जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा भारत- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 30 दिसंबर 2019
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सेंटर फ़ॉर इकोनॉमिक्स एंड बिज़नेस रिसर्च की हाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत जर्मनी को पीछे छोड़ 2026 में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की जीडीपी 2026 तक पाँच ट्रिलियन तक पहुँच सकती है. हालांकि मोदी सरकार ने ऐसा 2024 तक करने का लक्ष्य रखा था.

'वर्ल्ड इकोनॉमिक लीग टेबल 2020' शीर्षक से छपी इस रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारत ने 2019 में निर्णायक रूप से दुनिया की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए फ़्रांस और ब्रिटेन का पीछा किया. उम्मीद है कि 2026 में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन जाए और जापान 2034 में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. अगले 15 सालों में जापान, जर्मनी और भारत में तीसरे पायदान के लिए होड़ रहेगी.''

हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी जिस स्थिति में है वो आगे भी रही तो इस लक्ष्य तक पहुंचना इतना आसान नहीं होगा. हाल ही में रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने कहा था कि वर्तमान वृद्धि दर से पाँच ट्रिलियन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है.

इसी साल अगस्त महीने में विश्व बैंक की 2018 की रैंकिंग में भारत की अर्थव्यवस्था छठे नंबर से फिसलकर सातवें नंबर पर आ गई थी.

2017 की रैंकिंग में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2.65 ट्रिलियन डॉलर था जो 2018 में बढ़कर 2.73 ट्रिलियन डॉलर तो हुआ लेकिन उसकी रैंकिंग गिर गई.

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 2018 में फ़्रांस और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में ज़्यादा मज़बूत रही थी. कहा जा रहा था कि भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़कर पाँचवें नंबर पर आ जाएगा लेकिन ब्रिटेन और फ़्रांस ने भारत को सातवें नबंर पर धकेल दिया.

2018 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2.64 ट्रिलियन डॉलर से 2.84 ट्रिलियन डॉलर की हो गई और फ़्रांस की 2.59 ट्रिलियन डॉलर से 2.78 ट्रिलियन डॉलर की. 20.49 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमरीकी अर्थव्यवस्था पहले नंबर है और 13.61 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन की अर्थव्यवस्था दूसरे नंबर पर है.

4.97 ट्रिलियन डॉलर के साथ जापान तीसरे नंबर पर और जर्मनी 3.99 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे नंबर पर है.

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उद्धव ठाकरे की कैबिनेट का विस्तार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने के एक महीने बाद उद्धव ठाकरे सोमवार को अपनी कैबिनेट का विस्तार करेंगे.

उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर को शपथ ली थी. वो अपनी कैबिनेट का विस्तार कर कुल 36 मंत्री बनाएंगे. इनमें शिव सेना और एनसीपी के 13-13 होंगे और कांग्रेस के 10.

कांग्रेस के बालासाहेब थोराट और नितिन राउत, शिव सेना के सुभाष देसाई और एकनाथ शिंदे के अलावा एनसीपी के छगन भुजबल और जयंत पाटिल ने उद्धव के साथ मंत्री पद की शपथ ली थी. शरद पवार के भतीजे अजित पवार उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं.

बीजेपी से मांगी ज़्यादा सीटें

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है. प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी की तुलना में ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए.

दोनों पार्टियां इस साल हुए लोकसभा चुनाव में बराबर सीटों (17) पर चुनाव लड़ी थीं. प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकसभा चुनाव का फॉर्मूला विधानसभा चुनाव में दोहराया नहीं जा सकता.

उन्होंने कहा, ''दोनों पार्टियां समान सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सकतीं. जेडीयू बिहार में बड़ी पार्टी है. हमारे क़रीब 70 विधायक हैं जबकि बीजेपी के लगभग 50 हैं. इसके अलावा, विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार को एनडीए का चेहरा बनाकर लड़ा जाना है.''

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योगी पर अखिलेश का निशाना

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी कुर्सी बचाने के लिए प्रदेश में नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की आड़ में एक समुदाय के ख़िलाफ़ अत्याचार करवा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह जो अन्याय हो रहा है और लोग पुलिस की गोली से मारे गए हैं, उसका अगर कोई ज़िम्मेदार है तो बीजेपी सरकार और ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ज़िम्मेदार हैं.

अखिलेश ने कहा, ''योगी जानते हैं कि बीजेपी के 200 विधायकों ने उनके ख़िलाफ़ विधानसभा में धरना-प्रदर्शन किया था. लिहाजा वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए मुसलमानों पर अन्याय करवा रहे हैं.''

अखिलेश ने कहा, ''अगर मन टटोला जाए तो 300 विधायक योगी से नाराज़ हैं. योगी इस बात से घबराए हुए हैं और अपनी कुर्सी बचाने के लिए पुलिस के ज़रिए नाइंसाफ़ी करवा रहे हैं. वो जानते हैं कि इस तरह की कार्रवाई के बाद अगले छह महीने तक कोई भी उनसे कुछ नहीं पूछेगा और वह ऐसे जमकर बैठ जाएंगे कि अगले डेढ़ साल तक कोई नहीं हटा पाएगा.''

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अमरीका का इराक़ और सीरिया में हमला

अपने एक कॉन्ट्रैक्टर की मौत के बाद अमरीका ने इराक़ और सीरिया में कई चरमपंथी ठिकानों पर हमला किया है. अमरीका ने इस बात की पुष्टि की है कि उसने कताइब हिज़्बोल्लाह के नियंत्रण वाले इलाक़ों पर हमला किया है.

हमले के निशाने पर हथियार संग्रह के ठिकाने रहे. अमरीका इसे आतंकवादी संगठन मानता है. 27 दिसंबर को किरकुक में एक रॉकेट से हमला किया गया था जिसमें एक अमरीकी कॉन्ट्रैक्टर की मौत हुई थी और कई अमरीकी सैनिकों के अलावा इराक़ी सैनिक ज़ख़्मी हुए थे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार रविवार का हमला अल-क़ाइम ज़िले के क़रीब हुआ है जो सीरिया की सीमा से लगा है. इराक़ी सुरक्षाकर्मियों और हिज़्बोल्लाह के सूत्रों के अनुसार अमरीकी हमले में कम से कम 18 लड़ाके मारे गए हैं और 50 से ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

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