कोरोना वायरस: भारत में अब तक कुल कितने मामले सामने आए?

  • 13 फरवरी 2020
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक ट्वीट में कहा कि देश के लोगों और अर्थव्यवस्था के लिए कोरोना वायरस एक बड़ा ख़तरा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस ख़तरे को गंभीरता से नहीं ले रही और वक़्त पर कार्रवाई ज़रूरी है.

इसके अगले ही दिन गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने ट्वीट कर बताया कि सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने और इसे लेकर देशभर में चल रही तैयारियों को मॉनिटर करने के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया है.

इस समूह की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राज्यमंत्री (जहाज़रानी मंत्रालय) मनसुख मंडाविया, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे मौजूद थे.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि देशभर में कोरोना वायरस से निपटने के लिए किस तरह की तैयारियाँ चल रही हैं और अब तक देश में कितने मामले सामने आए हैं.

उन्होंने कहा, ''भारत ने 17 जनवरी को ही कोरोना वायरस को संज्ञान में ले लिया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन से पहले ही हमने यह घोषित कर दिया था कि आगे चलकर ये ग्लोबल इमरजेंसी बन सकती है. हमने सरकार में हर स्तर पर मंत्रालयों सचिवालयों और देश के मुख्य सचिवों के साथ मिलकर इसे मॉनिटर करना जारी रखा है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हम राज्य सरकारों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ संपर्क में हैं.''

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21 एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि पहले सात एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू की थी जिसमें कलकत्ता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोच्चि, हैदराबाद और बेंगलुरु शामिल थे. शुरुआती दिनों में ही इन सब जगहों पर एक्सपर्ट्स की टीम भी भेजी गई है. बाद में इनकी संख्या बढ़ातर 21 कर दी गई और सी-पोर्ट पर भी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई. इसमें चीन, इंग्लैंड, हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर, जापान और कोरिया, इन छह देशों से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, इस समय पूरे देश में 2315 उड़ानों के यात्रियों को चेक किया जा रहा है. 12 बड़े और 65 छोटे पोर्ट हैं जहां आने वाले यात्रियों को मॉनिटर किया जा रहा है.

इन पोर्ट पर जिन विमानों का रास्ता चीन से जुड़ता है, वैसे 5776 यात्रियों की स्क्रीनिंग हो चुकी है. एनआईबी पुणे में लैब ने करीब 1756 सैंपल को टेस्ट किया जिसमें से सिर्फ 3 पॉज़िटिव पाए गए थे.

नेपाल में कोरोना वायरस का पहला केस सामने आने के बाद नेपाल से जुड़े बॉर्डर वाले राज्यों में भी अलर्ट किया. पंचायत, ग्राम सभा के स्तर पर भी स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. साथ ही चीन से जुड़ी सीमा वाले राज्यों को भी अलर्ट किया गया.

अब तक कुल तीन मामले सामने आए

भारत में अब तक संक्रमण के तीन ऐसे मामले सामने आए हैं जिनकी पुष्टि हुई है. सारे मामले केरल के हैं जहाँ उन्हें भर्ती रखा गया है. ये सभी किसी न किसी तरह वुहान की यात्रा से जुड़े हैं. उनकी जाँच की गई और पॉज़िटिव पाए जाने पर ट्रीटमेंट दिया गया. फ़िलहाल ये नेगेटिव साबित हो गए हैं. उनमें से एक को डिस्चार्ज भी कर दिया है. बाकी दो को भी कुछ दिनों में डिस्चार्ज किया जा सकता है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ''हमने ट्रैवेल पॉलिसी में फिलहाल बदलाव किए हैं. लोगों को ट्रैवेल करने से मना किया था. जो वीज़ा पहले से जारी हो चुके थे उन्हें भी ख़त्म कर दिया है. विदेशी नागरिक जो चीन से भारत की यात्रा पर थे उनका वीज़ा ख़त्म कर दिया गया है.''

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विदेश में फंसे भारतीयों का हाल

डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि डायमंड क्वीन क्रूज़ जहाज़ पर सवार 3700 यात्रियों और चालक दल में कुछ भारतीय भी हैं. उन्होंने बताया कि क्रूज़ में 439 लोगों का टेस्ट किया गया जिसमें से अब तक 174 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं.

उन्होंने बताया कि क्रूज़ पर चालक दल के 132 सदस्य और छह यात्री भारत के भी हैं जिन्हें अभी वहीं रोका गया है.

उन्होंने कहा कि देश भर में लगभग 15991 लोगों को निगरानी में पर रखा गया है जिसमें से करीब 497 लोगों को लक्षणों के आधार पर इलाज दिया जा रहा है.

41 लोगों को सबसे अलग रखा गया है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को अस्पताल में सबसे अलग रख देने का मतलब ये नहीं है कि वो वायरस से पॉज़िटिव है.

सरकार ने कोरोना वायरस को लेकर शिकायत और सुझाव के लिए एक कॉल सेंटर शुरू किया जिसका नंबर है 01123978046, ये 24 घंटे काम करता है. इस पर अब तक चार हज़ार के करीब फोन आए हैं जिसमें लोग जानकारी भी ले रहे हैं और समस्याएं भी बता रहे हैं.

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थर्मल स्क्रीनिंग क्या है?

थर्मल स्क्रीनिंग के ज़रिए कोरोना वायरस या फिर ऐसे ही किसी अन्य रोग से पीड़ित व्यक्ति की पहचान की जा सकती है.

दरअसल थर्मल स्क्रीनिंग से एक स्वस्थ्य व्यक्ति और किसी तरह के विषाणु से ग्रस्त व्यक्ति में साफ़ अंतर पता चलता है. इसकी ख़ासियत यह भी है कि इससे निकलने वाली तरंगों का कोई दुष्प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता. हालांकि इसका इस्तेमाल विशेषज्ञों की देखरेख में किए जाने की ही सलाह दी जाती है.

थर्मल स्क्रीनिंग की प्रक्रिया में लोगों को एक स्कैनर से होकर गुजरना पड़ता है. यह स्कैनर व्यक्ति के शरीर के तापमान के आधार पर संदिग्ध रोगी का पता लगाता है.

सामान्य व्यक्ति के मुकाबले कोरोना से पीड़ित शख़्स के शरीर का तापमान अधिक होगा. संदिग्ध शख़्स को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है.

इसके साथ थर्मल स्कैनर एक इंफ्रारेड कैमरे की तरह काम करता है. इस स्कैनर के जरिए गुजरने वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषाणु इंफ्रारेड तस्वीरों में दिखाई पड़ते हैं.

विषाणुओं की संख्या अधिक या खतरनाक स्तर पर होने पर व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है.

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