दिल्ली चुनावः गढ़वाली वोट, शाहीन बाग़ और मनीष सिसोदिया की मुश्किल जीत

  • 12 फरवरी 2020
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Image caption जीत के सर्टिफ़िकेट के साथ मनीष सिसोदिया

दोपहर का वक़्त है, कुछ लोग मनीष सिसोदिया की घर की बालकनी को बैलूनों से सजा रहे हैं, अंदर के एक कमरे में कुछ देर बाद निकलनेवाली विजय यात्रा की आख़िरी तैयारियों को लेकर बातचीत जारी है. इसी कमरे में कुछ 12-13 घंटे पहले बैठे लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो रही थीं जब मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में आठ फ़रवरी को हुए चुनाव की गिनती जारी थी और अरविंद केजरीवाल के डिप्टी मुख्यमंत्री अपने प्रतिद्वंद्वियों से लगातार पीछे चल रहे थे.

ख़ैर आख़िरी राउंड की गिनती में मनीष सिसोदिया के मिले वोटों की गिनती ऊपर की तरफ़ खिसकने लगी और वो कुल 70163 वोट हासिल कर 3207 मतों से जीत गए.

मनीष सिसोदिया के क़रीबी कार्यकर्ताओं में से एक प्रिंस शर्मा कहते हैं, 'एक समय तो हमसब चिंतित हो गए थे.'

फ़िक्र की बात विनोदनगर के अंबेडकर पार्क में बैठे, ख़ुद को सिसोदिया का वोटर बतानेवाले आशा सिंह तोमर भी करते हैं और कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने 'अपना पूरा अमला ही लगता है इधर लगा दिया था, सारे सीएम यहां पहुंच रहे थे.'

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता दावा करते हैं कि बीजेपी के कई शीर्ष नेताओं ने रात-रात भर इलाक़े की झुग्गी बस्तियों में कैंप किया है, बड़े-बड़े नेताओं की रैलियां और नुक्कड़ सभाएं क्षेत्र में आयोजित हुईं.

Image caption आशा सिंह तोमर (चश्मे में) बीमारों की ज़रूरतों की चीज़ों पर जीएसटी लगने से नाराज़ हैं

गढ़वाली वोटर

बीजेपी ने इस चुनाव में पूर्वी दिल्ली पर पूरा ध्यान दिया और उसका नतीजा सामने है, पार्टी को जो आठ सीटें हासिल हुई हैं उनमें से तीन इसी इलाक़े की हैं और बाक़ी की तीन पूर्वी उत्तर दिल्ली में हैं.

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली रैली पूर्वी दिल्ली में ही आयोजित हुई थी जहां उन्होंने अपने भाषण में पूर्वाचंल के लोगों की तारीफ़ भी की थी.

दिल्ली प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी का ताल्लुक़ पूर्वांचल से ही है और वो पूर्वी उत्तर दिल्ली से सांसद भी हैं.

पूर्वी दिल्ली सांसद गौतम गंभीर का इलाक़ा है.

पूर्वी दिल्ली के कई इलाक़ों में उत्तरांचल के मूल निवासियों की भी बसाहट है और इसे ध्यान में रखकर बीजेपी ने अपना उम्मीदवार रवि नेगी को बनाया था. कांग्रेस की तरफ़ से मैदान में थे लक्ष्मण रावत, वो भी उत्तरांचल से ही हैं.

रवि नेगी को कुल 66,956 वोट हासिल हुए और उनके मत का कुल प्रतिशत 47 था. सिसोदिया को कुल 49.33 प्रतिशत वोट मिले. कांग्रेस के लक्ष्मण रावत ने 2800 से अधिक वोट अपनी तरफ़ खींचे हालांकि कांग्रेस का प्रतिशत कुल वोटों में महज़ 1.97 है.

विनोद नगर में पंचर की दुकान चलानेवाले सोमनाथ मलहोत्रा का कहना है कि रवि नेगी 35 साल से इसी इलाक़े में रह रहे हैं और लोगों से उनका संबंध बहुत गहरा है.

मगर मुहम्मदी मस्जिद के पास रेस्तरां के मालिक सिराजुद्दीन अंसारी कहते हैं कि सिसोदिया साहब को तो 'दो गढ़वालियों का शुक्रगुज़ार होना चाहिए जिससे वोट बंट गए.'

अगर उत्तराखंड और पूर्वांचलियों के वोटों का बंटवारा आप के ख़िलाफ़ गया तो वहाजुद्दीन अंसारी के मुताबिक़ मुस्लमानों का वोट एकमुश्त मनीष सिसोदिया को गया क्योंकि कांग्रेस से तो कोई उम्मीद है नहीं केजरीवाल शायद सीएए में कुछ कर पाएं.

चुनाव के दौरान हालांकि अरविंद केजरीवाल न तो नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ होनेवाले किसी प्रदर्शन में गए न खुलकर उसपर कुछ बोले हालांकि उनके दल ने संसद में बिल के ख़िलाफ़ वोट दिया था.

Image caption पटपड़गंज में मनीष सिसोदिया का निवास

शाहीन बाग़ के समर्थन वाला बयान

मनीष सिसोदिया के 'शाहीन बाग़ के समर्थन' वाले बयान के भी बीजेपी ने ख़ूब उछाला जिसकी वजह से पूर्व मांगेराम शर्मा के मुताबिक़ कुछ हिंदू वोट भी आप की तरफ़ से खिसक गए.

पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और ख़ुद को बीजेपी समर्थक बताने वाले केके खंडेलवाल भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं हालांकि इस बार उनका बटन झाड़ू पर दबा है.

वे कहते हैं, "जहां इसका फ़ायदा बीजेपी को हुआ वहीं प्रकाश जावड़ेकर जैसे लोगों का अरविंद केजरीवाल को अलगाववादी और आतंकवादी कहना और मनोज तिवारी और दूसरों का बार-बार ये बयान कि आम आदमी पार्टी ने कुछ नहीं किया, पार्टी (बीजेपी) के ख़िलाफ़ गया."

आशा सिंह तोमर कहते हैं, "हमने देखा है इस स्कूल को बनते हुए, यहां स्वीमिंग पूल तैयार होते हुए या फिर हमारे जागरण के समय एक बार कहने पर मनीष सिसोदिया मंदिर मे नल लगवाने को तैयार हो गए और दूसरे दिन वो काम हो भी गया."

उनके साथी बिहार के चंपारण से आकर दिल्ली में बस गए कृष्ण कुमार कहते हैं, "हमें याद था कि आप ने ऑटो रिक्शा हासिल करना पहले के बनिस्बत कितना सस्ता और आसान कर दिया था और उसको इसका फ़ायदा हुआ."

पार्क में दोस्तों के साथ धूप सेंक रहे आशा सिंह तोमर नरेंद्र मोदी सरकार की जीएसटी पालिसी को लेकर भी ख़ासे नाराज़ दिखे.

उन्होंने कहा,"मैंने जब बेटे के एक्सीडेंट के बाद उसके लिए बाज़ार से वॉकर लाने भेजा तो पता चला कि 1200 की क़ीमत के अलावा उसपर 18 फ़ीसद जीएसटी लगेगा.अब बताएं बीमारी में काम आनेवाली वस्तुओं पर भी कर देना होगा? ये कैसे उचित है?"

पान की दुकान चलाने वाले मस्तराम कहते हैं कि बहुत सारे व्यापारियों ने हमसे बातों-बातों में कहा है कि बीजेपी को वोट नहीं देंगे क्योंकि हमारी लुटिया डूबो दी है इन्होंने.

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