जामिया में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने चलाई थी गोली?-प्रेस रिव्यू

  • 5 जनवरी 2020
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Image caption फ़ाइल फ़ोटो

एक जांच में पता चला है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ 15 दिसंबर को दिल्ली के सराय जुलैना और मथुरा रोड पर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस के दो कर्मचारियों ने एसीपी रैंक अफ़सर के आगे तीन गोलियां चलाई थीं.

हालांकि, दिल्ली पुलिस दावा करती रही है कि उसने इस दौरान एक भी गोली नहीं चलाई थी.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने दक्षिण-पूर्व ज़िला पुलिस के अफ़सरों द्वारा तैयार 'केस डायरी' के आधार पर यह ख़बर छापी है.

15 दिसंबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों समेत स्थानीय लोगों ने विरोध मार्च निकाला था जिस दौरान हिंसा हो गई थी. इस दौरान बसों और गाड़ियों में आग लगा दी गई थी जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय में घुसकर कार्रवाई की थी.

इन प्रदर्शनों के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दो घायल छात्रों एजाज़ अहमद (20) और मोहम्मद शोएब (23) को सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था जबकि मोहम्मद तैमीन (23) नामक शख़्स को होली फ़ैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इनका दावा था कि इन्हें गोली लगी है. इस बत को अस्पताल की एमएलसी रिपोर्ट में भी दर्ज किया गया था.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से पुष्टि की है कि 15 दिसंबर को पुलिसकर्मियों ने फ़ायरिंग न करने की बात की, लेकिन 18 दिसंबर को एक वीडियो सामने आया जिसमें पुलिसकर्मी कथित तौर पर फ़ायरिंग कर रहे थे.

इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने उन पुलिसकर्मियों की पहचान की तो उनका कहना था कि ऐसा उन्होंने 'आत्मरक्षा' में किया था. इन पुलिसकर्मियों के बयान को केस डायरी में दर्ज किया गया था.

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अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर काम करे सरकार: संघ

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ चाहता है कि नागरिकता संधोशन क़ानून के बाद अब सत्ताधारी बीजेपी सरकार को अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे मुद्दों पर काम करना चाहिए.

बीते साल दिसंबर में केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2014 से पहले तीन पड़ोसी मुल्कों से भारत आए गैर-मुसलमानों को भारतीय नागरिकता देने के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून बनाया था. इस पर विपक्ष समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने मामले की जानकारी रखने वाले संघ के कार्यकर्ताओं के हवाले से लिखा है कि शिक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार और संसकृति से जुड़े कई मुद्दों पर जनवरी में संघ और सरकार से प्रतिनिधियों की कई बैठकें होनी है.

अख़बार के अनुसार संघ से जुड़े एक कार्यकर्ता का कहना है कि देश में कई विश्वविद्यालयों में फ़िलहाल तनाव का माहौल है जिसका फायदा निहित स्वार्थ रखने वाले लोग ले रहे हैं. विश्वविद्यालय के परिसरों में देश विरोधी नारेबाज़ी हो रही है, छात्र राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और नागरिकता क़ानून के विरोध को भी विश्वविद्यालयों में समर्थन मिल रहा है जो चिंता का विषय है.

हिरासत में लिए गए पूर्व आईएएस अधिकारी

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'जम्मू-कश्मीर की जनता की अभिव्यक्ति की आज़ादी को दबाने' को लेकर इस्तीफ़ा देने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन को शनिवार को यूपी पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, गोपीनाथन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एनआरसी के ऊपर भाषण देने जा रहे थे तब उन्हें आगरा सीमा पर पकड़ लिया गया.

गोपीनाथन ने कहा कि पुलिस ने अलीगढ़ प्रशासन के आदेश के बाद उन्हें हिरासत में लिया था.

गोपीनाथन ने कहा, "मैं ग्वालियर से एक कार्यक्रम से लौटकर सीएए पर बोलने के लिए अलीगढ़ जा रहा था. जैसे ही मैं सीमा पर पहुंचा. मुझे पुलिसवालों ने घेर लिया और कहा कि मैं अलीगढ़ में दाख़िल नहीं हो सकता हूं. उन्होंने मुझ पर आरोप लगाया कि मैं लोगों को उद्वेलित करके आगरा से अलीगढ़ ले जा रहा हूं."

पश्चिम आगरा के एसपी रवि कुमार ने बताया कि अलीगढ़ प्रशासन के पत्र के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था और शाम को व्यक्तिगत बॉन्ड भरने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

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कैबिनेट मंत्री पद को लेकर कलह

महाराष्ट्र की शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही कैबिनेट मंत्री पद को लेकर नाराज़गी सामने आते दिख रही है.

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के अनुसार, पहले ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने केबिनेट मंत्री का दर्जा न मिलने के कारण इस्तीफ़े की धमकी दी थी और बाद में उन्होंने साफ़ किया कि उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं दिया.

उन्होंने कहा, "मैंने इस्तीफ़ा नहीं दिया है. मैं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करने जा रहा हूं. उसके बाद मुख्यमंत्री जो भी फ़ैसला लेते हैं, हमें स्वीकार होगा."

उद्धव ठाकरे सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार सोमवार को हुआ था और उनके मंत्रिमंडल में 36 मंत्रियों को जगह दी गई थी. अब राज्य सरकार में 43 मंत्रियों की संख्या पूरी हो चुकी है.

इनमें शिवसेना के चार जूनियर मंत्रियों समेत 15 मंत्री, एनसीपी के चार जूनियर मंत्रियों समेत 16 मंत्री और कांग्रेस के दो जूनियर मंत्रियों समेत 12 मंत्री शामिल हैं.

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