."

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Image caption इस्लाम की पत्नी ज़ुलेख़ा का कहना है कि उनके पति बेग़ुनाह हैं और पुलिस उन्हें फंसा रही है.

हालाँकि इस्लाम के परिवार ने नोटिस लेने से इनकार कर दिया. इस्लाम की पत्नी की जुलेख़ा ने बीबीसी से कहा, "मेरे पति भैंस का दूध दूहकर बाहर गए थे कि पुलिस उठा ले गई. अब पुलिस नोटिस लेकर आई है, डरा धमका रहे हैं, कह रहे हैं कि पैसे दो, हम किस बात के पैसे दें? मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, अब इनका क्या करूं, इन्हें कहां से खाना खिलाऊं? हमारे पास बच्चों को खिलाने के लिए खाना नहीं है, हम जुर्माना कहां से भरें, किस बात का भरें?"इस्लाम जिस घर में रहते हैं, उसी में भैंसे भी पालते हैं जिनका दूध बेचकर वो अपना परिवार चलाते हैं. अब उनके जेल जाने के बाद परिवार के सामने दो वक़्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है.रामपुर के सामाजिक कार्यकर्ता फ़ैसल लाला कहते हैं, "पप्पू नाम के जिस व्यक्ति को रिकवरी का नोटिस दिया गया है मैं उसे जानता हूं. वो एक मज़दूर आदमी है. प्रशासन सिर्फ़ ग़रीब मुसलमानों को निशाना बना रहा है."फ़ैसल लाला कहते हैं, "प्रशासन को ये भी बताना चाहिए कि इससे पहले जहां-जहां इस तरह के उपद्रव हुए हैं वहाँ किन-किन को रिकवरी के नोटिस जारी किए गए हैं. जब मुज़फ़्फ़रनगर में दंगे हुए थे तब भी क्या दंगाइयों से रिकवरी की गई थी?"वहीं ज़िला प्रशासन का कहना है कि नोटिस उन ही लोगों को भेजे जा रहे हैं जिन्हें वीडियो और तस्वीरों के आधार पर चिन्हित किया गया है.ज़िलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह कहते हैं, "अभियुक्त और उनके परिजन बेगुनाह होने के सबूत पेश कर सकते हैं. पूरी जाँच के बाद ही रिकवरी की जाएगी."

(इस रिपोर्ट में रामपुर से ख़ान उबेद यूनुस ने सहयोग किया)

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