मुसलमान समुदाय ने मस्जिद में करवाई हिंदू जोड़े की शादी - प्रेस रिव्यू

  • 20 जनवरी 2020
शादी

द टेलिग्राफ़ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, ऐसे समय जब भारत में साम्प्रदायिक हिंसा आम हो गई है, केरल की मुस्लिम जमात ने मस्जिद में हिंदू जोड़े का विवाह कराकर साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल कायम की है.

ख़बर में बताया गया है कि मस्जिद के भीतर अंजू और शरद का विवाह पूरे धार्मिक विधि-विधान से सम्पन्न हुआ जहां दोनों समुदायों के लोग बतौर मेहमान मौजूद थे.

ये ख़बर तब सामने आई जब केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने फेसबुक पोस्ट के ज़रिए जोड़े को बधाई देते हुए जमात के सदस्यों की सराहना की.

मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि अंजू की मां ने माली हालात ख़राब होने की वजह से विवाह में मस्जिद कमेटी से मदद मांगी थी, इस पर कमेटी सदस्य उनकी मदद के लिए राज़ी हो गए.

'पाक, अफ़ग़ान, बांग्लादेशी मुसलमानों को भी नागरिकता'

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बीते छह वर्षों में 2,838 पाकिस्तानी, 914 अफ़ग़ान और 172 बांग्लादेशियों को भारत की नागरिकता दी गई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक गृह मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीते दो वर्षों में 391 अफ़ग़ान और 1595 पाकिस्तानियों को भारत की नागरिकता मिली है.

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निर्मला सीतारमण ने कहा, ''स्वाभाविक रूप से उनमें मुसलमान भी हैं.''

उन्होंने कहा कि साल 2014 से पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के 566 मुसलमानों को भारत की नागरिकता दी गई है.

निर्मला सीतारमण ने कहा, ''राजनीतिक दल सीएए के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करके राजनीतिक बयान दे सकते हैं, लेकिन राज्य इसे लागू करने से इनकार नहीं कर सकते.''

'जश्न-ए-शाहीन का विरोध करने पहुंचे कश्मीरी पंडित'

दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर में कहा गया है कि दिल्ली के शाहीन बाग़ में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोध में जारी प्रदर्शन में रविवार को कश्मीरी पंडितों का एक समूह पहुंचा. इससे वहां अफ़रा-तफरी का माहौल बन गया.

ख़बर में कहा गया है कि कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शनकारियों से उन्हें उनका घर वापस दिलाने के लिए समर्थन मांगा. साथ ही उन्होंने स्वरा भास्कर के जश्न-ए-शाहीन का विरोध किया.

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अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने ट्वीट कर 19 जनवरी को शाहीन बाग की महिलाओं के समर्थन में 'जश्न-ए-शाहीन एक शाम गीतों के नाम' कार्यक्रम करने की जानकारी दी थी.

इस पर कश्मीरी पंडितों का कहना था कि '30 साल पहले कश्मीरी पंडितों के सामूहिक नरसंहार के दिन शाहीन बाग में इस तरह का कार्यक्रम होना हमारे समुदाय की शहादत का अपमान है.'

कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधिमंडल से मंच से उतरते समय कुछ प्रदर्शनकारियों ने धक्कामुक्की भी की.

भाजपा को आज मिल सकता है नया अध्यक्ष

हिंदुस्तान में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, सोमवार को भारतीय जनता पार्टी को अमित शाह के स्थान पर नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है.

इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुन लिया जाएगा.

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नए अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह का लंबा कार्यकाल ख़त्म हो जाएगा.

अमित शाह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृहमंत्री बने और तभी से पार्टी अध्यक्ष चुनने की कवायद शुरू हो गई थी. ख़बर में कहा गया है कि बीजेपी में 'एक व्यक्ति एक पद' की परंपरा रही है.

डीएसपी देविंदर सिंह के ख़िलाफ़ एक और आरोप

जम्मू कश्मीर पुलिस में डीएसपी देविंदर सिंह के ख़िलाफ़ आरोपों की कड़ी में एक और मामला सामने आया है. साल 2000 में उनकी निगरानी वाले एक कैंप में 20 वर्षीय युवक की हिरासत के दौरान मौत हुई थी.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक, मृतक युवक ऐजाज़ अहमद बज़ाज़ के पिता मोहम्मद शफ़ी का कहना है कि उनका बेटा श्रीनगर के पास ही बेमिना में अपने रिश्तेदार के घर गया था, लेकिन दो दिन बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया था.

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युवक के पिता का दावा है कि बेटे को पकड़कर ले जाने के एक हफ्ते बाद एक पुलिसकर्मी उनके पास आया और पुलिस कंट्रोल रूम चलने के लिए कहा.

पुलिस कंट्रोल रूम जाने पर मोहम्मद शफ़ी को अपने बेटे का शव नज़र आया. उसके शरीर पर प्रताड़ित किए जाने के निशान थे. उस समय देविंदर सिंह पुलिस कैंप के प्रभारी थे. तब राज्य मानवाधिकार आयोग ने हिरासत में हुई इस मौत पर संज्ञान भी लिया था.

मोहम्मद शफ़ी का कहना है कि उन्होंने तब इंसाफ़ के लिए बहुत हाथ-पैर मारे थे. लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई. लेकिन अब उन्हें उम्मीद है कि इंसाफ़ होगा.

केरल के राज्यपाल ने क्यों कहा मूकदर्शक नहीं बना रहूंगा

केरल की सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, उस पर राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने आपत्ति जताई है.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा है कि केरल सरकार ने उन्हें सूचित किए बिना सुप्रीम कोर्ट में सीएए के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है.

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राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि वे मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे. उन्होंने इस बारे में सरकार से रिपोर्ट मांगी है.

ख़बर में कहा गया है कि सरकार से रिपोर्ट मांगकर राज्यपाल ने ये बता दिया है कि वो सिर्फ 'रबर स्टांप' नहीं हैं.

राज्यपाल ने ये भी कहा है कि इसे 'व्यक्तिगत लड़ाई' की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

हालांकि राज्यपाल के रुख़ पर सीपीआई (एम) के मुखपत्र 'देशाभिमानी' ने आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक बयान बताया है और आरोप लगाया है कि वे राज्य को 'कठोर भाषा' में धमका रहे हैं.

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