डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा: क्या सोच रहे हैं कश्मीरी

  • 24 फरवरी 2020
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Image caption अहमदाबाद में चरख़ा चलाते ट्रंप

जम्मू-कश्मीर के लोगों ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर प्रतिक्रियाएं देते हुए कहा है कि ट्रंप को कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत करवानी चाहिए.

हालांकि कई लोगों का ये भी कहना था कि ऐसा होना संभव नहीं दिख रहा है. जब भी अमरीकी राष्ट्रपति या कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेता भारत आता है, कश्मीर के लोगों में डर और उम्मीदें दोनों बढ़ जाती हैं.

डर इस बात का होता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए, और उम्मीद ये होती है कि कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा होगी, जिससे माहौल सकारात्मक बन सकेगा.

बीबीसी ने राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा पर कई कश्मीरी लोगों से बात की.

बीबीसी से बात करते हुए एक छात्रा मसर्रत जान ने कहा, "हम चाहते हैं कि वो मोदी जी को कश्मीर के मुद्दे के समाधान के लिए मनाएं. भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शुरू करने के लिए वो मोदी जी को मनाएं."

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Image caption कश्मीर में सर्दियों की छुट्टियों के बाद स्कूल खुल रहे हैं

वहीं श्रीनगर के नागरिक और शिक्षक मुज़फ़्फ़र ख़ान ने कहा, "इस समय हम भावनात्मक रूप से परेशान हैं. सात महीनों के बाद हमारे बच्चे स्कूल गए हैं. ये कोई मज़ाक़ नहीं है. हर मां-बाप को ये डर है कि ये हालात कब तक रहेंगे. कश्मीर के लोगों के मन में आशंकाएं हैं कि हालात सामान्य रहेंगे या नहीं.."

वो कहते हैं, "ट्रंप साहब आए हैं, उम्मीद है मोदी जी कश्मीर के लोगों की आशंकाओं पर ग़ौर करेंगे. सीएए से जुड़ी जो आशंकाएं हैं उन्हें भी वो दूर करेंगे."

वहीं फ़िल्म निर्माता वसीम नबी ने कहा कि कश्मीर के लोग अंतरराष्ट्रीय दख़ल का इंतज़ार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "कश्मीरी के तौर पर हम ये उम्मीद करते हैं कि वो ऐसा कोई फ़ैसला लें जिससे हमें राहत मिले. क्योंकि हम कश्मीर के लोग इस इंतज़ार में हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कोई ऐसा फ़ैसला ले जिससे हम लोगों को कुछ फ़ायदा मिले."

वहीं स्थानीय पत्रकार शम्स इरफ़ान कहते हैं कि ट्रंप की ये यात्रा आधिकारिक से ज़्यादा दोस्ताना या राजनीतिक यात्रा ज़्यादा लग रही है.

उन्होंने कहा, "जिस तरह की ये यात्रा है, ये आधिकारिक यात्रा कम लग रही है राजनीतिक सहयोग यात्रा ज़्यादा लग रही है. यहां से मोदी अमरीका गए और ट्रंप को राष्ट्रपति के तौर पर समर्थन किया. अब राष्ट्रपति ने यहां आकर वो अहसान उतारा है. मुझे नहीं लगता कि इस तरह के माहौल में कश्मीर पर ऐसी चर्चा हो सकेगी जैसी कश्मीरी चाहते हैं."

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Image caption ट्रंप ताजमहल देखने आगरा भी पहुंचे

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वो कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता में मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं. वहीं वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक अनुराधा भसीन का मानना है कि उन्हें नहीं लगता कि ट्रंप इस बारे में कोई बात करेंगे.

भसीन कहती हैं, "इस वक़्त लगता नहीं है कि ऐसा कोई सिलसिला बन रहा है, हालांकि ट्रंप ने कई बार बात की है कि वो कश्मीर में मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं, अगर दोनों देश भारत और पाकिस्तान तैयार होते हैं. लेकिन ऐसा कुछ होता लगता नहीं है. क्योंकि इस समय अमरीका और भारत, दोनों ही देशों का व्यापार और हथियार समझौतों की ओर ज़्यादा रुझान है. जो थोड़ा बहुत तनाव दोनों देशों के बीच नज़र आता है वो कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति ज़्यादा लगता है."

कांग्रेस के स्थानीय नेता इरफ़ान नक़ीब को उम्मीद है कि ट्रंप कश्मीर में शांति के लिए दोनों देशों के बीच शांति वार्ता शुरू करेंगे.

नक़ीब कहते हैं, "हमें यक़ीन है कि वो शांति प्रक्रिया शुरू करेंगे. ख़ासकर जम्मू-कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच. कश्मीर में शांति के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों के बीच बात होनी ज़रूरी है."

जब भी कोई अमरीकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आते हैं, कश्मीर के लोगों की आशाएं और अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं.

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Image caption ट्रंप और मोदी

कश्मीर के लोगों को लगता है कि अमरीकी राष्ट्रपति भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

इस बार राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा को लेकर कुछ डर और आशंका का माहौल भी था. क्योंकि साल 2001 में जब अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए थे तब उनके दौरे के समय अल्पसंख्यकों पर हमला हुआ था और तीस से ज़्यादा लोगों का क़त्ल कर दिया गया था.

इस बार अभी तक किसी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है, कश्मीर में जहां डर और आशंका है वहीं ये उम्मीद भी है कि ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं.

भारत ने बीते साल अगस्त में कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था. कश्मीर में बेहद सख़्त पाबंदियां लगाई गईं थीं जिनमें अब कुछ ढील दे दी गई हैं. लेकिन अब भी कश्मीर के बड़े नेता और सामाजिक कार्यकर्ता जेलों में ही बंद हैं.

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