ट्रंप का भारत दौरा: भारतीय मूल के वोट, व्यापार और रक्षा सौदे

  • 18 फरवरी 2020
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डोनल्ड ट्रंप ने अपनी प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान लाखों की भीड़ की बात की और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने तो (अहमदाबाद) हवाई अड्डे से स्टेडियम के बीच ही 50-70 लाख लोगों की मौजूदगी की बात कही.

शायद उनके ज़हन में ह्यूस्टन की 'हाउडी, मोदी' रैली की वो तस्वीर रही हो जहां लगभग 50 हज़ार भारतीय-अमरीकियों की भीड़ में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में नारा बुलंद करते हुए कहा था, 'अबकी बार ट्रंप सरकार.'

हालांकि कई अमरीकी अख़बारों जैसे द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस रैली के संदर्भ में अमरीकी राष्ट्रपति को मोदी का 'पिछलग्गू' क़रार दिया था लेकिन डोनल्ड ट्रंप के लिए भारतीय मूल के वो 40 लाख अमरीकी अहम हैं. इस साल नवंबर में अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव है.

अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा और उससे डोनल्ड ट्रंप को हो सकने वाले संभावित तीन बड़े फ़ायदों की बात करते हुए 'द हिंदू अख़बार' की कूटनीतिक मामलों की संपादक सुहासिनी हैदर कहती हैं कि ट्रंप को लगता है कि 'ये यात्रा प्रवासी वोटों को प्रभावित कर सकती है',

कश्मीर

वे कहती हैं कि 'व्यापार संधियों और कूटनीतिक रिश्तों को बिगाड़नेवाले की अपनी छवि सुधारने के प्रयास के साथ-साथ डोनल्ड ट्रंप कश्मीर के मुद्दे को छेड़ने की कोशिश भी करेंगे. सुहासिनी हैदर के मुताबिक़ कश्मीर इस दौरे का 'वाईल्ड कार्ड' होगा.

अर्दोआन, कश्मीर, भारत

अमरीकी राष्ट्रपति के 24 फ़रवरी से शुरू हो रहे भारत दौरे के चंद दिनों पहले ही चार सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो को ख़त लिखकर 'किसी भी प्रजातंत्र में जारी इतने लंबे इंटरनेट बैन' और आम लोगों को नेताओं के लंबे क़ैद को लेकर चिंता जताई थी.

ख़त लिखनेवाले सांसदों में से दो राष्ट्रपति ट्रंप के राजनीतिक दल रिपब्लिकन पार्टी और दो विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी के हैं.

ट्रंप ने पहले भी कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पहल की थी. हालांकि भारत ने उसके लिए साफ मना कर दिया था.

पाकिस्तान के बालाकोट पर भारत के हमले के दौरान पकड़े गए एयरफोर्स पायलट अभिनंदन को पाकिस्तान से रिहा करवाने में अहम भूमिका निभाने के संकेत भी राष्ट्रपति ट्रंप ने उस समय दिए थे.

चुनाव के क़रीब आते हुए समय को देखते हुए अमरीकी राष्ट्रपति फिर से इसकी कोशिश कर सकते हैं.

'मेक अमरीका ग्रेट अगेन' ट्रंप के अहम नारों में से एक रहा है.

हाल तक आ रहे सर्वेज़ में डोनल्ड ट्रंप की लोकप्रियता का आंकड़ा 50 के भीतर ही रहा है और अमरीका को अहम दिखा सकने वाला किसी तरह का फ़ैसला उस प्रतिशत को ऊपर ले जाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा पर हुए हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के संबंध और बिगड़े हैं

रक्षा और दूसरे सौदे

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ 24 फ़रवरी को दिल्ली में अपनी मौजूदगी के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति कई बड़ी भारतीय कंपनियों जैसे तेल और गैस के क्षेत्र की जानी मानी कंपनी रिलायंस, ऑटो और दूसरे कई अहम क्षेत्रों में मौजूद टाटा सन्स, टेलिकॉम की कंपनी एयरटेल, महिंद्रा और महिंद्रा और दूसरी कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे.

निर्माण क्षेत्र में तेज़ी लाना और नौकरियों के नए मौक़े मुहैया करवाना ट्रंप प्रशासन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ख़ासतौर पर चुनावी साल में.

पांच माह की लगातार सुस्ती के बाद हालांकि जनवरी में अमरीकी निर्माण क्षेत्र के आंकड़ों में सुधार आया है लेकिन अर्थव्यवस्था की पूरी बहाली का लक्ष्य अभी दूर है.

महिंद्रा और महिंद्रा ने अमरीका में एक अरब डॉलर निवेश और उसके बलबूते रोज़गार के नए अवसरों की बात कही थी. 100 अरब डॉलर के टाटा समूह की 13 कंपनियां अमरीका में है जिसमें 35,000 लोग काम करते हैं.

व्यापार संस्था सीआईआई की एक स्टडी के मुताबिक़ अमरीका में कम से कम 100 भारतीय कंपनियों का कुल 18 अरब डॉलर का निवेश है. इनमें एक लाख से अधिक अमरीकी कामगारों को रोज़गार हासिल है.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप से मिलनेवाले उद्योगपतियों की ये लिस्ट क्लियरेंस के लिए अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस को भेजी गई है और दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास उसकी देखरेख कर रहा है.

ट्रंप के दौरे में भारतीय स्टील, अल्यूमीनियम पर लगाई गई चुंगियों को कम करने, खेती में काम आनेवाली मशीनों और ऑटो क्षेत्र में अधिक उदार नीतियों और अमरीका की ओर से शुल्क (टैरिफ़) को कम करने की मांग हो सकती है.

इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि भारत अमरीका से 24 लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की ख़रीद के लिए 2.6 अरब डॉलर का रक्षा सौदा फ़ाइनल कर सकता है.

भारतीय-अमरीकियों का वोट

ट्रंप की तमाम उम्मीदों और कई विश्लेषकों के दावों के बावजूद भारतीय मूल के अमरीकियों का कितना वोट डोनल्ड ट्रंप के पक्ष में जाएगा, इसे लेकर कई सवाल हैं.

एशियन अमरीकन लीगल डिफेंस और एजुकेशन फंड नाम की संस्था के मुताबिक़ अधिकांश भारतीय डेमोक्रेट्स के वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं और साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में जानी मानी पत्रिका इकॉनामिक एंड पॉलिटिकल वीकली के मुताबिक़ 77 फ़ीसदी ने हिलेरी क्लिंटन को वोट दिया था.

हालांकि हाल के सालों में अमरीका में रिपब्लिकन हिंदू कॉलिशन जैसी संस्थाओं की पहुंच में इज़ाफ़ा हुआ है.

प्रवासी भारतीयों की संस्था इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा का कहना है कि 'ये कहना मुश्किल है कि राजनीतिक तौर पर राष्ट्रपति के लिए ये कितना मददगार होगा.'

संजीव जोशीपुरा कहते हैं कि वोटर दोनों नेताओं के बीच क़रीबी रिश्तों को किस तरह देखेगा ये उसपर निर्भर करेगा.

लेकिन ये भी तय है कि अपने वोट का फ़ैसला करते वक़्त उनके मन में कहीं न कही राष्ट्रपति ट्रंप के उनको लेकर दिए गए बयानों, क़दमों और अमरीकी वीज़ा को मुश्किल बनाए जाने जैसे सवाल ज़रूर घूम रहे होंगे, जिन सबका सीधा असर भारत जैसे देशों से वहां जाने वाले पेशेवर लोगों पर गहरा पड़ता है.

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