मध्य प्रदेश: नसबंदी से जुड़े आदेश पर पलटी कमलनाथ सरकार

  • 21 फरवरी 2020
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ

मध्य प्रदेश सरकार ने नसबंदी के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने में नाकाम स्वास्थ्य कर्मियों की सैलेरी रोकने का आदेश वापस ले लिया है.

भोपाल में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार शुरैह नियाज़ी ने बताया है कि 'अब टारगेट पूरा नहीं करने पर ना तो किसी की नौकरी जाएगी, और ना ही किसी की सैलेरी वापस ली जाएगी.'

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक छवि भारद्वाज की ओर से 11 फ़रवरी को एक नोटिफ़िकेशन जारी किया गया था.

नोटिफ़िकेशन में मध्य प्रदेश में काम करने वाले पुरुष मल्टी परपज़ हेल्थ वर्कर्स के संदर्भ में ये निर्देश दिए गए थे:

  1. सभी कर्मियों द्वारा नसबंदी के इच्छुक कम से कम 5 से 10 पुरुषों को सेवा केंद्रों पर इकट्ठा किया जाए.
  2. ऐसे कर्मियों की पहचान की जाए, जो 2019-20 में एक भी पात्र पुरुष को नसबंदी केंद्र पर नहीं लाए.
  3. इनका ज़ीरो वर्क आउटपुट देखते हुए 'नो वर्क नो पे' (No Work No Pay) के आधार पर इनकी सैलेरी तब तक रोकी जाए, जब तक ये कम से कम एक पात्र पुरुष को केंद्र पर न लाएं.
  4. मार्च 2020 तक एक भी पुरुष को नसबंदी केंद्र पर न लाने वाले कर्मियों को रिटायर कर दिया जाए.
  5. परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुष नसबंदी की समीक्षा की जाए और पुरुष भागीदारी को बढ़ावा देते हुए ऐक्शन लिया जाए.
इमेज कॉपीरइट मध्य प्रदेश सरकार
Image caption 11 फरवरी को छवि भारद्वाज द्वारा जारी किया गया आदेश

दरअसल मध्य प्रदेश की नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ़ 0.5% पुरुषों ने नसबंदी कराई.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2019-20 में मध्य प्रदेश में नसबंदी कराने वाले पुरुषों की संख्या 3,397 रही, जबकि इसी दौरान 3.34 लाख महिलाओं ने नसबंदी कराई.

नसबंदी कार्यक्रम में पुरुषों की कम संख्या के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग उन कर्मियों पर ऐक्शन लेना चाहता था, जो पुरुषों को नसबंदी के लिए प्रेरित या जागरूक नहीं कर पाए.

21 फ़रवरी को यह मामला मीडिया में उछला. इसने तब ज़्यादा तूल पकड़ लिया, जब बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर बात की.

संबित ने कहा, "कमलनाथ जी ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक फ़रमान जारी किया है कि आप नसबंदी के लिए लोगों को चिकित्सालय में लेकर आइए वरना आपकी नौकरी चली जाएगी. एक तरह से स्वास्थ्य कर्मियों को धमकी दी है. इससे इमरजेंसी का वह दिन याद आता है, जो इंदिरा गांधी ने देश पर थोपा था. इमरजेंसी के दौर में हज़ारों लोगों की जबरन नसबंदी की गई थी. आज कांग्रेस हिटलर और इमरजेंसी की बात करती है, लेकिन कांग्रेस शासित राज्यों में जबरन नसबंदी करके इमरजेंसी का माहौल क़ायम किया जा रहा है."

संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ मिनटों बाद मध्य प्रदेश के क़ानून मंत्री पीसी शर्मा ने कहा, "यह रूटीन ऑर्डर है. ऐसे आदेश बीजेपी के शासनकाल में भी जारी किए गए थे. अब लोगों में जागरूकता फैल रही है कि छोटा परिवार सुखी परिवार होता है. किसी भी कर्मचारी को दबाव में नहीं लाया जाएगा."

पीसी शर्मा के बयान के दो घंटे बाद ही मध्य प्रदेश सरकार की ओर से यह आदेश वापस ले लिया गया. सरकार की ओर से मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावत ने कहा, "राज्य सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है."

आदेश वापस लेने के अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने आदेश जारी करने वाली छवि भारद्वाज को भी हटा दिया. IAS अधिकारी छवि भारद्वाज राज्य सचिवालय में 'ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' के तौर पर काम कर रही थीं.

इमेज कॉपीरइट तुलसी सिलावत, स्वास्थ्य मंत्री, मध्य प्रदेश सरकार
Image caption तुलसी सिलावत के ट्वीट में लगी फोटो, जो बाद में डिलीट कर दी गई.

इस सिलसिले में तुलसी सिलावत ने अपने ट्वीट में लिखा कि इस आदेश को मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर वापस लिया गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार