'करतारपुर कॉरिडोर किसी को भी 'प्रशिक्षित आतकंवादी' बना सकता है'- प्रेस रिव्यू

  • 22 फरवरी 2020
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पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता का कहना है कि करतारक कॉरिडोर किसी को भी 'प्रशिक्षित आतंकवादी' बना सकता है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के अनुसार डीजीपी ने सिख श्रद्धालुओं को बिना वीज़ा के प्रवेश दिए जाने को 'आतंकवाद की दृष्टि से बड़ी चुनौती' बताया.

उन्होंने कहा, "अगर आप सुबह किसी सामान्य व्यक्ति को करतारपुर भेजते हैं तो ऐसा मुमकिन है कि शाम को वो प्रशिक्षित आतंकवादी बनकर वापस लौटे. आप वहां छह घंटे तक रहते हैं. इतने वक़्त में आपको किसी फ़ायरिंग रेंज में ले जाया जा सकता है, आपको आईडी बनाना सिखाया जा सकता है."

डीजीपी गुप्ता ने कहा कि अगर करतारपुर कॉरिडोर इतने वर्षों से नहीं खोला गया था तो उसकी ठोस वजहें थीं. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में बसे कुछ असामाजिक तत्व श्रद्धालुओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं.

करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तानी पंजाब के करतारपुर में दरबार साहिब को भारतीय पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ता है.

भारतीय श्रद्धालु बिना वीज़ा के सरहद के उस पार जाकर दरबार साहिब गुरुद्वारा जा सकते हैं. इसके लिए उन्हें केवल एक परमिट लेना होता है. इसे पिछले साल नौ नवंबर को खोला गया था.

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शारीरिक परीक्षण के नाम पर महिलाओं से अभद्रता

गुजरात के सूरत स्थित एक अस्पताल में 10 महिलाओं को नौकरी के लिए 'शारीरिक परीक्षण' के नाम पर एक कमरे में कथित तौर पर बिना कपड़ों के खड़े रखा गया.

जनसत्ता में प्रकाशित ख़बर के अनुसार यह घटना 20 फ़रवरी की है. मामला सामने आने पर अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं. जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है जो 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

कर्मचारी संघ का आरोप है कि सूरत नगर निगम के एक अस्पताल में 10 महिला प्रशिक्षुओं को गर्भावस्था जांच के नाम पर एक कमरे में बिना कपड़ों के खड़े रहने पर मजबूर किया गया."

वहीं, अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नौकरी के लिए कर्मचारियों को ख़ुद को स्वस्थ साबित करने के लिए अनिवार्य शारीरिक परीक्षण से गुजरना होता है.

कर्मचारी संघ का कहना है कि वो अनिवार्य जांच के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन इसके लिए जो तरीका अपनाया गया वो अमानवीय और अपमानजनक था.

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'शाहीन बाग़ नाइट' आयोजन पर जुर्माना

हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों पर इसलिए पांच-पांच हज़ार रुपये का जुर्माना लगा दिया गया है क्योंकि उन्होंने नागरिकता क़ानून के विरोध में एक कार्यक्रम आयोजित किया था.

नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ इन छात्रों ने नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में कैंपस में रात नौ बजे के बाद 'शाहीन बाग़ नाइट' का आयोजन किया था.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय ने छात्रों पर कैंपस की दीवारें खराब करने का आरोप भी लगाया है.

प्रशासन ने इस सम्बन्ध में एक सर्कुलर जारी करके छात्रों को कड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि भविष्य में ऐसा कोई भी कार्यक्रम आयोजित करने या उसमें हिस्सा लेने पर उनके ख़िलाफ़ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.

वहीं, छात्रसंघ ने विश्वविद्यालय के इस कदम की निंदा की है. छात्रसंघ ने एक बयान जारी कर रहा है कि ये सर्कुलर मनमाना है और वो इसका पालन नहीं करेंगे.

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'मुस्लिम मुक्ति' बैनर लिए महिला गिरफ़्तार

बेंगलुरु में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने वाली अमूल्या लियोना के विरोध में एक प्रदर्शन आयोजित किया गया और यह प्रदर्शन ही विवादों में आ गया.

प्रदर्शन में एक महिला अपने हाथों में 'दलित, कश्मीर और मुस्लिम मुक्ति' लिखा बैनर लिए खड़ी थी. पुलिस ने महिला को गिरफ़्तार कर लिया और उसे 14 दिन न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

इस महिला का नाम अरुद्रा है और उन पर अलग-अलग समुदायों में दुश्मनी फैलाने का मामला दर्ज किया गया है.यह विरोध प्रदर्शन एक हिंदूवादी संगठन ने आयोजित किया था.

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