145 दिनों बाद करगिल में इंटरनेट चालू, कश्मीर में पाबंदी जारी: प्रेस रिव्यू

  • 28 दिसंबर 2019
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Image caption सांकेतिक तस्वीर

जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार लद्दाख के करगिल ज़िले में मोबाइल इंटरनेट सेवा शुक्रवार को फिर से बहाल कर दी गई है.

अधिकारियों के हवाले से अख़बार लिखता है कि जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से यहां इंटरनेट सेवा पर पाबंदी थी.

अधिकारी का कहना है कि बीते चार महीनों में यहां किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है और शांति कायम रही है जिस कारण इंटरनेट सेवा फिर से चालू की गई है.

एशियन एज अख़बार के अनुसार कश्मीर में अभी तक इंटरनेट सेवाओं पर रोक है और अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं है कि घाटी में इंटरनेट पर लगी पाबंदी कब हटाई जाएगी.

इससे पहले बीजेपी महासचिव राम माधव ने कहा था कि कश्मीर में चरणबद्ध तरीके से इंटरनेट पर लगी पाबंदी हटाई जाएगी.

'बंगाल और केरल में नहीं बनेगा डिटेन्शन सेंटर'

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द स्टेट्समैन में छपी एक ख़बर के अनुसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल डिटेन्शन सेन्टर बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा.

उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र के आदेश पर किया जाने वाला नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का काम भी बंगाल में नहीं होगा.

उत्तर 24 परगना के नैहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान ममता ने कहा क जब तक वो जीवित हैं न तो राज्य में नागरिकता संशोधन क़ानून ही लागू किया जाएगा न ही कोई डिटेन्शन सेंटर होगा.

उन्होंने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ देश भर में हो रहे छात्र विरोध को अपना समर्थन दिया और कहा कि जब छात्रों के पास 18 साल की उम्र का होने के बाद मतदान कर अपनी सरकार चुनने का हक है तो उनके पास विरोध करने का हक क्यों नहीं है.

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द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी शुक्रवार को कहा है कि केरल में अवैध रूप से भारत आने वालों के लिए कोई डिटेन्शन सेंटर नहीं बनाया जा रहा. मुख्यमंत्री के दफ़्तर ने एक बयान जारी कर कहा है डिटेन्शन सेंटर बनाने संबंधित पूर्व सरकार की सभी गतिविधियां रोक दी गई हैं.

विजयन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि केरल में एनआरसी नहीं किया जाएगा. इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार भी कह चुकी है कि प्रदेश में कोई डिटेन्शन सेंटर नहीं बनेगा.

राजनीतिक रैली में फेशियल रिकॉग्निशन सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल

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द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस ने 2 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में फेशियल रिकॉग्निशन सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल किया है.

चेहरा पहचानने की इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार किसी रैली में किया गया जहां आम लोगों को इसके ज़रिए स्कैन किया गया.

अख़बार के अनुसार ये पहली बार है जब दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों के दौरान बनाए गए वीडियो का इस्तेमाल ये देखने के लिए किया कि कहीं कोई "क़ानून तोड़ सकने वाला संदिग्ध" तो रैली में नहीं आया है.

मार्च 2018 में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर ये ख़ास सॉफ़्टवेयर ख़रीदा था ताकि वो मौजूद तस्वीरों का मिलान कर खोए बच्चों की तलाश कर सके.

अख़बार के अनुसार दिसंबर 22 से पहले सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल केवल तीन बार किया गया, दो बार स्वतंत्रता दिवस परेड में और एक बार गणतंत्र दिवस की परेड में.

इसी रैली में मोदी ने कहा था कि अब तक एनआरसी के मुद्दे पर कोई भी चर्चा नहीं हुई है और भारत में कोई भी डिटेन्शन सेंटर नहीं है.

अख़बार ने इस विषय में दिल्ली पुलिस से संपर्क किया जिस पर पुलिस ने कहा कि पहले इस सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल सुरक्षा कारणों से किया गया था लेकिन हाल के वक्त में विरोध प्रदर्शन से जुड़े संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के लिहाज़ से किया जाएगा.

बैंक फ्रॉड में रिकॉर्ड उछाल

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Image caption रिज़र्ब बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास

रिज़र्ब बैंक की जारी ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंक फ्रॉड के मामलों में रिकॉर्ड उछाल आया है और ये आंकड़ा अब 1.13 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.

इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार इसमें 4,412 मामले ऐसे हैं जिनमें 1 लाख से अधिक रुपयों की धोखाधड़ी शामिल है.

वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान बैंकों में धोखाधड़ी के 6,801 मामले सामने आए थे और कुल 71,543 करोड़ रुपये इसमें शामिल थे.

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