जामिया के नाराज़ छात्रों के वीसी नजमा अख़्तर से तीखे सवाल

  • 13 जनवरी 2020
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दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सोमवार को छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. छात्र 15 दिसंबर को जामिया कैम्पस में पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं.

छात्रों का कहना है कि जब तक पुलिस के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज नहीं होती वो परीक्षाओं का बहिष्कार करेंगे.

विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख़्तर सामने आईं और छात्रों के सवालों के जवाब दिए. वीसी ने कहा कि पुलिस ने जामिया कैम्पस में घुसने से पहले अनुमति नहीं ली थी और कैम्पस के अंदर जो भी कार्रवाई की उसके ख़िलाफ़ जामिया प्रशासन कोर्ट जाएगा.

नजमा अख़्तर ने कहा, ''हमने जो एफ़आईआर कराई है उसे पुलिस रिसीव नहीं कर रही. आप लोग जो चाहते हैं हम वो नहीं कर सकते क्योंकि हम सरकारी कर्मचारी हैं. हमने सरकार को आपत्तियां भेजी हैं. अब हम कोर्ट भी जाएंगे.''

छात्रों ने इसके बाद सवाल किया कि 15 दिन पहले भी यही कहा गया था कि जामिया प्रशासन कोर्ट जाएगा. दूसरा सवाल यह भी हुआ कि पुलिस जामिया कैम्पस में घुसी कैसे और जब मीडिया में लेकर इसकी जवाबदेही को लेकर सवाल हुआ तो आपने कहा था ''कोई नहीं''. सीधा जवाब क्यों नहीं दिया.

उस पर वीसी नजमा अख़्तर ने कहा, ''आप ने जो टीवी इंटरव्यू देखा है वो अधूरा है. मैं कहती हूं कि वो पूरा इंटरव्यू दिखाएं तभी सब क्लियर होगा.''

बता दें कि 15 दिसंबर को जामिया इलाके में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की थी. इस दौरान कई बसों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुई थीं. आरोप है कि देर शाम दिल्ली पुलिस ने जामिया कैंपस में घुसकर छात्रों से मारपीट की और लाइब्रेरी में घुसकर तोड़फोड़ भी की.

सीएए और जामिया में हुई हिंसा के विरोध में छात्र बीते एक महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं.

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तत्काल एफ़आईआर की मांग

छात्रों ने वीसी से यह भी कहा कि वो इस बाद को स्वीकार करें कि जामिया में पुलिस ने सरकार के कहने पर छात्रों से मारपीट और तोड़फोड़ की.

लेकिन वीसी ने कहा कि वो किसी की कही बात नहीं दोहराएंगी. उन्होंने कहा, ''आप अपनी बात मेरे मुंह में मत डालिए. मैं अपनी बात कहूंगी. दिल्ली पुलिस जामिया कैम्पस में हमारी अनुमति के बिना घुसी थी. हमारे मासूम बच्चों को पीटा था और बहुत तकलीफ़ दी. ये चीज़ हम बिल्कुल नहीं बर्दाश्त करेंगे.''

वाइस चांसलर और छात्रों के बीच सवाल-जवाब करीब एक घंटे चला. जामिया के छात्र पुलिस के ख़िलाफ़ तुरंत एफआईआर कराने की ज़िद पर अड़े रहे. छात्रों ने सवाल किया कि आखिर कब शिकायत दर्ज होगी.

नजमा अख़्तर ने कहा, ''तारीख़ मत पूछिए, मैंने कह दिया तो एफ़आईआर होकर रहेगी.'' लेकिन छात्र इस पर राज़ी नहीं हुए. छात्रों का कहना था कि ये झूठ है और तत्काल एफ़आईआर होनी चाहिए.

एक छात्र ने यह भी सवाल किया कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर जामिया प्रशासन का स्टैंड क्या है. इस पर वीसी ने कहा कि छात्र सिर्फ़ यूनिवर्सिटी, परीक्षाओं और पढ़ाई लिखाई की बातें करें.

कैंपस में छात्रों की सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि एफ़आईआर करते ही सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती.

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सुरक्षा को लेकर भी सवाल

बीते दिनों जामिया में गर्ल्स हॉस्टल में कथित तौर पर एक लड़के के घुसने की बात सामने आई है. इसे लेकर लड़कियों ने सवाल किया कि गर्ल्स हॉस्टल सुरक्षित नहीं है तो कैंपस की सुरक्षा का दावा कैसे किया जा रहा है?

वीसी ने कहा कि सुरक्षा हर जगह दोगुनी कर दी गई है. इसके अलावा और क्या किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पुलिस के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराने की कार्यवाही मंगलवार से शुरू हो जाएगी.

उन्होंने यह भी कहा कि जामिया प्रशासन जो भी कदम उठाएगा वो सब वेबसाइट पर डाल दिया जाएगा.

छात्रों ने यह भी सवाल किया कि जामिया के छात्रों पर पुलिस ने पहला हमला 13 दिसंबर को किया. अगर जामिया प्रशासन पहले कुछ ठोस कार्यवाही करता तो पुलिस 15 दिसंबर को छात्रों से मारपीट नहीं करती. छात्रों ने यह भी कहा कि अगर सुरक्षा बढ़ा दी गई है तो फिर हॉस्टल खाली करने को क्यों कहा गया था?

नजमा अख़्तर ने कहा कि उन्होंने कभी हॉस्टल खाली करने का आदेश नहीं जारी किया. बल्कि जो छात्र हॉस्टल में रुके थे उनकी सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी को अलग से हिदायत दी थी.

हालांकि छात्रों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि जामिया प्रशासन ने हॉस्टल खाली करने का नोटिस जारी किया था.

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परीक्षाओं के लिए नया शेड्यूल

पुलिस की कार्रवाई में जख़्मी हुए छात्रों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज होने को लेकर भी सवाल उठे. छात्रों ने कहा कि पुलिस ने जिन छात्रों को पीटा उन्हीं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी कर रही है. जामिया प्रशासन उनके लिए क्या कर रहा है?

नजमा अख़्तर ने इस पर कहा, ''हम सिर्फ़ कोशिश ही कर सकते हैं. हम पुलिस नहीं हैं. कोशिश करने का वक़्त दीजिए.''

हालांकि छात्र ज़िद पर अड़े हैं कि जब तक एफ़आईआर नहीं दर्ज होगी वो परीक्षाओं का बहिष्कार करेंगे.

वीसी कहा कि छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल जब उनसे मिला था उसके बाद ही कैंपस खोला गया और परीक्षाओं की घोषणा की गई थी. उन्होंने कहा कि एफ़आईआर का परीक्षाओं से कोई लेना देना नहीं है. अब जामिया प्रशासन कोर्ट जाएगा. परीक्षाओं को लेकर नई तारीखें जारी की जाएंगी.

उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी सुविधा के हिसाब से तारीख तय करें और परीक्षाओं में शामिल हों.

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