मनमोहन सिंह ने मोंटेक से अपने इस्तीफ़े के लिए पूछा था?- प्रेस रिव्यू

  • 17 फरवरी 2020
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समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट आज सभी प्रमुख अख़बारों में छपी है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने भी इस रिपोर्ट को प्रमुखता से छापा है.

2013 में यूपीए शासनकाल के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी ही सरकार का एक आर्डिनेंस फाड़ दिया था. राहुल ने जब ऑर्डिनेंस फाड़ा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीका में थे.

मनमोहन सिंह के साथ योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी थे. इस रिपोर्ट के अनुसार मनमोहन सिंह ने अहलूवालिया से पूछा था कि क्या उन्हें प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए?

अहलूवालिया ने अपनी नई किताब 'बैकस्टेज: द स्टोरी बिहाइंड इंडियाज हाई ग्रोथ इयर्स' में इस वाक़ये का ज़िक्र किया है. तब अहलूवालिया ने मनमोहन सिंह से कहा था कि ऐसे समय में उनका इस्तीफ़ा देना ठीक नहीं होगा.

उस समय राहुल गांधी ने अपनी ही सरकार के फ़ैसले को बकवास क़रार देते हुए संबंधित अध्यादेश के दस्तावेजों की प्रति को फाड़ कर फेंक दिया था. यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश पर यूपीए सरकार की ओर लाया गया था.

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिका से स्वदेश लौटने पर अपने इस्तीफ़े की अटकलों से साफ़ इनकार कर दिया था. अहलूवालिया ने उस दौर को याद करते हुए बताया, ''मैं उस समय न्यूयार्क में प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था. मेरे भाई संजीव, जो आइएएस पद से रिटायर हो चुके हैं, ने मुझे फ़ोन करके बताया कि उन्होंने एक लेख लिया है जो पीएम के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने मुझे वो लेख ई-मेल किया और पूछा कि यह उन्हें शर्मसार करने वाला तो नहीं है?''

यह लेख अहलूवालिया के भाई के होने के नाते मीडिया में चर्चा में रहा था. मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने किताब में लिखा है, ''मैंने पहला काम यह किया कि उस लेख को लेकर पीएम के पास गया. मैं चाहता था कि इसके बारे में सबसे पहले वो मेरे मुंह से सुनें. उन्होंने उसे शांति से पढ़ा और कोई टिप्पणी नहीं की. फिर एकाएक उन्होंने पूछा, क्या आप सोचते हैं कि मैं इस्तीफ़ा दे दूं?''

मोंटेक ने बताया, ''मैंने कहा कि इस मुद्दे पर इस्तीफ़ा देना उचित नहीं होगा. फिर मैंने यह सोचा कि क्या मैं उनसे वही कह रहा हूं जो वो सुनना चाहते हैं. लेकिन मैं मानता हूं कि मैंने उन्हें सही सलाह दी थी.''

सीएए और 370 पर दबाव के सामने नहीं झुकेंगे: मोदी

दैनिक जागरण ने पहले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीएए और अनुच्छेद 370 पर दिए बयान को लीड ख़बर बनाया है. अख़बार ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन पर पूरी तरह से हमलावर दिखे.

पीए मोदी ने कहा, ''अनुच्छेद-370 का फ़ैसला हो या सीएए. दोनों देशहित में ज़रूरी थे. इन पर फिर से विचार का सवाल ही पैदा नहीं होता है. इन फ़ैसलों के लिए देश के लोगों ने लंबा इंतज़ार किया है. दुनिया भर के सारे दबाव के बावजूद इन फ़ैसलों पर हम कायम रहे और रहेंगे.''

मोदी रविवार को वाराणसी मंडल के चंदौली में पं. दीनदयाल स्मृति स्थल पर जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने इस मौक़े पर राम मंदिर ट्रस्ट का ज़िक्र किया और विश्वास दिलाया कि मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट तेज़ी से काम करेगा. देश भर में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच पीएम का यह बयान काफ़ी अहम माना जा रहा है.

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बाबूलाल मरांडी की 14 सालों बाद आज बीजेपी में वापसी

प्रभात ख़बर ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की बीजेपी में आज यानी 17 फ़रवरी को होने जा रही वापसी की ख़बर पहले पन्ने पर जगह दी है. अख़बार ने लिखा है कि 14 सालों बाद बाबूलाल मरांडी फिर से बीजेपी के हो जाएंगे.

इस मौक़े पर बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर समेत कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे. अख़बार के अनुसार आज दिन में 12 बजे धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में कार्यक्रम शुरू होगा. बीजेपी ने इस मौक़े पर झारखंड के अपने सभी विधायकों और सांसदों को मौजूद रहने के लिए कहा है.

पिछले दिनों बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी की वर्किंग कमिटी की बैठक में झारखंड विकास मोर्च के बीजेपी में विलय का फ़ैसला किया था. उधर झारखंड विकास मोर्चा से निष्कासित नेता प्रदीप यादव और विधायक बंधु तिर्की ने रविवार को सैकड़ों समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की है.

जामिया में हिंसा का वीडियो लीक कैसे हुआ?

नवभारत टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लाइब्रेरी हिंसा का एक वीडियो शनिवार देर रात जारी हुआ, जिसके बाद सोशल मीडिया में हलचल मच गई. वीडियो में पुलिस और पैरामिलिट्री के जवान एक रीडिंग रूम में किताबें लिए बैठे स्टूडेंट्स को पीट रहे हैं. सीएए-एनआरसी-एनपीआर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) का कहना है कि यह वीडियो ओल्ड रीडिंग हॉल का है.

इस वीडियो के हवाले से जामिया स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर पुलिस की यह बात मान भी लें कि पत्थर मारने वाले लाइब्रेरी के अंदर घुस गए थे और उसे किताबें खोले इन लोगों पर शक था, तो मारने की बजाय वो आराम से इन्हें पकड़कर ले जा सकती थी. कमिटी ने अपनी पुराने मांग को फिर सामने रखते हुए कहा है कि कि लाइब्रेरी का हर वीडियो जामिया प्रशासन जारी करे. दूसरी ओर, जामिया प्रशासन का कहना है कि यह वीडियो उसने जेसीसी को नहीं दिया है, अब जांच की जाएगी कि लीक कहां से हुआ.

जामिया प्रशासन ने यह भी कहा है कि जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी असल में जॉइंट कॉर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) है और यह यूनिवर्सिटी की बॉडी नहीं है. स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी इस बयान से अपना बचाव कर रही है क्योंकि वो केंद्र सरकार के अंडर है. क्राइम ब्रांच के स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन का कहना है कि वायरल विडियो की सत्यता की जांच कराई जाएगी. इसके बाद ही पता लगेगा कि इनकी असलियत क्या है.

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