बीबीसी के वीडियो पर बीजेपी और कांग्रेस का एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप

  • 26 दिसंबर 2019
असम, डिटेंशन सेंटर इमेज कॉपीरइट Dilip Sharma/BBC

गुरुवार की सुबह कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया. उसमें उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठा कहा.

उन्होंने लिखा, "RSS का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता हैं."

इसके साथ ही उन्होंने असम से बीबीसी हिंदी के लिए काम करने वाले स्थानीय पत्रकार दिलीप शर्मा की उस रिपोर्ट को ट्वीट किया जिसमें असम के एक निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर की रिपोर्ट थी.

अमित मालवीय ने क्या कहा?

राहुल के इस ट्वीट के कुछ ही देर बाद बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी.

मालवीय ने राहुल को झूठा बताते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति शेयर किया जिसे 2011 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार से जारी बताया गया.

इस विज्ञप्ति के मुताबिक़ 2011 में कांग्रेस सरकार ने असम के ग्वालपाड़ा, कोकराझार और सिल्चर में 362 अवैध प्रवासियों को डिटेंशन सेंटर भेजने का दावा किया था.

संबित पात्रा ने क्या कहा?

हालांकि इसके बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के ट्वीट को गंभीरता से लेते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित किया.

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है.

उन्होंने कहा, "आज राहुल गांधी जी ने कुछ ट्वीट किया है और जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है वो बहुत आपत्तिजनक है. उन्होंने कहा है कि RSS का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता है. मुझे लगता है राहुल गांधी से भद्रता और अच्छी भाषा की अपेक्षा करना ही ग़लत है.''

उन्होंने कहा, "राफेल पर झूठ फैलाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी जी ने माफ़ी मांगी थी. आज वो प्रधानमंत्री जी की बात को लेकर भ्रम फैला रहे हैं.''

संबित पात्रा ने कहा, "प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि ऐसा कोई डिटेंशन कैंप नहीं है, जिसमें एनआरसी के बाद हिंदुस्तान के मुसलमानों को रखा जाएगा. ये झूठ फैलाया जा रहा है. इसमें प्रधानमंत्री जी ने क्या झूठ बोला है?''

उन्होंने कहा, ''13 दिसंबर 2011 को केंद्र सरकार के एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि 3 डिटेंशन कैंप असम में खोले गये हैं. साल 2011 में केंद्र में कांग्रेस सरकार थी.''

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क्यों शुरू हुई यह चर्चा?

दरअसल यह पूरी चर्चा शनिवार (21 दिसंबर) को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे के बाद शुरू हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है. उन्होंने इसे अफ़वाह बताया था.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "सिर्फ़ कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों द्वारा उड़ाई गई डिटेन्शन सेन्टर वाली अफ़वाहें सरासर झूठ है, बद-इरादे वाली है, देश को तबाह करने के नापाक इरादों से भरी पड़ी हैं - ये झूठ है, झूठ है, झूठ है."

उन्होंने कहा, "जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की संतान हैं. भाइयों और बहनों, उनसे नागरिकता क़ानून और एनआरसी दोनों का कोई लेना देना नहीं है. देश के मुसलमानों को न डिटेंशन सेन्टर में भेजा जा रहा है, न हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेन्टर है. भाइयों और बहनों, ये सफ़ेद झूठ है, ये बद-इरादे वाला खेल है, ये नापाक खेल है. मैं तो हैरान हूं कि ये झूठ बोलने के लिए किस हद तक जा सकते हैं."

प्रधानमंत्री मोदी के दावे के बाद बीबीसी हिंदी सेवा के लिए काम करने वाले स्थानीय पत्रकार दिलीप शर्मा वहां के एक निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर की पड़ताल करने पहुंचे. देखें ये पूरा वीडियो.

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असम में बन रहा डिटेंशन सेंटर देखा आपने?

पहले भी की गई है डिटेंशन सेंटर की स्टोरी

ऐसा नहीं है कि बीबीसी ने असम के डिटेंशन सेंटर पर पहली बार कोई कहानी की हो. इससे पहले भी बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव की साल 2018 की एक रिपोर्ट डिटेंशन सेंटर से बाहर आए लोगों ने दास्तां बयां करती है.

बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक़, "जिन लोगों को यहाँ रहना पड़ रहा है या जो लोग यहाँ रह चुके हैं, उनके लिए ये डिटेंशन कैंप एक भयानक सपना है जिसे भुलाने में वे दिन-रात लगे हैं."

इसी तरह बीबीसी संवाददाता प्रियंका दुबे ने भी असम के डिटेंशन सेंटरों से जुड़ी रिपोर्टिंग की है.

एनआरसी: नागरिकता की चक्की में पिसते असम के बच्चे - बीबीसी विशेष

बीबीसी संवाददाता प्रियंका दुबे की रिपोर्ट के मुताबिक़, "नागरिकता तय करने की दुरूह क़ानूनी प्रक्रिया में खोए असम के बच्चों का भविष्य फ़िलहाल अंधेरे में डूबा हुआ सा लगता है. कभी डिटेंशन में बंद माँ बाप के जेल के सख़्त माहौल में रहने को मजबूर तो कभी उनके साये के बिना बाहर की कठोर दुनिया को अकेले सहते इन बच्चों की सुध लेने वाला, फ़िलहाल कोई नहीं."

संसद में सरकार ने क्या कहा था

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भारत की संसद में इस साल हुए सवालों और जवाबों को देखा जाए तो पता चलता है कि डिटेंशन सेंटर के बारे में संसद में चर्चा हुई है और केंद्र सरकार ने माना है कि उन्होंने राज्य सरकारों को इस बारे में लिखा है.

राज्यसभा में 10 जुलाई 2019 को पूछे गए एक सवाल के उत्तर में गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि देश में आए जिन अवैध लोगों की नागरिकता की पुष्टि जब तक नहीं हो जाती और उन्हें देश से बाहर नहीं निकला जाता, तब तक राज्यों को उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखना होगा. इस तरह के डिटेंशन सेंटर की सही संख्या के बारे में अब तक कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया है.

उन्होंने कहा था कि 9 जनवरी 2019 को केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने प्रदेश में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए 'मॉडल डिटेन्शन सेन्टर या होल्डिंग सेन्टर मैनुअल' दिया है.

Image caption राज्यसभा में 10 जुलाई 2019 को पूछे गए एक सवाल के उत्तर का स्क्रीनशॉट

द हिंदू में इसी साल अगस्त में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2 जुलाई 2019 में लोकसभा में बीजेपी नेता और केंद्रीय राज्य गृह मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि राज्य सरकारों को साल 2009, 2012, 2014 और 2018 में अपने प्रदेशों में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए कहा था.

2 जुलाई 2019 को लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने कहा था कि गृह मंत्रालय ने एक 'मॉडल डिटेंशन सेंटर या होल्डिंग सेन्टर मैनुअल' बनाया है जिसे 9 जनवरी 2019 को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिया गया है.

उत्तर में उन्होंने कहा था कि इस मैनुएल के अनुसार डिटेंशन सेंटर में दी जाने वाली ज़रूरी सुविधाओं के बारे में बताया गया है.

Image caption लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी का उत्तर

16 जुलाई 2019 को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने कहा था कि असम में डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं.

उन्होंने कहा था कि ये सेंटर फॉरेनर्स एक्ट 1946 की धारा 3(2)(ई) के तहत उन लोगों को रखने के लिए बनाए गए हैं जिसकी नागरिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है.

Image caption 16 जुलाई 2019 को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी के उत्तर का स्क्रीनशॉट
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असम: डिटेंशन सेंटर से निकले लोगों ने बयां की दास्तां

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