CAA Protest: यूपी पुलिस के रवैये से लोगों में कितनी दहशत, कितना गुस्सा : ग्राउंड रिपोर्ट

  • 28 दिसंबर 2019
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CAA प्रोटेस्ट: कहानी उन लोगों की, जिन्होंने हिंसा में अपनों को खो दिया

भारत के अलग-अलग हिस्सों में नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर बीते दो सप्ताह से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

सत्तारूढ़ बीजेपी का कहना है कि इस क़ानून के ज़रिए तीन पड़ोसी देशों- पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश से आए ग़ैर-मुसलमान अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए नियमों में ढील देने का प्रावधान है.

अब तक इस क़ानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों में हिंसा के कारण 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सैकड़ों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है. इनमें से अधिकतर मौतें और गिरफ्तारियां उत्तर प्रदेश में हुई हैं.

यूपी पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ ज़्यादा बल प्रयोग और मुसलमानों के घरों में तोड़फोड़ करने के आरोप भी लग रहे हैं.

पुलिस ने ख़ुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है लेकिन प्रदेश से सामने आ रहे वीडियो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.

कानपुर में हुए विरोध प्रदर्शन के एक वीडियो में एक पुलिसकर्मी को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाते हुए देखा जा सकता है. वहीं मुज़फ़्फरनगर में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक वीडियो में पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाती नज़र आ रही है.

एक वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी वृद्ध व्यक्ति तक को पीट रहे हैं. मेरठ में कुछ पुलिसकर्मी मुसलमान समुदाय की दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ते भी नज़र आ रहे हैं.

नए नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों से जुड़े ऐसे वीडियो प्रदेश में मुसलमान प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाते हैं.

गोली लगने से मौतें

अब तक उत्तर प्रदेश में 19 लोगों की मौतें हुई हैं और ये सभी आम नागरिक हैं. इनमें से अधिकतर की मौत गोली लगने से हुई है. 28 साल के मोहम्मद मोहसिन की मौत भी सीने में गोली लगने से हुई है.

Image caption मोहसिन की मां नफ़ीसा परवीन

मोहसिन की मां नफ़ीसा परवीन कहती हैं कि मोहसिन विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं था. उनका कहना है कि मोहसिन पशुओं के लिए चारा ख़रीदने के लिए घर से बाहर निकला था लेकिन लौटा नहीं.

मोहसिन एक नन्ही सी जान के पिता भी थे. उनकी मां कहती हैं, "हमें कुछ नहीं पता. हमें बस इंसाफ़ दे दो. पुलिस ने उसे मार दिया. उसके बाद अब उसके बच्चे का ध्यान कौन रखेगा?"

पहले यूपी पुलिस का कहना था कि उनकी तरफ़ से एक भी गोली नहीं चली. पुलिस का दावा था कि प्रदर्शनकारियों में कुछ ऐसे लोग थे जिनके पास बंदूकें थीं. हालांकि, बाद में पुलिस ने मान लिया कि गोलियां उनकी तरफ़ से भी चलीं.

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मुज़फ़्फ़रनगर में हिंसा कैसे भड़की, घरों में किसने तोड़फोड़ की?

घरों में तोड़फोड़ का आरोप

बीबीसी की टीम एक ऐसे परिवार से मुलाक़ात करने पहुंची जिसका आरोप है कि पुलिस ने रात के अंधेरे में उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ की.

हर कमरे का मंज़र कुछ ऐसा था कि मानो कोई तूफ़ान यहां से गुज़रा हो. हुमायरा परवीन कहती हैं कि कमरे में रखी अलमारी में गहने और पैसे थे जो रात में ही लूट लिए गए.

वो कहती हैं कि उनके घर कई पुलिसकर्मी आए थे और उनके साथ सादे कपड़ों में भी कुछ लोग थे.

हुमायरा कहती हैं, "हमारे सामान में कुछ गहने थे और टिन में पैसे रखे थे, अब सब चोरी हो चुका है. उनके साथ सादे कपड़ों में जो लोग थे उन्होंने हमें कमरे से बाहर जाने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि हमारा घर जल्दी उनका हो जाएगा. उन्होंने हमसे कहा कि देश छोड़ कर चले जाओ."

Image caption हुमायरा परवीन के घर का नज़ारा

हुमायरा पूछती हैं, "क्या हुआ अगर हम मुसलमान हैं, क्या हमारे पास हिंदुस्तान में रहने का कोई हक नहीं है?"

बीबीसी की टीम ने यहां कई मोहल्लों के लोगों से बात की. लगभग हर जगह लोगों का आरोप था कि उनके घरों को लूटा गया और तोड़फोड़ की गई.

आरोप-प्रत्यारोप

कइयों का कहना है कि पुलिस का व्यवहार और नया क़ानून, दोनों ही सत्ताधारी पार्टी के हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे का हिस्सा हैं.

सरकार का कहना है कि नागरिकता संशोधन क़ानून से देश में रह रहे मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. सरकार हिंसा करने का आरोप प्रदर्शनकारियों पर लगा रही है.

बीजेपी नेता और मुज़फ़्फजरनगर से सांसद संजीव बालयान कहते हैं, "पचास हज़ार लोग थे. शायद भारत में पचास हज़ार कहीं इकट्ठा नहीं हुए थे. जो मोटरसाइकल सामने आई, उसमें आग लगा दी गई. पथराव ज़बर्दस्त हुआ था. मैं वहां मौक़े पर मौजूद था."

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मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा पर क्या कहते हैं बीजेपी सांसद संजीव बालियान?

बालयान कहते हैं, "फुटेज़ में जिनके चेहरे गोली चलाते हुए या पथराव करते हुए स्पष्ट दिखाई देते हैं, क्या पुलिस उन्हें गिरफ़्तार न करे?"

"पुलिस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है, मैं भी स्पष्ट कर चुका हूं कि धरना प्रदर्शन में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ क़दम नहीं उठाए जाएंगे. लेकिन जिन लोगों ने पथराव किया, सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाया, गाड़ियां जलाईं और गोलियां चलाईं; और जिन लोगों के वीडियो हैं, सिर्फ़ उन लोगों के ख़िलाफ़ क़दम उठाए जाएंगे. वो लोग नहीं बचेंगे."

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CAA Protest : Uttar Pradesh के Rampur में हिंसा-आगजनी के बाद वसूली के नोटिस, लोग भड़के

बीते कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शनों के बाद जो कुछ देखने को मिला है, उसके बाद यहां का मुसलमान समुदाय देश में अपने भविष्य को लेकर चिंतित है.

सरकार इन चिंताओं को दूर करने के लिए सोशल मीडिया पर नागरिकता संशोधन क़ानून से संबंधित जानकारी देने की कोशिश कर रही है.

लेकिन इस क़ानून के लागू होने से पहले जिस तरह के आरोप सरकार और पुलिस प्रशासन पर लग रहे हैं, उससे इस बात का संकेत तो मिलता ही है कि इस क़ानून का असर ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है.

अब देश में धर्म को लेकर ध्रुवीकरण बढ़ रहा है. उत्तर प्रदेश के कई इलाक़े अब डर के साए में हैं और लोगों का ग़ुस्सा भी भीतर ही भीतर बढ़ रहा है.

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