राहुल गांधी बोले- नोटबंदी की तरह ग़रीबों पर टैक्स है एनपीआर-एनआरसी

राहुल गांधी

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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. उन्होंने एनपीआर और एनआरसी को देश की ग़रीब जनता पर हमला बताया है.

राहुल ने केंद्र सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर विफल रहने और एनपीआर व एनआरसी के माध्यम से देश का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया है.

शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद शायद समझ नहीं पा रहे कि अर्थव्यवस्था की ऐसी हालत क्यों हो गई है.

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती और बेरोज़गारी जैसे सवालों का जवाब देने की जगह देश के लोगों को नोटबंदी की तरह एनपीआर और एनआरसी के लिए लाइनों में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है.

कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को अगर पुराने तरीक़े से मापा जाए तो इसकी हालत और दयनीय निकलेगी.

इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार सुबह ट्वीट करके कहा था, "आरएसएस का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता है." इस ट्वीट के साथ उन्होंने बीबीसी के एक वीडियो को शेयर किया था जिसमें असम के एक निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर की रिपोर्ट थी.

इस ट्वीट के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर सवाल उठाए थें जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है.

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पीएम मोदी पर साधा निशाना

छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार यह नहीं बता पा रही है कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था की धज्जियां क्यों उड़ाईं.

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उन्होंने कहा, "पहले पूरी दुनिया मानती थी कि आर्थिक मोर्चे पर चीन और हिंदुस्तान एकसाथ तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं. मगर अब पूरी दुनिया में कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान में हिंसा हो रही है, महिलाओं को सड़कों पर चलने नहीं दिया जा रहा."

"बेरोज़गारी पिछले 45 सालों में सबसे ज़्यादा हो गई है. मगर नरेंद्र मोदी इसके बारे में नहीं समझा पा रहे. शायद वह ख़ुद नहीं समझ पा रहे कि क्या हुआ, कैसे हुआ. पहले वह मज़ाक़ उड़ाते थे मगर अब प्रधानमंत्री अपना काम नहीं कर पा रहे हैं."

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, "कोई कुछ ख़रीद नहीं रहा, फ़ैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. सिंपल सी इकनॉमिक्स है मगर प्रधानमंत्री को शायद समझ नहीं आ रही है."

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'एनपीआर-एनआरसी एक तरह का टैक्स'

राहुल गांधी ने नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (एनआरसी) को नोटबंदी की तरह जनता पर टैक्स क़रार दिया.

एनपीआर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "देश का समय बर्बाद किया जा रहा है. नोटबंदी की गई, किसानों-मज़दूरों के तीन लाख 50 हज़ार करोड़ रुपये निकालकर सबसे अमीर 10-15 लोगों को दे दिए गए."

"एनपीआर और एनआरसी हिंदुस्तान की जनता पर एक टैक्स है. नोटबंदी को समझिए, यह ग़रीब लोगों पर टैक्स था. बैंक में जाइए, पैसा दीजिए और अपने अकाउंट से पैसा मत निकालिए."

एनपीआर को नोटबंदी के समान बताते हुए उन्होंने कहा, "ये वही चीज़ है. ग़रीब आदमी अफ़सर के पास जाएगा, काग़ज़ दिखाएगा और नाम थोड़ा ग़लत है तो रिश्वत देनी होगी. करोड़ों लोगों की जेब से पैसा निकालकर उन्हीं 10-15 लोगों को दिया जाएगा."

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'अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब'

राहुल ने कहा कि अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब है और जनता बेहद परेशान है. इन हालात में एनपीआर लाने को उन्होंने ग़रीब जनता पर हमला क़रार दिया.

उन्होंने कहा, "यह ग़रीब जनता पर आक्रमण है. जनता परेशान है. ग़रीब आदमी पूछ रहा है कि हमें रोज़गार कैसे मिलेगा."

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, "देश की जीडीपी ग्रोथ की रफ़्तार नौ फ़ीसदी से चार प्रतिशत पर आ गई है. वह भी तब, जब इसे नए तरीक़े से मापा जा रहा है. पुराने तरीक़े से मापेंगे तो अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी की दर ढाई प्रतिशत मिलेगी."

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