शाहीन बाग़: संजय हेगड़े, साधना रामचंद्रन और वजाहत हबीबुल्लाह के बारे में जानिए

  • 17 फरवरी 2020
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Image caption शाहीन बाग में CAA के खिलाफ प्रदर्शन करतीं महिलाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग के प्रदर्शन को लेकर एक याचिका की सुनवाई की.

प्रदर्शनकारियों से बातचीत और प्रदर्शन की जगह बदलने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीन लोगों को मध्यस्थ नियुक्त किया है.

इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, मध्यस्थता विशेषज्ञ साधना रामचंद्रन और पूर्व IAS और देश के पहले अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह शामिल किए गए हैं. आइए, जानें इन तीनों शख्सियतों के बारे में.

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Image caption संजय हेगड़े

संजय हेगड़े

संजय हेगड़े सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं, जिन्होंने अपना करियर साल 1989 में शुरू किया था. साल 1996 से 2004 के बीच संजय सुप्रीम कोर्ट में 'यूनियन ऑफ इंडिया' के दलील पेश करने वाले समूह में थे.

हाल ही में संजय तब सुर्खियों में आए, जब एक नाज़ी-विरोधी तस्वीर पोस्ट करने के बाद ट्विटर ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया था. संजय इसके ख़िलाफ़ हाईकोर्ट तक गए थे.

कर्नाटक के लिए क़रीब एक दशक तक 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' की भूमिका निभाकर हेगड़े वकालत की प्रैक्टिस में लौट आए. कई हाई-प्रोफाइल मामलों के अलावा संजय राष्ट्रीय नागरिकता सूची से निकाले गए लोगों, मॉब लिंचिंग मामलों और मुंबई के आरे जंगल के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में पेश हो चुके हैं.

अखबारों में पेचीदा क़ानूनी मामलों पर लेख लिखने वाले संजय टीवी डिबेट्स में अक्सर नज़र आते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संजय हेगड़े ने बीबीसी से बातचीत में अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "मैं और मेरी सहकर्मी साधना रामचंद्रन सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदान दिए गए इस दायित्व को स्वीकार करते हैं. हम सभी पक्षों से उनके मसले सुलझाने के नज़रिए से मिलेंगे, ताकि विरोध जताने के अधिकार और आम जीवन की ज़रूरतों का सम्मान और सुरक्षा बनी रहे. हम उम्मीद करते हैं कि हमारी मदद से ये मामले सभी पक्षों को संतुष्ट करते हुए सुलझाए जाएंगे."

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Image caption साधना रामचंद्रन (दाएं)

साधना रामचंद्रन

साधना रामचंद्रन वरिष्ठ वकील है, जो मध्यस्थता में निपुण हैं. वह मध्यस्थता मुहैया कराने वाले संगठन 'माध्यम इंटरनेशनल' की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं. माध्यम इंटरनेशनल की वेबसाइट पर मौजूद साधना का परिचय बताता है कि वह साल 1978 से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं.

वह कई बरसों तक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़ी रही हैं और बाल अधिकारों और शिक्षा से जुड़ी कई मानवाधिकार जांचों का हिस्सा रही हैं.

माध्यम इंटरनेशनल पर साधना का परिचय बताता है कि 2006 से वह प्रशिक्षित मध्यस्थ हैं. वह अब तक पारिवारिक, वैवाहिक, कॉन्ट्रैक्चुअल, व्यावसायिक, औद्योगिक और बौद्धिक संपत्ति से जुड़े कई मामलों में मध्यस्थता कर चुकी हैं. इन मामलों में मध्यस्थता के निर्देश सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए थे.

साधना दिल्ली हाईकोर्ट के मध्यस्थता और समझौता केंद्र (समाधान) की संयोजक सचिव रही हैं. अभी वह 'समाधान' की निरीक्षण समिति का हिस्सा हैं.

साधना भारत की कई उच्च अदालतों में वकीलों के मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्यस्थता प्रशिक्षक रही हैं. साधना की ट्रेनिंग भारत और अमरीका में हुई है. मई 2014 में उन्होंने बेलफास्ट में आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन' में एक पेपर भी पेश किया था.

वेबसाइट के मुताबिक लीगल एजुकेशन में साधना की दिलचस्पी है. साथ ही, वह देहरादून स्थित पेट्रोलियन और एनर्जी स्टडीज़ यूनिवर्सिटी में लीगल स्टडीज़ कॉलेज की परामर्श समिति की सदस्य हैं.

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Image caption वजाहत हबीबुल्लाह

वजाहत हबीबुल्लाह

वजाहत हबीबुल्लाह 1968 बैच के IAS अफसर थे, जो अगस्त 2005 में रिटायर हुए थे. रिटायरमेंट के बाद अक्तूबर 2005 में वह देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किए गए. वह सितंबर 2010 तक इस पद पर रहे.

इसके बाद फरवरी 2011 में उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इस पद पर वह फरवरी 2014 तक रहे. इसके अलावा वजाहत केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय में सचिव भी रह चुके हैं.

साल 1991 से 1993 के बीच हबीबुल्लाह जम्मू-कश्मीर (तब राज्य) के कश्मीर डिविज़न के आठ जिलों के संभागीय आयुक्त (डिविज़नल कमिश्नर) थे.

हज़रतबल दरगाह पर कब्ज़ा जमाए चरमपंथियों से बातचीत के दौरान एक गंभीर सड़क हादसे के बाद उनकी सेवा अचानक समाप्त कर दी गई थी. जुलाई 2010 में उन्हें वर्ल्ड बैंक की 'इन्फो अपील बोर्ड' का सदस्य नियुक्त किया गया था.

अगस्त 2019 में वजाहत ने केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर को केंद्र-शासित प्रदेश बनाने की आलोचना की थी. वजाहत ने कहा था, "ऐसा करके आप लोगों की ताकत घटा रहे हैं."

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सीएए विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने वाली कुछ महिलाओं ने अपनी नौकरी तक छोड़ दी है.

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