दिल्ली में लंदन से भी ज़्यादा ठंडी रातें क्यों हो गई हैं?

  • 28 दिसंबर 2019
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''घर के कामों के लिए रोज़ सुबह पांच बजे उठना होता है, कुछ दिन पहले तक यह कोई मुश्किल काम नहीं होता था लेकिन बीते दो-तीन दिनों में तो यह एक बड़ी चुनौती बन गया है. ठंड से इतना बुरा हाल है कि बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लगता है.''

ये शब्द देश की राजधानी दिल्ली में रहने वाली मालती पंत के हैं. मालती एक आम गृहणी हैं जो दक्षिणी दिल्ली में रहती हैं. इन दिनों दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है.

अनुमान जताया जा रहा है कि दिल्ली की ठंड पिछले 118 सालों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है. ठंड का आलम यह है कि दिल्ली में न्यूनतम तापमान इन दिनों लंदन से भी ज़्यादा नीचे गिर गया है.

बीबीसी की मौसम का हाल बताने वाली वेबसाइट के अनुसार एक ही वक़्त में लंदन में न्यूनतम तामपान 6 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान था वहीं दिल्ली में यह तामपान दो डिग्री तक नीचे गिरने का अनुमान लगाया गया.

Image caption बीबीसी के वेदर वेबसाइट पर नई दिल्ली और लंदन के तापमान का अनुमान

क्यों पड़ रही है इतनी ठंड?

मौसम विभाग की ओर से बताया जा रहा है कि दिसंबर में इससे पहले साल 1919, 1929, 1961 और 1997 में औसत तापमान 20 डिग्री से नीचे रहा है. मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल गुरुवार तक दिसंबर में औसत तापमान 19.85 डिग्री रहा है. 31 दिसंबर तक इसके 19.15 डिग्री सेल्सियस होने की संभावना है.

मौसम विभाग के अधिकारी के अनुसार, इस साल दिसंबर का महीना साल 1901 के बाद दूसरा सबसे सर्द दिसंबर का महीना हो सकता है. आख़िर उत्तर भारत में इतनी ज़्यादा ठंड क्यों पड़ रही है?

इस बारे में दिल्ली स्थित रीजनल वेदर फ़ॉरकास्टिंग सेंटर (आरडब्ल्यूएफ़सी) के प्रमुख डॉक्टर कुलदीप श्रीवास्तव बताते हैं कि पहाड़ों में हुई बर्फ़बारी का असर मैदानी इलाक़ों में पड़ रहा है साथ ही यहां घना कोहरा होने की वजह से सूरज नहीं दिख रहा है और तापमान नीचे बना हुआ है.

कुलदीप अपनी बातों को और विस्तार देते हैं, ''12, 13 और 21 दिसंबर को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से पहाड़ी इलाक़ों में बर्फ़बारी हुई थी. इस बर्फ़बारी के बाद से ही बहुत सर्द हवाएं चल रही हैं. इन्हें हम लोग 'नॉर्थ वेस्ट अर्ली विंड' बोलते हैं. इसके साथ-साथ पूरे उत्तर भारत में घना कोहरा बना हुआ है, जिसकी वजह से सूरज की रौशनी नहीं मिल पा रही है और अधिकतम तापमान में वृद्धि नहीं हो रही है.''

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किसे कहते हैं कड़ाके की ठंड?

हम अक्सर सुनते हैं कि कड़ाके की ठंड पड़ रही है. लेकिन मौसम विभाग के अनुसार कितनी ठंड पड़ने को कड़ाके की ठंड कहा जा सकता है और क्या दिल्ली में अभी वो स्थिति बन गई है.

इस बारे में कुलदीप श्रीवास्तव बताते हैं कि दिल्ली में इस समय कोल्ड-ए कंडीशन है और यह कड़ाके की ठंड की तरफ़ प्रवेश कर रही है.

वो बताते हैं, ''14 दिसंबर से पूरे दिल्ली एनसीआर और उत्तर पश्चिम इलाक़े में कोल्ड-ए के हालात बने हुए हैं. सर्दियों के मौसम में हर साल एक-दो दिन कोल्ड डे के आते ही हैं. कभी-कभी यह ज़्यादा दिनों तक हो जाता है. 2014 में लगातार आठ दिन इसी कंडिशन में थे, इससे पहले 1997 में लगातार 13 दिन ऐसे ही थे.''

''15 दिसंबर से लेकर 10 फ़रवरी के वक़्त में कोल्ड डे, सीवियर कोल्ड और कोल्ड वेव इन तीनों में से कोई भी कंडीशन बन सकती है.''

कुलदीप श्रीवास्तव आसान शब्दों में हमें कड़ाके की ठंड का मतलब समझाते हैं. वो कहते हैं, ''मौसम विभाग की तरफ़ से हर पांच दिन में एक सामान्य तापमान तय किया जाता है. अगर तापमान इस सामान्य तापमान से साढ़े चार डिग्री नीचे आता है तो उसे कोल्ड-डे श्रेणी में रखा जाता है, जैसे अभी फिलहाल सामान्य तापमान 20.4 डिग्री सेल्सियस तय किया गया है. यह तापमान की अधिकतम सीमा तय की गई है. मौजूदा स्थिति में अधिकतम तापमान इससे पांच डिग्री नीचे पहुंच गया है इसलिए कोल्ड-डे श्रेणी की ठंड पड़ रही है.''

इसके बाद अगर अधिकतम तापमान मौसम विभाग की तरफ़ से तय सामान्य तापमान से साढ़े छह डिग्री नीचे गिर जाता है तो वह सीवियर कोल्ड की श्रेणी में चला जाता है. मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि दिल्ली में आने वाले दिनों में ठंड की हालत इसी श्रेणी की तरफ़ बढ़ती हुई दिख रही है.

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आगे कैसे रहेंगे हालात?

दिल्ली सहित आसपास के इलाक़ों में ठंड की वजह से स्कूलों में बच्चों की छुट्टियां भी की जा रही हैं. गुरुग्राम में स्कूलों की छुट्टियां कर दी गई हैं तो वहीं दिल्ली में भी आने वाले कुछ दिनों में ये छुट्टियां कर दी जाएंगी.

नए साल के आग़ाज़ पर पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ़बारी के आसार भी बताए गए हैं. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 31 दिसंबर को बर्फ़बारी हो सकती है. यह जानकारी शिमला मौसम विभाग केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने दी है.

मौसम विभाग ने बताया कि 29 दिसंबर तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ठंडे दिनों का दौर बने रहने का अनुमान है.

राजस्थान के कई ज़िलों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. सीकर में गुरुवार को तापमान शून्य से 3 डिग्री नीचे पहुंच गया. वहीं मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में भी ठंडे दिनों का दौर रह सकता है.

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भारतीय मौसम विभाग ने ऑल इंडिया वेदर बुलेटिन में कहा कि 30 दिसंबर से पश्चिम दबाव एक बार फिर सक्रिय होगा जिसकी वजह से उत्‍तर-पश्चिम और मध्‍य भारत के कुछ इलाक़ों में 31 दिसंबर से पहली जनवरी के बीच ओले पड़ने की आशंका है.

(रीजनल वेदर फ़ॉरकास्टिंग सेंटर (आरडब्ल्यूएफ़सी) के प्रमुख डॉक्टर कुलदीप श्रीवास्तव और दिल्ली की गृहणी से बीबीसी संवाददाता नवीन नेगी ने बात की.)

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