पुलवामाः ‘मोदी जी गार्जियन हैं, तो हमें कोई क्यों नहीं पूछता’, झारखंड के मारे गए जवान के पिता का सवाल

  • 13 फरवरी 2020
विजय सोरेंग की अंत्येष्टि के दौरान कंधा लगाते तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास इमेज कॉपीरइट RAVI PRAKASH
Image caption विजय सोरेंग की अंत्येष्टि के दौरान कंधा लगाते तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास

'झारखंड की धरती क्रांति की धरती है. क्रांतिवीरों की धरती है... मैं इस धरती के सपूत शहीद विजय सोरेंग को एकबार फिर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. मैं गुमला में मौजूद उनके परिवार को हृदय से नमन करता हूं. उनके बच्चे बहादुरी से इस समय का सामना कर रहे हैं. कृतज्ञ राष्ट्र के नाते हर क़दम पर, हर स्तर पर एक अभिभावक के रूप में हमें उनके परिवारों की देखभाल करनी है.'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 फरवरी 2019 को झारखंड के हज़ारीबाग़ में अपने भाषण के दौरान ये बातें कही थीं.

पुलवामा हमले के वक्त प्रधानमंत्री उत्तराखंड में थे. इस कारण उन्हें इस हमले की जानकारी कुछ घंटों बाद मिली थी. हमले के तीन दिन बाद वो झारखंड आए थे.

हज़ारीबाग़ में उनके इस भाषण से बमुश्किल 12 घंटे पहले 16 फ़रवरी की दोपहर में गुमला ज़िले के फ़रसामा गांव में विजय सोरेंग का अंतिम संस्कार किया गया था.

वे केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के उन जवानों में शामिल थे, जो पुलवामा हमले में मारे गए थे.

रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी उनके ताबूत को कंधा दिया था. तब उन्होंने घोषणा की थी कि वे और उनके कैबिनेट के सभी सहयोगी अपने एक महीने (फरवरी-2019) का वेतन विजय सोरेंग के परिजनों को देंगे.

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Image caption विजय सोरेंग

जिस पैसे की घोषणा की गई क्या वो मिला?

विजय सोरेंग के पिता वृष सोरेंग ने बताया कि उन्हें वो पैसा आज तक नहीं मिला है.

भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद वे फरसामा गांव में अपनी पत्नी लक्ष्मी सोरेंग के साथ दो कमरों के कच्ची मिट्टी के फर्श वाले खपरैल घर में रहते हैं. यह गांव बसिया प्रखंड के कुम्हारी पंचायत का हिस्सा है.

उनके चार बेटे-बेटियों में विजय सोरेंग सबसे बड़े थे.

वृष सोरेंग ने बीबीसी से कहा, "रघुवर दास जी द्वारा एक महीने का वेतन देने की घोषणा की ख़बर अख़बारों में छपी. अफ़सरों ने भी इस बारे में बताया, लेकिन वह पैसा हमें नहीं मिला. राज्य के सभी कर्मचारियों-अधिकारियों के एक दिन का वेतन देने की भी बात कही गई थी. वो पैसा भी नहीं मिला."

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झारखंड सरकार का कोई ज़िम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहता.

हालांकि, एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि तब वेतन कटौती का यह प्रस्ताव कैबिनेट मीटिंग में भी लाया गया था. उसे लागू करने को लेकर वित्त विभाग ने कुछ आपत्तियां जतायी थीं, जिन्हें दूर करने की कोशिश सरकार ने नहीं की. इस कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री की वह घोषणा अमल में नहीं लाई जा सकी.

कोल इंडिया की कंपनियों ने भी दिखाई लापरवाही

विजय सोरेंग के पिता वृष सोरेंग ने बताया कि उस समय कोल इंडिया की कंपनियों सीसीएल और बीसीसीएल ने भी अपने कर्मचारियों के एक दिन का वेतन देने की घोषणा की थी. फरवरी-2019 के वेतन से पैसे काट भी लिए गए. करीब पौने दो करोड़ रुपये की यह राशि अभी तक बैंक में पड़ी है. कंपनी अब कह रही है कि पारिवारिक विवाद के कारण हमें यह पैसा नहीं दिया जा रहा है.

वो कहते हैं "मैं सीसीएल के सीएमडी से भी मिला था. उन्होंने जल्दी ही पैसा दिलाने की बात कही, लेकिन अब इसके एक साल होने वाले हैं."

इस बाबत पूछे जाने पर सीसीएल के जीएम (एडमिनिस्ट्रेशन) विमलेंदु कुमार ने भी बीबीसी से कहा कि यह मामला उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आता है. लिहाज़ा, वे इस संबंध में कुछ नहीं बता सकते.

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Image caption विजय सोरेंग के माता-पिता

सिर्फ़ दस लाख मिले

वृष सोरेंग ने आगे कहा,"हमारी बहू को झारखंड सरकार से सिर्फ़ दस लाख रुपये मिले. इसकी घोषणा भी तब के मुख्यमंत्री रघुवर दास जी ने ही की थी. कुछ निजी संस्थाओं ने भी थोड़ी-बहुत मदद की. दुख इस बात का है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी जी ही हमारे गार्जियन हैं (जैसा उन्होंने हज़ारीबाग़ में कहा था) तब हमें इतनी दिक़्क़त क्यों हो रही है. हमें कोई पूछने क्यों नहीं आता."

"विजय सोरेंग का विभागीय पैसा (सीआरपीएफ़ से मिलने वाला लाभ) भी सक्सेशन सर्टिफिकेट नहीं दाख़िल होने के कारण हमें नहीं मिल सका है. यह मामला गुमला के ज़िला कोर्ट में विचाराधीन है. इसमें कथित तौर पर कुछ दलाल लग गए हैं, जो पैसा दिलाने के एवज़ में दरअसल हमसे पैसा खाना चाहते हैं."

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क्या परिवार में विवाद है?

विजय सोरेंग ने दो शादियां की थीं. उनकी पहली पत्नी कारमेला बा झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) की जवान हैं. वे रांची में अपने 24 साल के बेटे अरुण के साथ रहती हैं. दूसरी पत्नी विमला देवी सिमडेगा ज़िले में रहती हैं. उनके चार बच्चे हैं, इनमें से एक लड़की बोल नहीं पाती. बाकी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं.

पैसे के बंटवारे को लेकर दोनों पत्नियों में फिलहाल एकराय नहीं है.

कारमेला बा ने बीबीसी से कहा "पति को खो दिया, तो अब किसका आसरा करें. कहने को तो मैं सरकारी क्वार्टर में रहती हूं, लेकिन इसके किराये का पैसा मेरे वेतन से काटा जाता है. सरकार ने मुझे कोई घर नहीं दिया. रही बात सीआरपीएफ़ से मिलने वाले लाभ की, तो मैं चाहती हूं कि वह पैसा हम दोनों पत्नियों के बीच आधा-आधा बांट दिया जाए. यह फ़ैसला कोर्ट को करना है."

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उन्होंने कहा, "सीसीएल और बीसीसीएल पारिवारिक विवाद का बहाना बना रहे हैं. अगर वे पैसा देने का मन बना लें, तो एक दिन में इसका समाधान निकाला जा सकता है. दुख है कि मेरे पति के नाम पर पैसा जमा करके ये कंपनियां बैंक से इसका सूद खा रही हैं."

इस बीच उनकी दूसरी पत्नी विमला देवी ने भी कहा कि पुलवामा हमले के एक साल बाद भी उन्हें सारे लाभ और पैसे नहीं मिल सके, यह दुर्भाग्य है.

बहरहाल, विजय सोरेंग के परिजनों और उनके गांव के लोगों को इस बात का मलाल है कि पुलवामा के शहीदों के नाम पर प्रधानमंत्री तक ने राजनीति की, चुनावी भाषण दिए लेकिन कोई उनकी सुध लेने नहीं आया.

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