लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने का मतलब देशद्रोह नहीं होता है: सुप्रीम कोर्ट जज

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपक गुप्ता

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपक गुप्ता

मंगलवार सुबह तक़रीबन सभी समाचार-पत्रों ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले भारत दौरे और दिल्ली में CAA पर हुई हिंसा को प्रमुखता से छापा. द हिंदू से लेकर हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस और द टाइम्स ऑफ इंडिया समेत हिंदी अखबारों ने भी इन्हीं ख़बरों को तरजीह दी.

विरोध दर्ज कराना देशद्रोह नहीं है: सुप्रीम कोर्ट जज

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा है कि विरोध दर्ज कराने का मतलब देशद्रोह नहीं होता है. द हिंदू में छपे आर्टिकल के मुताबिक जस्टिस गुप्ता ने कहा, "किसी पार्टी को चुनाव में 51% वोट मिलने का यह अर्थ नहीं है कि बाकी 49% लोगों को ज़बान पर ताला लगाना पड़े."

जस्टिस गुप्ता ने ये बातें सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन द्वारा 'लोकतंत्र और मतभेद' पर चर्चा के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं.

उन्होंने कहा, "कोई समाज तभी बेहतर हो सकता है, जब इसके नियमों को सवालों के घेरे में खड़ा किया जाए. मतभेदों का स्वागत किया जाना चाहिए. संवाद से ही हम इस देश को बेहतर बना सकते हैं. अगर कोई विरोध हिंसक नहीं होता है, तो सरकार को इसे दबाने का कोई हक नहीं है."

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इलाहाबाद हाईकोर्ट

'एएमयू छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान हो'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को PAC के उन पुलिसकर्मियों की पहचान करने को कहा है, जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों पर लाठीचार्ज किया था.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने सरकार से उन पुलिसवालों की पहचान करने को कहा है, जो CCTV कैमरों में बाइक वगैरह को नुकसान पहुंचाते और बिना किसी वजह से छात्रों पर लाठीचार्ज करते दिख रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने सरकार से 6 छात्रों को मुआवजा देने की बात भी कही है. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस समित गोपाल की डिविज़न बेंच ने यह फैसला मानवाधिकार आयोग की सिफ़ारिश पर सुनाया है.

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भारत दौरे पर आए डॉनल्ड ट्रंप साबरमती आश्रम में

ट्रंप के लिए आयोजित डिनर में नहीं जाएंगे कांग्रेस नेता

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भारतीय राष्ट्रपति द्वारा आयोजित डिनर में कांग्रेस का कोई भी नेता शिरकत नहीं करेगा.

द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेसी नेता पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को आयोजन में निमंत्रण न मिलने से नाराज़ हैं.

राष्ट्रपति की ओर से आयोजित डिनर में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ग़ुलाम नबी आज़ाद और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को न्योता दिया गया है.

यह डिनर ट्रंप के दौरे का इकलौता हिस्सा है, जब विपक्ष के नेताओं को अमरीकी राष्ट्रपति से बातचीत का मौका मिलेगा.

'बंद कमरे में होने वाले अपराधों में SC-ST ऐक्ट नहीं'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि एससी-एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले अपराध लोगों की निगाह के सामने होने चाहिए.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस आरके गौतम ने कहा, "यदि कथित तौर पर किया गया अपराध बंद कमरे में हुआ है, जहां केस का कोई गवाह नहीं है. वहां एससी-एसटी ऐक्ट लागू नहीं किया जा सकता."

जस्टिस गौतम ने यह बात एक ऐसे केस की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें आरोप लगाने वाले ने बंद चैंबर के अंदर अपने साथ अपराध किए जाने का आरोप लगाया.

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जयसिद्धेश्वर शिवाचार्य की सदस्यता रद्द हो सकती है

'फर्ज़ी जाति प्रमाण-पत्र की वजह से जा सकती है बीजेपी सांसद की सदस्यता'

महाराष्ट्र की डिस्ट्रिक्ट कास्ट वैलिडिटी कमिटी ने बीजेपी सांसद डॉ. जयसिद्धेश्वर शिवाचार्य महास्वामी का जाति प्रमाण पत्र फर्ज़ी घोषित कर दिया है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रमोद गायकवाड़ ने शिकायत की.

प्रमोद ने शिकायत में कहा कि जयसिद्धेश्वर लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उन्होंने शेड्यूल कास्ट के लिए रिज़र्व सीट से चुनाव लड़ा. इस शिकायत के बाद हुई जांच में जयसिद्धेश्वर का जाति प्रमाण पत्र गलत पाया गया.

जयसिद्धेश्वर ने महाराष्ट्र की सोलापुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था, लेकिन अब उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है.

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अयोध्या केस पर फैसला आने से पहले सुरक्षा के ऐसे इंतज़ाम किए गए थे.

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने स्वीकार की अयोध्या के पास की ज़मीन

उत्तर प्रदेश के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या के पास दी गई पांच एकड़ की ज़मीन स्वीकार कर ली है.

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुन्नी वक्फ बोर्ड की मीटिंग में यह भी तय हुआ कि एक ट्रस्ट बनाकर ज़मीन पर मस्ज़िद, अस्पताल और पुस्तकालय जैसी चीज़ें भी बनाई जाएंगी.

सुन्नी वक्फ बोर्ड को यह ज़मीन अयोध्या फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दी गई है.

बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी ने कहा कि ज़मीन पर बनाई गई मस्ज़िद का नाम बाबरी रखा जाएगा या नहीं, इसका फैसला ट्रस्ट करेगा.

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