छत्रपति शिवाजी की जन्मतिथि को लेकर विवाद क्यों है?

  • 19 फरवरी 2020
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बीते कुछ दशकों से महाराष्ट्र में शिवाजी की जन्मतिथि को लेकर विवाद जारी है.

कुछ लोग मानते हैं कि शिवाजी की जन्मतिथि अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर तय की जानी चाहिए. वहीं कुछ लोग मानते हैं कि शिवाजी की जयंती को हिंदू पंचांग के आधार पर तय किया जाना चाहिए.

इस साल ठाकरे सरकार के परिवहन मंत्री अनिल परब ने ऐलान किया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 19 तारीख को शिवाजयंती मनाएंगे, लेकिन शिवसेना उनकी जयंती को हिंदू पंचांग के मुताबिक़ ही मनाएगी.

लेकिन सवाल ये है कि शिवाजी की जन्मतिथि 19 फरवरी कैसे तय की गई.

फिलहाल ये माना जाता है कि शिवाजी की जन्मतिथि 19 फरवरी 1630 है. वहीं पंचांग के मुताबिक़, शिवाजी का जन्म फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, 1551 शक संवत्सर है.

इससे पहले शिवाजी की जन्मतिथि वैशाख महीने की द्वितीया तिथि, 1549 शक संवत्सर मानी जाती थी, अगर इसके मुताबिक हिसाब लगाएं तो अंग्रेंज़ी (ग्रेगोरियन) कैलेंडर में ये तारीख़ 6 अप्रैल 1627 बैठती है.

स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और विद्वान राजवाड़े ने सबसे पहले शिवाजी की जन्मतिथि पता लगाने की कोशिश की थी.

तिलक ने विशेषत: शिवाजी के जन्म की तिथि से जुड़े अपने विचार रखे थे.

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उन्होंने साल 1900 की 14 अप्रैल को अपनी पत्रिका 'केसरी' में छपे अपने लेख में इस मुद्दे पर विस्तार से जानकारी दी है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि शिवाजी महाराज की जन्मतिथि को तय करने के लिए पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है.

बखार (राजपरिवारों के दस्तावेज़) लेखकों की ओर से दिए गए विरोधाभासी बयानों की वजह से शिवाजी के जन्म को लेकर किसी एक तारीख़ पर आम राय नहीं बन सकी है.

इसके बारे में डीवी आप्टे और एमआर परांजपे ने 'बर्थ डेट ऑफ़ शिवाजी' नामक ग्रंथ में लिखा है. आप्टे और परांजपे की ये पुस्तक 'द महाराष्ट्रा पब्लिशिंग हाऊस लिमिटेड' ने 1927 मे प्रकाशित की है.

तिलक ने अपने लेख में कुछ बिंदु रखे हैं , वे लिखते हैं. -

1 -शिवाजी के दरबारी कवि भूषण ने अपने काव्य शिव-भूषण में शिवाजी के जन्म की तारीख़ का उल्लेख नहीं किया है.

2 - सभासद बखर शिवाजी की मौत के लगभग 15 साल बाद लिखी गई थी. लेकिन इस बखर में भी शिवाजी की जन्मतिथि का कोई ज़िक्र नहीं है. इस बखर में सिर्फ एक जगह ये बताया गया है कि शिवाजी महाराज जब अपनी माँ जीजाबाई के साथ शहाजी महाराज से मिलने बंगलुरु गए थे तब उनकी उम्र 12 साल थी.

3 - मल्हारराव रामराव चिटनिस ने अपनी बखर में लिखा है कि वैशाख के शुक्ल पक्ष की द्वितिया को शिवाजी का जन्म हुआ था. अगर इस तारीख़ को अंग्रेजी कैलेंडर में तब्दील किया जाए तो ये तारीख़ 6 अप्रैल 1627 होनी चाहिए. लेकिन गणितीय गणनाएं दिखाती हैं कि जन्म का दिन ग़लत बताया गया है. चिटनीस ने शिवाजी के मृत्यु के 130 साल बाद लगभग 1810 में अपना बखर लिखा था.

4 - प्रोफेसर फॉरेस्ट की ओर से प्रकाशित रायेरी बखर में एक जगह शिवाजी का जन्म 1548 शक संवत्सर दिया गया है. वहीं, दूसरी जगह 1549 शक संवत्सर दिया गया है. इस बखर में भी एक जगह ये बताया गया है कि शिवाजी की मृत्यु 1602 शक संवत्सर यानी सन 1680 में हुआ था. इस तरह यहां सिर्फ जन्म का साल उपलब्ध है, जन्मतिथि उपलब्ध नहीं है.

5 - धार के 'काव्येतिहास संग्रह' के मुताबिक़, शिवाजी का जन्म 1549 शक संवत में वैशाख के शुक्ल पक्ष की द्वितिया को सोमवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. लेकिन इस दस्तावेज़ में नक्षत्र ग़लत है.

6 - बड़ौदा में छपी शिवा-दिग्विजय किताब में लिखा है कि शिवाजी की जन्मतिथि 1549 शक संवत, वैशाख के शुक्ल पक्ष की द्वितिया है जो गुरुवार का दिन था और उनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. जैसा कि ऊपर (चिटनिस की बखर) लिखा है कि ये विरोधाभासी बयान हैं.

7 - बड़ौदा में ही छपी एक अन्य किताब श्री शिव-प्रताप में शिवाजी की जन्मतिथि 1549 रक्ताक्षी शक संवत दिया गया है. लेकिन रक्ताक्षी संवत 1549 का शक संवत का नाम नहीं था, वह 1546 के शक संवत का नाम था.

8 - संस्कृत कवि पुरुषोत्तम ने भी शिवाजी के जन्म तिथि का कोई जिक्र नहीं किया है.

9 - काव्येतिहास संग्रह जर्नल ने मराठी भाषा में 'साम्राज्याची छोटी बखर' नाम से एक ग्रंथ प्रकाशित किया है जिसमें शिवाजी की जन्मतिथि 1549 शक संवत, क्षय, वैशाख, शुक्ल पक्ष की पंचमी (सोमवार) बताई गई है. इसमें (संवत्सर) साल का नाम ग़लत है क्योंकि वह प्रभव होना चाहिए था.

10 - जर्नल भारतवर्ष शिवाजी से जुड़ा एक अन्य दस्तावेज़ प्रकाशित करता है. इकानवे कलामी बखर (91वें कलम की डायरी). इस दस्तावेज के पंद्रहवे पैराग्राफ़ में जन्मतिथि शके 1559, क्षय, वैशाख, शुक्ल पक्ष की पंचमी, सोमवार के रूप में दी गई है. लेकिन ऐसा लगता है कि 1549 लिखे जाने की जगह ग़लती से 1559 लिख दिया गया है.

11 - भारतवर्ष की ओर से ही प्रकाशित एक अन्य दस्तावेज़ पंत प्रतिनिधि बखर के मुताबिक़, जन्म तिथि शके 1549, वैशाख, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, सोमवार है. ये एक बिलकुल नई तिथि है.

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दस्तावेज़ ने दी नई दिशा

शुरुआत में ये माना जाता था कि शिवाजी महाराज का जन्म शके 1549 (सन 1627) में हुआ था. लेकिन सन 1916 के दौर के एक दस्तावेज ने इस अध्ययन की दिशा बदलकर रख दी.

इस दस्तावेज को शकावली कहा जाता है.

इस दस्तावेज़ के एक अंश के मुताबिक़, तिलक ने शिवाजी की जन्मतिथि शके 1551, शुक्ल संवत्सर, फागुन, कृष्ण पक्ष की तृतीया, शुक्रवार तय की गई. इस तिथि के हिसाब से अंग्रेजी कैलेंडर में ये तारीख़ 19 फरवरी, 1630 हुई.

जेधे शकावली क्या है?

जेधे शकावली 23 पन्नों का एक दस्तावेज है जिसके दोनों ओर लिखाई की गई है. ये दस्तावेज शके 1540 से शके 1619 तक (सन 1618 से 1697) का वृत्तांत बताता है.

ये दस्तावेज़ सन 1907 में भोर रियासत के एक गांव कारी के दाजीसाहेब जेधे ने तिलक को दिया था.

इसके बाद से अब तक जेधे शकावली की कई लोगों ने जांच की है. और इन जांचों में इस दस्तावेज़ में दी गई तारीखों को सही पाया गया है.

ये दस्तावेज शिवाजी महाराज की मौत के 17 साल बाद तक की घटनाओं का वर्णन करता है. और ऐसा लगता है कि दस्तावेज़ रचने वाले व्यक्ति को प्रमाणित दस्तावेज़ों से जानकारी मिली थी.

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एमआर परंजपे और डीवी आप्टे की ओर से दिए गए कुछ उदाहरण -

1 - जेधे शकावली औरंगजेब की जन्मतिथि शके 1540, कार्तिक महीने की पहली तिथि बताती है. इतिहासकार जदुनाथ सरकार के मुताबिक़, ये तारीख़ बिलकुल सही है.

2 - नौशर ख़ान के साथ जंग शके 1597 जेठ के महीने में हुई. ये तारीख़ भी सही है.

3 - श्रीरंगपुरपर शिवाजी महाराज के कब्जा करने की तारीख़ भी सही है.

4 - सूरत में लूट की तिथि भी सूरत में अंग्रेजी व्यापारियों की ओर से दिए गए ब्योरे से मेल खाती है.

5 - जय सिंह के साथ संधि की तिथि भी सही पाई गई.

1627 या 1630?

लेकिन इस शोध के बाद भी एक सवाल बना हुआ है कि शिवाजी महाराज का जन्मवर्ष 1627 था या 1630.

आप्टे और परांजपे ने शिवाजी महाराज की जन्म तारीख 1627 (शके 1549) नहीं थी यह सूचित करने के लिए कुछ घटनाओं का ब्योरा दिया है.

1 - कवि परमानंद- संस्कृत भाषा के कवि परमानंद ने 1662 के अंत तक शिवाजी महाराज के जीवन का वृतांत दिया है. उन्होंने अपने काव्य शिवभारत में शिवाजी महाराज की जन्मतिथि शके 1551, फागुन, कृष्ण पक्ष की तृतीया बताई है. ये तिथि जेधे शकावली से मेल खाती है.

2 - राज्यभिषेक शकावली - शिवाजी महाराज के राज्यभिषेक के मौके पर तैयार की गई इस शकावली में शिवाजी की जन्मतिथि शके 1551, शुक्ल संवत्सर, फागुन, कृष्ण पक्ष की तृतीया, शुक्रवार दी गई है. ये दस्तावेज़ शिवपुर के देशपांडे के पास प्राप्त हुआ था.

3 - फोर्ब्स कलेक्शन - गुजराती दस्तावेजों के संपादक एके फोर्ब्स भी शिवाजी की जन्मवर्ष शके 1551 देते हैं.

4 - जेधे शकावली - ये दस्तावेज साफ साफ शके 1551 देता है.

5 - दास - पंचायतन शकावली - ये शकावली भी शिवाजी की जन्मवर्ष शके 1551 देता है.

6 - ऑर्नेस, हिस्टॉरिकल फ्रेगमेंट्स - ये दस्तावेज़ कहता है कि शिवाजी का जन्म सन 1629 में हुआ था.

7 - स्प्रेंजेल हिस्ट्री - सन 1791 में प्रकाशित इस जर्मन किताब में बताया गया है कि शिवाजी का जन्म सन 1629 में पैदा हुआ था.

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Image caption शिवाजी महाराज की कुंडली

8 - तंजौर में मिला शिलालेख - सन 1803 में पत्थर पर अंकित सूचनाओं के मुताबिक़, शिवाजी का जन्म शके 1551 में हुआ था लेकिन इसमें संवत्सर ग़लत लिखा हुआ है.

जोधपुर में मिली शिवाजी की कुंडली

लेकिन जोधपुर में एक ऐसा दस्तावेज़ मिला है जो कि ये बताता है कि शिवाजी का जन्म 1630 में हुआ था.

पुणे के एक ज्योतिषाचार्य पंडित रघुनाथ शास्त्री को पता चला कि जोधपुर के मोतिलाल व्यास के पास कुछ अमूल्य कुंडलियां हैं. और इसके बाद पता चला कि इन कुंडलियों में शिवाजी की कुंडली भी शामिल है.

इस कुंडली में मारवाडी भाषा में लिखा गया है कि ||संवत 1686 फागूण वदि 3 शुक्रे उ. घटी 30|9 राजा शिवाजी जन्मः||संवत 1686 फाल्गुन वद्य मतलब फाल्गुन वद्य तृतिया शके 1551 (सन 1630)

(संवत कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से 56 साल पहले शुरू होता है. ऐसे में अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख़ निकालने के लिए हमें हर वर्ष में 56 साल घटाने पड़ते हैं.)

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सरकारी समिति

महाराष्ट्र सरकार ने साल 1966 में एक समिति का गठन करके शिवाजी महाराज की जन्म की ठीक तारीख़ तय करने को कहा.

इस समिति में महामहोपाध्याय दत्तो वामन पोतदार, एनआर फाटक, एजी पवार, जीएच खरे, वीसी बेंद्रे, बीएम पुरुंदर और मोरेश्वर दीक्षित शामिल थे.

एजी पवार समिति की पहली बैठक में शामिल नहीं हो सके. इसके बाद पोतदार, खरे, बेंद्रे, पुरंदरे, और दीक्षित इस बात पर सहमत हुए कि शिवाजी की जन्मतिथि फागुन वद्य तृतीया शके 1551 (19 फरवरी 1630) है.

लेकिन एनआर फाटक ने कहा कि वैशाख शुक्ल द्वितिया शके 1549 (6 अप्रैल 1927) सही तारीख़ है.

सभी सदस्यों ने समिति के समक्ष अपने बयान प्रस्तुत किए और फाटक के बयान का खंडन करने वाले अपने बयान भी प्रस्तुत किए.

एजी पवार दूसरी मीटिंग के दौरान मौजूद थे. उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की जन्मतिथि को लेकर एक तिथि तय करने से जुड़े दस्तावेज़ मौजूद नहीं हैं.

ऐसे में पुरानी तारीख़ ही आगे चलाई जाएगी. इस मीटिंग में किसी तरह की सहमति नहीं बनी. ऐसे में तिथि तय करने की ज़िम्मेदारी सरकार पर सौंपी गई.

आख़िरकार, "ये तय किया गया कि जब तक कोई मजबूत सबूत नहीं मिलता है. या इतिहासकारों के बीच सहमति नहीं बन जाती है तब तक वैशाख, शुद्ध द्वितीया शके 1549 पर ये शिवाजी की जयंती मनाई जाएगी."

गजानन भास्कर मेहेंदले के दस्तावेज़

गजानन भास्कर मेहेंदले ने अपनी किताब श्री राजा शिवछत्रपति में 16वें अपेंडिक्स में शिवाजी की जन्मतिथि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की है.

उन्होंने कई दस्तावेज़ों पर बात की है. इनमें इकानवे कलमी बखर, चिटनिस बखर, पंतप्रतिनिधि बखर, सातारा के छत्रपति की वंशावली, शिवदिग्विजय बखर, नागपुर के भोंसले की बखर, शेडगांवकर बखर, प्रभानवल्ली शकावली, धडफले लिस्ट, न्या. पंडितराव बखर, शिवाजीप्रताप बखर, जेधे शकावली, राज्यभिषेक शकावली, फोर्ब्स शकावली, शिवभारत, तंजावर शिलालेख, घोडेगावकर शकावली और चित्रे शकावली शामिल है.

इसके साथ ही कॉस्मे द ग्वार्द, रॉबर्ट आर्म, और स्प्रेंजेल का ज़िक्र है.

प्रमोद नवलकर को अनुरोध

मेहेंदले ने इस अपेंडिक्स के अंत में साल 1996 के बाद की घटनाओं का ज़िक्र किया है.

साल 1996 में महाराष्ट्र के तत्कालीन संस्कृति मंत्री प्रमोद नवलकर ने जन्मतिथि पर चर्चा करने के लिए भारत इतिहास संशोधन मंडल के वीडी सरलष्कर, भारतीय इतिहास संकलन समिति के महाराष्ट्र सचिव सीएन परचुरे और इतिहासकार निनाद बेडेकर का बुलाया.

इन लोगों ने नवलकर से अनुरोध किया कि सरकार को फागुन कृष्ण 3 शके 1551 को शिवाजी की जन्मतिथि तय करने के लिए एक नई समिति बनानी चाहिए.

प्रमोद नवलकर ने कहा कि इस मसले पर पहले ही एक समिति बनाई जा चुकी है. और अब सरकार ने तय किया है कि शिवाजी महाराज की जन्म तिथि फागुन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाएगी. जो लोग इस बारे में कुछ कहना चाहते हैं उन्हें अगले एक महीने के अंदर सरकार के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने चाहिए. इन विचारों के आधार पर सरकार एक निर्णय लेकर अख़बारों में सूचना देगी.

इस निवेदन पर दस विद्वानों ने अपने विचार रखे. इन सभी ने फागुन कृष्ण पक्ष तृतीय तिथि शके 1551 को लेकर अपनी सहमति दी.

मेहेंदले की किताब श्री राजा शिव छत्रपति में 647, 648 और 649 में ये सारी जानकारी दी गई है.

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19 फरवरी तारीख़ कैसे तय हुई?

महाराष्ट्र की पूर्व विधायक रेखाताई खेड़ेकर ने बीबीसी को बताया है कि इस तारीख़ को लेकर निर्णय कैसे लिया गया.

खेड़ेकर ने इससे पहले बीजेपी-शिवसेना सरकार में इस मुद्दे पर काम किया है.

वे कहती हैं, "मैंने सरकार के सामने पिछली समिति की रिपोर्ट और कुछ अन्य सबूतों के साथ प्रस्ताव दिया. इसके बाद विधानसभा में 19 फरवरी 1630 को लेकर प्रस्ताव पास किया गया. इस निर्णय को अमल में लाने के लिए कोशिशें शुरू कीं. फिर देशमुख सरकार की कैबिनेट ने उसको मंजूरी दी और वो निर्णय अमल मे आया."

इतिहासकार जयसिंह पवार ने बीबीसी को बताया है कि शिवाजी का जन्म वर्ष 1630 तय करना एक तार्किक कदम है इसलिए हमनें इसी दिशा में काम किया.

'लेकिन नए सबूत मिल सकते हैं'

वहीं, इतिहासकार इंद्रजीत सावंत कहते हैं, "जब तक कोई नया सबूत सामने नहीं आता है तब तक हम सब्र रखकर पुरानी तारीख़ के साथ बने रह सकते थे. ऐसा नहीं है कि शिवाजी की जन्मतिथि को लेकर कभी भी कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आएगा."

एक अन्य इतिहासकार श्रीमंत कोकाटे कहते हैं, "महाराष्ट्र विधानसभा के फैसले के मुताबिक़, शिवाजी की जन्म तिथि ग्रेगोरियन (अंग्रेज़ी) कैलेंडर के हिसाब से मनाई जानी चाहिए. आज हर काम इसी कैलेंडर के हिसाब से होता है. ऐसे में किसी एक तिथि की जगह शिवाजी की जयंती अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से मनाई जानी चाहिए."

लगभग 100 सालों के शोध के बावजूद आज भी शिवाजी की जन्मतिथि को लेकर असहमतियां बरकरार हैं. आज कुछ जगहों पर शिवाजी जयंती पुरानी तिथि के अनुसार मनाई जाती है. वहीं, सरकार ने नई तारीख़ पर जयंती मनाने का फ़ैसला किया है.

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