पत्थलगड़ी के सारे मुक़दमे वापस होंगे: हेमंत सोरेन ने शपथ लेते ही लिए सात फ़ैसले

  • 30 दिसंबर 2019
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को कैबिनेट की पहली बैठक में ही 2017-2018 में पत्थलगड़ी आंदोलन में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमे को वापस ले लिया है.

रघुबर दास के कार्यकाल में छोटानागपुर और संथाल परगना काश्तकारी क़ानून में ढील देने की कोशिश की गई थी और इसे लेकर भारी विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया था.

इस मामले में भी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया था. हेमंत सोरेन ने कैबिनेट की बैठक में इन मुक़दमों को भी वापस लेने का फ़ैसला किया है.

पत्थलगड़ी आंदोलन में आदिवासियों ने बड़े-बड़े पत्थरों पर संविधान की पांचवीं अनुसूची में आदिवासियों के लिए प्रदान किए गए अधिकारों को लिखकर जगह-जगह ज़मीन के ऊपर लगा दिए थे.

यह आंदोलन काफ़ी हिंसक हो गया था. इस दौरान पुलिस और आदिवासियों के बीच जमकर संघर्ष हुआ था और आंदोलन की आग फैलती चली गई थी.

सरकार ने आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज किए थे.

पूर्ववर्ती रघुवर दास की सरकार ने चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी समेत कुछ बुद्धिजीवियों खिलाफ़ भी देशद्रोह के आरोप लगाए थे. इन सबने ने पत्थलगड़ी आंदोलन के पक्ष में कथित तौर पर सोशल मीडिया के पोस्ट किए थे. स्टेन स्वामी इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट भी गए थे और कोर्ट ने उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी.

झारखंड सरकार के इस फैसले ने अब इन्हें राहत दी है. हेमंत सोरेन सरकार के इस निर्णय के बाद ऐसे सभी लोगों के आरोपमुक्त होने का रास्ता साफ हो गया है.

स्थानीय पत्रकार रवि प्रकाश के अनुसार राज्य के करीब दो दर्जन सामाजिक संस्थाओं के संगठन झारखंड जनाधिकार महासभा ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. महासभा के सिराज दत्ता ने बीबीसी से कहा, "सरकार का यह फ़ैसला स्वागत योग्य है. उम्मीद है कि निर्दोष ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ देशद्रोह और दूसरे आरोपों के मामले शीघ्र ही वापस ले लिए जाएंगे. सरकार पत्थलगड़ी वाले गांवों में सुरक्षाकर्मियों द्वारा किए गए मानवाधिकारों के उल्लंघन की भी न्यायिक जांच कराएगी. इसके साथ ही बगैर किसी दोष के प्रताड़ित किए गए आदिवासियों के लिए मुआवजे का भी प्रबंध किया जाएगा. हमलोग हेमंत जी की सरकार से और भी प्रो-पीपल (जनता के हितों वाले) निर्णयों की अपेक्षा करते हैं.''

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क्या था पत्थलगड़ी आंदोलन?

संविधान की पांचवी अनुसूची में मिले स्वशासन के अधिकारों को लेकर राज्य के आदिवासियों ने खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुछ प्रखंडों में पत्थलगड़ी (शिलालेख) कर उन इलाकों में पारंपरिक ग्राम सभाओं के सर्वशक्तिशाली होने की बात कही थी.

तब यह कहा गया कि ऐसे इलाकों में सम्बन्धित ग्राम सभाओं की अनुमति के बगैर किसी भी बाहरी आदमी का प्रवेश वर्जित है. इन इलाकों में खनन और सरकारी निर्माण आदि के लिए भी ग्राम सभाओं की अनुमति ज़रूरी थी. इन बातों को लेकर कोचांग, शारदामारी, उदबुरु और जिकिलता जैसे गांवों में पत्थलगड़ी महोत्सव आयोजित किए गए. इनमें हजारों आदिवासियों का जुटान हुआ.इस दौरान जून-2018 में लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा के गांव चांडडीह और समीपवर्ती घाघरा गांव में आदिवासियों और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़पें हुईं.

उस वक़्त पुलिस फायरिंग में दो लोगों को गोलियां भी लगी थीं. इनमें से एक आदिवासी युवक की मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने अपने तीन जवानों के अपहरण का आरोप लगाया.

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बाद में पुलिस ने ही दावा किया कि उसके तीनों जवान सकुशल वापस आ गए हैं. उनके हथियार भी बरामद कर लिए जाने का दावा किया गया. देशद्रोह के आरोपतब तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने पत्थलगड़ी आंदोलन में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ विभिन्न थानों में दर्जनों एफ़आइआर दर्ज करवाई. कुछ पुलिस रिपोर्टों में सैकड़ों अज्ञात आदिवासियों के ख़िलाफ़ भी देशद्रोह के आरोप लगाए गए.

इसके बाद कई दर्जन लोगों की गिरफ्तारियां की गईं.

तब सरकार ने अख़बारों में विज्ञापन देकर और बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर पत्थलगड़ी को देशद्रोह करार दिया था. बीबीसी की टीम ने खूंटी थाने में ऐसे होर्डिंग्स देखे.

तब तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था, "झारखंड के आदिवासी भोले-भाले हैं. उन्हें कुछ बाहरी लोग गुमराह कर रहे हैं. मैं मानता हूं कि पत्थलगड़ी हमारी परंपरा में है लेकिन यह अच्छे कामों के लिए की जानी चाहिए. अभी पत्थलगड़ी कर रहे लोग राष्ट्र विरोधी हैं और असंवैधानिक काम करने में लगे हैं. हमारी सरकार इनको छोड़ने वाली नहीं है. मैं स्वयं पत्थलगड़ी वाले गांवों में जाऊंगा. देखते हैं कौन माई का लाल मुझे रोकता है."

यह बात और है कि रघुवर दास उन गांवों में कभी नहीं गए. तबसे यह मामला न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में चर्चा में रहा है. पत्थलगड़ी करने वाले आदिवासियों के कथित सरकारी दमन के खिलाफ जुलाई-2019 में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज समेत सैकड़ों लोगों ने राजभवन पर प्रदर्शन किया था.

उन्होंने कहा था, "भाजपा सरकार पत्थलगड़ी क्षेत्र के हर दसवें आदिवासी को देशद्रोही मानती है. उनके ख़िलाफ़ पुलिस रिपोर्टें हैं, जबकि ये लोग कथित तौर पर वनाधिकार, पेसा कानून और स्वशासन की वकालत कर रहे हैं. इन्हें इंसाफ मिलना चाहिए."

हालांकि, इस प्रदर्शन का कोई नतीजा नहीं निकला. राजभवन ने इस पर क्या कार्रवाई की, यह बात राज्यपाल सचिवालय ने सार्वजनिक नहीं की.

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Image caption मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके मंत्री

कांग्रेस ने किया स्वागत

फ़िलहाल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार द्वारा पत्थलगड़ी आंदोलन वाले सारे मुकदमे वापस लेने के फ़ैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया है.

महागामा से कांग्रेस की नवनिर्वाचित विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के इस फैसले ने बता दिया है कि जनहित के निर्णयों को लेने में इस सरकार पर कोई दबाव काम नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि यह शानदार आगाज़ है.

बीजेपी ने भी इस निर्णय के कुछ अंशों की प्रशंसा की है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बीबीसी से कहा, "निर्दोष और बेगुनाह लोगों पर से मुक]दमे वापस होते हैं और पुलिस जांच में उनका नाम नहीं आता है, तो इसमें बीजेपी को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन पत्थलगड़ी को विकृत रूप से परिभाषित करके ये जो राष्ट्रविरोधी आंदोलन चला था, जो उसके रियल मास्टरमाइंड हैं और षड़यंत्रकारी हैं,उनके ऊपर से मुक़दमे वापसी को किसी भी सूरत में जायज़ नहीं ठहराया जा सकता है.

इन मामलों में भारतीय दंड विधान की धारा 121 A और 124 A के तहत कई नामज़द लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज हुआ.झारखंड के सूचना एवं जनसपंर्क विभाग ने हेमंत सोरेन कैबिनेट की बैठक में हुए इन फ़ैसलों की जानकारी दी है.

इसके अलावा कैबिनेट ने अनुबंध कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, विभिन्न श्रेणियों के पेंशन भोगियों सभी प्रकार की छात्रवृत्तियां और पारा शिक्षकों से संबंधित सभी लंबित भुगतान पूर्ण कराने के लिए शिविर लगाकर कार्रवाई करने का निदेश दिया है.

राज्य सरकार में अलग-अलग विभागों में ख़ाली पदों को जल्दी भरने के साथ यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों को लेकर हर ज़िले में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करते हुए न्यायिक पदाधिकारियों की नियुक्ति का फ़ैसला लिया गया.

81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा-राष्ट्रीय जनता दल-कांग्रेस गठबंधन के 47 विधायक हैं

हेमंत सोरेन सरकार के सात अहम फ़ैसले

  • पत्थलगड़ी आंदोलन में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज मुक़दमे होंगे वापस.
  • काश्तकारी क़ानून में बदलाव की कोशिश में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे भी होंगे वापस.
  • अनुबंध कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, पेंशन भोगियों, सभी प्रकार की छात्रवृत्तियां और पारा शिक्षकों से संबंधित सभी लंबित भुगतान जल्द कराने के निर्देश.
  • राज्य में ख़ाली सरकारी पदों को भरने का निर्देश.
  • यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों को लेकर हर ज़िले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करते हुए न्यायिक पदाधिकारियों की नियुक्ति का फ़ैसला लिया गया.
  • मंत्रिपरिषद की बैठक में पाँचवीं झारखंड विधानसभा के पहले सत्र को 06 जनवरी 2020 से 08 जनवरी 2020 तक की मंज़ूरी दी गई.
  • स्टीफन मरांडी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया.

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