वैलेंटाइन्स डे पर कॉलेज ने छात्राओं को क्यों दिलाई 'कभी प्यार नहीं करने' की प्रतिज्ञा

  • 15 फरवरी 2020
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वैलेंटाइन्स डे के मौक़े पर महाराष्ट्र के अमरावती में एक महिला कॉलेज ने अपनी छात्राओं को शपथ दिलवाई है कि वे कभी प्यार नहीं करेंगी.

यह मामला अमरावती के चांदूर रेलवे सिटी में विदर्भ यूथ वेल्फ़ेयर सोसाइटी की ओर से चलाए जाने वाले विमेन्स आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज का है.

अध्यापकों ने छात्राओं से शपथ लेने को कहा कि वे कभी ऐसे शख़्स से शादी नहीं करेंगी जो दहेज मांगेगा और आने वाली पीढ़ियों को भी दहेज का लेन-देन रोकने के लिए जागरूक करेंगी.

मगर इसके अलावा शपथ में प्यार न करने और लव मैरिज न करने जैसी बातें भी शामिल थीं.

छात्राओं की प्रतिज्ञा में ये बातें शामिल थीं- "मैं शपथ लेती हूं कि मुझे अपने माता-पिता पर पूरा भरोसा है. इसलिए, अपने आसपास हो रहे घटनाक्रम को देखते हुए कभी प्यार नहीं करूंगी और न ही प्रेम-विवाह करूंगी. साथ ही, मैं दहेज मांगने वाले शख़्स से शादी नहीं करूंगी. अगर वर्तमान सामाजिक हालात के आगे विवश होकर मेरे माता-पिता दहेज देकर मेरी शादी करते हैं तो जब मैं मां बनूंगी, तब अपनी बहू से दहेज नहीं मांगूंगी. साथ ही, अपनी बेटी की शादी में भी दहेज नहीं दूंगी. मैं सशक्त भारत और स्वस्थ समाज के लिए अपने सामाजिक दायित्व के तौर पर यह शपथ लेती हूं."

क्या कहता है कॉलेज

छात्राओं से करवाई गई इस प्रतिज्ञा को लेकर कॉलेज का कहना है वे 'प्यार के ख़िलाफ़ नहीं है' मगर 'लड़कियों को सही शख़्स चुनना चाहिए.'

विमेन्स आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज के पॉलिटिकल साइंट डिपार्टमेट के प्रमुख प्रदीप दंदे ने कहा, "हम प्यार के ख़िलाफ नहीं हैं. हम नहीं कह रहे कि प्यार बुरी चीज़ है. मगर, इस किशोरावस्था में लड़कियों को प्यार और आकर्षण का पता नहीं होता. उन्हें नहीं मालूम होता कि कौन सा शख़्स उनके लिए सही है. इसलिए हमने यह शपथ दिलाई ताकि इस संबंध में उनका मार्गदर्शन हो सके."

वह कहते हैं, "यह प्रतिज्ञा वयस्कों के लिए नहीं है. ये कॉलेज जाने वाली किशोरियों के लिए है. दिल्ली के निर्भया केस, हैदराबाद केस, धमनगांव में एक लड़की की हत्या और हिंगनाघाट में लड़की को जलाए जाने जैसी कई घटनाएं हुई हैं. जिस अख़बार ने हिंगनाघाट में लड़की को जलाने की ख़बर छापी है, उसने यह भी छापा है कि कैसे 10 दिनों में तिवसा ज़िले में 10 लड़कियां ग़ायब हो गईं."

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महाराष्ट्र के वर्धा ज़िले के हिंगनाघाट में एक युवती को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई थी. बाद में इस युवती की मौत हो गई थी.

कॉलेज के अधिकारी की ओर से दिए जा रहे तर्कों को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महिला विंग की क्षेत्रीय अध्यक्ष रूपाली चकांकर खारिज करती हैं. वह कहती हैं कि ज़रूरत सामाजिक जागरूकता की है.

रूपाली ने कहा, "समाज में लड़कियों पर बहुत सारी पाबंदियां हैं मगर कोई नहीं समझता कि युवा लड़कों के दिमाग़ में क्या चल रहा है. यह बदलना चाहिए."

वह कहती हैं, "हिंगनाघाट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं. यह ख़तरनाक है और इस संबंध में समाज को जागरूक किया जाना चाहिए. मगर शपथ से क्या होगा. हमें समाज की सोचना बदलनी होगी. अगर महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझना बंद कर दिया जाए तो इस तरह की घटनाएं टाली जा सकती हैं. लड़कियों को लव मैरिज न करने की शपथ दिलाने से बेहतर होगा कि लड़कियों को शिक्षित किया जाए कि क्या सही है, क्या ग़लत. लड़कों को सिखाया जाना चाहिए कि समाज में कैसे ज़िम्मेदारी से रहना होता है."

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मोरल पुलिसिंग की कोशिशहै शपथ?

जिस कॉलेज में यह शपथ दिलाई गई, वहां पर पॉलिटिकल साइंट डिपार्टमेट के प्रमुख प्रदीप दंदे सवाल उठाते हैं कि लड़कियां क्यों अपने माता-पिता की इच्छा के ख़िलाफ़ जाकर प्रेम विवाह करती हैं.

वह कहते हैं, "हम आधुनिकता के नाम पर कैसा समाज बना रहे हैं? इसका हल क्या है? हमारे कॉलेज में हाल ही में नेशनल सर्विस स्कीम की वर्कशॉप हुई थी जिसमें हमने 'युवाओं के सामने चुनौतियां' विषय पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया था. इसमें लड़कियों से पूछा गया कि क्या उन्हें मालूम है कि उनके आसपास क्या हो रहा है? क्या वे अख़बार नहीं पढ़तीं? क्यों उन्हें इन घटनाओं के बारे में पता नहीं था? क्या उन्हें अपने माता-पिता पर भरोसा नहीं है? क्या उन्हें लगता है कि उनके माता-पिता उनकी शादी की व्यवस्था नहीं करेंगे? तो फिर क्यों वे अपने माता-पिता की इच्छा के ख़िलाफ़ शादी करती हैं?"

मगर शिक्षाविदों का मानना है कि विमेन्स आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज में दिलवाई गई शपथ न सिर्फ़ बेमतलब है बल्कि ग़ैरज़रूरी भी है.

एक्सपेरिमेंटल टीचर बाबूसाहब चास्कर कहते हैं, "शपथ दिलाना शब्दों का खेल मात्र है. कॉलेजों का काम है लड़कियों को अच्छी शिक्षा देना. मगर कई बार वे मोरल पुलिसिंग करने लगते हैं."

बाबूसाहब कहते हैं, "शिक्षण संस्थानों को शिक्षा के माध्यम से छात्रों की समस्याएं हल करनी चाहिए. साथ ही, शपथ दिलाने की बजाय प्रशासन को काउंसलिंग के माध्यम से समझना चाहिए कि छात्रों को समस्याओं क्या आ रही हैं. मगर कोई उनसे खुलकर बात नहीं करता. आज भी इससे बचा जाता है. इस पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है."

पत्रकार मुक्ता चैतन्या कहती हैं, "यह लड़कियों को शपथ दिलाने का नहीं बल्कि सशक्त करने का दौर है."

वह कहती हैं, "इस मसले को लेकर शपथ दिलाना कोई हल नहीं है. शपथ दिलाना तो सतही क़दम है. दरअसल, इस तरह की शपथ दिलाने से वो लड़की कन्फ़्यूज़ हो सकती है कि जो अच्छे व्यक्ति से प्यार करती है. इस समस्या के मुख्य कारण का सामना करना ज़रूरी है."

मुक्ता कहती हैं, "हमारे समाज में लड़की की सेक्शुऐलिटी के बारे में नहीं सोचा जाता. हम सेक्शुऐलिटी को लेकर लड़कियों से बात करने से कतराते हैं. लड़कियों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाकर उन्हें सही से सेक्शुअल एजुकेशन देनी चाहिए. अगर इन लड़कियों को सशक्त किया जाता है तो वे अपनी यौन चेतना, रिश्तों, अपनी भावनाओं को लेकर सजग होंगी और उन्हें वे ढंग से संभाल पाएंगी."

वह कहती हैं कि लड़कियों को इस तरह से शिक्षित किया जाना चाहिए कि वे ये समझ सकें कि उनके लिए सही आदमी कौन है.

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पहले ज़माने में कैसे करते थे लोग अपने प्यार का इज़हार

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