भारत अब गंभीर आर्थिक संकट में: अरविंद सुब्रमण्यम- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 26 दिसंबर 2019
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Image caption मोदी सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम

नरेंद्र मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा है कि भारत कोई सामान्य आर्थिक संकट की चपेट में नहीं है बल्कि बहुत ही गंभीर संकट में आ गया है.

इससे पहले अरविंद सुब्रमण्यम ने भारत के जीडीपी डेटा को भी कटघरे में खड़ा करते हुए बताया था कि 2011 से 2016 के बीच भारत का जीडीपी डेटा 2.5 फ़ीसदी बढ़ाकर बताया गया था.

इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि जीडीपी डेटा अर्थव्यवस्था की संपन्नता का कोई मुकम्मल मानदंड नहीं है. अरविंद का कहना है कि जिस जीडीपी नंबर को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है उस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है.

अहमदाबाद के आईआईएम और इंग्लैंड के ऑक्सफर्ड से पढ़े अरविंद सुब्रमण्यम नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तीन साल तक मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे थे. अरविंद जाने-माने अर्थशास्त्री हैं.

न्यूज़ चैनल एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में अरविंद ने कहा कि भारत का आर्थिक संकट अब गहरा हो चुका है.

उन्होंने कहा, ''ग़ैर-पेट्रोलियम उत्पाद की आयात और निर्यात दर में क्रमशः 6 फ़ीसदी और एक फ़ीसदी की गिरावट है. कैपिटल गुड्स इंडस्ट्री की वृद्धि दर में 10 फ़ीसदी की गिरावट है. कंज्यूमर गुड्स प्रोडक्शन की वृद्धि दर दो साल पहले पाँच फ़ीसदी पर थी दो अब एक फ़ीसदी पर है. इन आँकड़ो से समझा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस हालत में है.''

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अरविंद ने कहा, ''निर्यात, कंज्यूमर गुड्स और कर राजस्व का आँकड़ा भी काफ़ी निराशाजनक है. अगर 2000 से 2002 के भारत के आर्थिक संकट को देखें तो पता चलता है कि तब जीडीपी वृद्धि दर 4.5 फ़ीसदी थी लेकिन बाक़ी के आँकड़े सकारात्मक थे जबकि अभी ये सारे आँकड़े या तो नकारात्मक हैं या नकारात्मक के क़रीब है. यह कोई सामान्य आर्थिक संकट नहीं है बल्कि यह भारत का गंभीर आर्थिक संकट है.

अरविंद ने कहा, ''अर्थव्यवस्था के जो मुख्य आँकड़े हैं वो या तो नकारात्मक हैं या उसके क़रीब हैं. ग्रोथ, निवेश, निर्यात और आयात में वृद्धि से नौकरियां पैदा होती हैं लेकिन सब कुछ नीचे जा रहा है. आपको यह भी देखना होगा कि सरकार सोशल प्रोग्राम पर कितना राजस्व खर्च कर रही है. नौकरी और लोगों की आय में लगातार गिरावट आ रही है.''

इसी साल मई महीने में मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने इस्तीफ़ा दे दिया था. अरविंद सुब्रमण्यम जाने-माने अर्थशास्त्री हैं. इस्तीफ़े के एक महीने बाद उन्होंने कहा कि भारत अपनी जीडीपी वृद्धि दर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है.

उन्होंने कहा कि 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत की जीडीपी की वास्तविक वृद्धि दर 4.5 फ़ीसदी थी लेकिन इसे आधिकारिक रूप से सात फ़ीसदी बताया गया. अरविंद सुब्रमण्यम के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ख़ूब तवज्जो मिली और कहा गया कि सरकार आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर रही है.

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प्रज्ञा ठाकुर नारे से भड़कीं

भोपाल की बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर का विवादों से रिश्ता ख़त्म होता नहीं दिख रहा है. बुधवार को एक भोपाल के एक कॉलेज में प्रदर्शनकारियों और बीजेपी समर्थकों में प्रज्ञा ठाकुर को लेकर झड़प हो गई.

प्रज्ञा ठाकुर ने इस कॉलेज की दो स्टूडेंट से मिलने की कोशिश की तो उन्हें 'आतंकवादी वापस जाओ' के नारे का सामना करना पड़ा. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय की दो स्टूडेंट श्रेया पांडे और मनु शर्मा अटेंडेंस कम होने के मामले में क्लास से निलंबन को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं.

इन्हीं दोनों स्टूडेंट से प्रज्ञा ठाकुर मिलने गई थीं. इस नारे से प्रज्ञा ठाकुर काफ़ी ग़ुस्से में थीं और उन्होंने कहा कि वो क़ानूनी विशेषज्ञों से इस बार में राय लेकर कार्रवाई करेंगी. प्रज्ञा ठाकुर को देखते ही छात्रों ने पूज्य बापू अमर रहे के भी नारे लगाए.

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पश्चिम बंगाल में अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति के अनावरण में नहीं आईं ममता

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कहा कि कोलकाता स्थित राजभवन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती पर उनकी मूर्ति का अनावरण किया गया लेकिन राज्य सरकार के कोई भी सीनियर प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे.

धनखड़ ने कहा कि इससे उन्हें बहुत दुख हुआ है. धनखड़ ने कहा कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वो नहीं आईं. राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के आने की बात तो दूर की है कोई सीनियरक अधिकारी भी नहीं आया.

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पार्टी लाइन से अलग शिव सांसद ने किया एनआरसी और सीएए का समर्थन

महाराष्ट्र के हिंगोली से शिव सेना सांसद हेमंत पाटिल ने पार्टी लाइन से अलग हटकर नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी का समर्थन किया है.

उन्होंने अपनी पार्टी की इस मामले में आलोचना भी की है. शिव सेना ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में वोट किया था लेकिन राज्यसभा में मतदान के दौरान ग़ैर-मौजूद रही थी.

शिव सेना ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बनाई है और दोनों पार्टियां एनआरसी और सीएए का विरोध कर रही हैं.

हेमंत पाटिल ने कहा है, ''मैं सीएए और एनआरसी के समर्थन में आयोजित हुई रैली में शामिल नहीं हो सका. इसके लिए मुझे खेद है लेकिन मैं इन दोनों का समर्थन करता हूं. शिव सेना हमेशा से हिन्दुत्व पार्टी रही है और मैं इसका विरोध कैसे कर सकता हूं.''

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ईरान में विरोध को देखते हुए इंटरनेट बंद

ईरान में गुरुवार को होने वाले सरकार विरोधी प्रदर्शनों से ठीक पहले देश के कई हिस्सों में इंटरनेट सुविधा बाधित रही. बीते साल महंगाई के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शनों में जान गंवाने वालों की याद में गुरुवार को लोग एक बार फिर सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे थे.

बीबीसी फ़ारसी सेवा के श्रोताओं ने भी इंटरनेट के प्रभावित होने की सूचना दी है. इसके साथ ही इंटरनेट मॉनिटरिंग सर्विस नेटब्लॉक्स ने भी इंटरनेट इस्तेमाल में गिरावट दर्ज होने की पुष्टि की है. ईरानी समाचार एजेंसी इल्ना ने संबंधित अधिकारी का नाम ज़ाहिर किए बिना यह दावा किया है कि यह फ़ैसला आधिकारिक आदेश के बाद लिया गया है.

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