बंगाल की विश्वभारती यूनिवर्सिटी में भी जेएनयू जैसी हिंसा

  • 16 जनवरी 2020
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पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के तहत शांति निकेतन में कविगुरु रबींद्रनाथ टैगोर के हाथों स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय अशांति का अखाड़ा बन गया है.

बुधवार की रात को इस विश्वविद्यालय में भी छोटे पैमाने पर जेएनयू जैसी घटना हुई. यहां कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के समर्थकों ने बुधवार रात को चेहरा ढंक कर वामपंथ समर्थक छात्रों पर हमला किया.

इस हमले में गंभीर रूप से घायल दो छात्र फ़िलहाल अस्पताल में हैं. तृणमूल कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा और एबीवीपी की आलोचना की है. लेकिन एबीवीपी ने इस घटना में अपना हाथ होने से इनकार किया है.

शांति निकेतन थाने में इस घटना के बारे में शिकायत दर्ज की गई है. लेकिन अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है. इस हमले के बाद परिसर में सुरक्षा और सुरक्षाकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.

विश्वभारती में बीते सप्ताह भाजपा सांसद स्वपन दासगुप्ता के कार्यक्रम के बायकॉट और उनको चार घंटे से ज़्यादा समय तक एक कमरे में बंद रखने के बाद से ही परिसर में एबीवीपी और वामपंथी छात्रों में तनाव चल रहा था. बुधवार की घटना को भी उसी का नतीजा बताया जा रहा है.

पुलिस ने बताया कि बुधवार रात को कुछ बाहरी लोगों ने परिसर में स्थित विद्या भवन छात्रावास में जाकर छात्रों पर हमला किया. इसमें स्वप्निल मुखर्जी और फाल्गुनी ख़ान नाम के दो छात्रों को गंभीर चोटों की वजह से एक स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया है.

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सीपीएम से जुड़े एसएफआई और आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एडसो) ने इस हमले के लिए एबीवीपी को ज़िम्मेदार ठहराया है. इन दोनों संगठनों ने कहा कि कल की घटना स्वपन दासगुप्ता के घेराव की घटना का बदला लेने के लिए की गई है.

घायल छात्र स्वप्निल ने बताया, "पहले तो हम पर हॉस्टल में हमला किया गया. उसके बाद अस्पताल पहुंचने पर वही हमलावर अस्पताल के पास भी मौजूद थे. वहां भी हमको धमकियां दी गईं."

छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी के सदस्य बीते कुछ दिनों से लगातार परिसर में आ रहे थे. लेकिन बीती रात बाहरी लोगों का एक गुट हॉस्टल में पहुंचा और छात्रों को धमकाने लगा. एक छात्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, "छात्रों से पहले पूछा गया कि क्या वह लोग आठ जनवरी को भाजपा सांसद स्वपन दासगुप्ता के घेराव में शामिल थे? हां कहने वाले छात्रों को धमकियां देते हुए धक्कामुक्की की गई."

बाद में कुछ लोग एसएफआई नेता स्वपनिल मुखर्जी औऱ फाल्गुनी ख़ान को हॉस्टल से पकड़ कर चांसलर के बंगले की ओर ले गए. उस समय वहां चेहरा ढंके कुछ लोग लाठी और छड़ों के साथ पहुंच गए. उन्होंने दोनों छात्रों की पिटाई की. छात्रों का दावा है कि विश्वभारती के सुरक्षा अधिकारी ने मौके पर पहुंचने के बाद दावा किया कि उनको घटना की जानकारी नहीं है और वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते.

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स्वपनिल के मुताबिक, सुरक्षा अधिकारी ने दोनों घायल छात्रों के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराने की भी धमकी दी.

घायल छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी के शब्बीर अली और अचिंत्य बागदी ने उन पर हमला किया. लेकिन बागदी ने इस आरोप को निराधार बताया है. बागदी का कहना है, "मैं एबीवीपी का सदस्य ही नहीं हूं. कल परिसर में हंगामे की ख़बर के बाद हमलोग भीतर गए थे. लेकिन बाद में पता चला कि एसएफआई के दो गुटों में ही मारपीट हुई है."

एसएफआई के प्रदेश सचिव श्रीजन भट्टाचार्य कहते हैं, "इस घटना के लिए एबीवीपी ज़िम्मेदार है. हमलावरों की पहचान सामने आ गई है. इन लोगों को वीसी के साथ मुलाकात करते और संगठन की बैठकों में हिस्सा लेते देखा गया है. तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के इन पूर्व सदस्यों ने अब एबीवीपी का दामन थाम लिया है. यह एक सुनियोजित हमला था."

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दूसरी ओर, एबीवीपी का कहना है कि इस घटना में उसका कोई हाथ नहीं है. उल्टे एसएफ़आई के छात्रों ने उसके सदस्यों पर हमला किया है. एबीवीपी के जुड़े शौमिक चक्रवर्ती नामक एक छात्र ने बताया, "हम जेएनयू और जाधवपुर विश्वविद्यालय से परिसर में आने वाले छात्रों का विरोध कर रहे थे. उसी समय एसएफ़आई छात्रों ने हम पर हमला कर दिया."

एबीवीपी के प्रदेश सचिव सप्तर्षि सरकार कहते हैं, "कल की घटना में हमारा कोई सदस्य शामिल नहीं था. जेएनयू से जाधवपुर तक वामपंथी ही शिक्षा का माहौल बिगाड़ रहे हैं. परिसर में भाजपा सांसद स्वपन दासगुप्ता का भी इन लोगों ने घेराव किया था. इससे साफ है कि हमलावर कौन हैं."

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