दिल्ली में हिंसाः केजरीवाल ट्वीट करने से ज़्यादा क्या कर सकते थे?

  • 26 फरवरी 2020
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Image caption केजरीवाल ने राजघाट पर प्रार्थना सभा की

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हिंसा में मारे गए पुलिसकर्मी रतन लाल के परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवज़ा देने का ऐलान किया. उन्होंने विधानसभा को संबोधित करते हुए ये भी कहा कि दल्ली के हिंदू और मुसलमान लड़ना नहीं चाहते हैं.

दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 24 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और कई घायल हैं.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हालात रविवार देर शाम से ही तनावपूर्ण होने लगे थे. जाफ़राबाद और मौजपुर में टकराव की स्थिति बन गई थी.

कभी आम आदमी पार्टी में रहे और इन दिनों बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा 'पुलिस की भी न सुनने' की धमकी रविवार शाम को ही दे चुके थे.

शाम को सीएए समर्थकों और विरोधियों के बीच पत्थरबाज़ी हुई थी और कई मौजपुर चौराहे पर लोगों को धार्मिक आधार पर रोककर हिंसा की ख़बरें आने लगीं थीं.

केजरीवाल का पहला ट्वीट

लेकिन दिल्ली के हालात पर अरविंद केजरीवाल ने पहला ट्वीट सोमवार दोपहर साढ़े तीन बजे किया.

दिल्ली सुलग रही थी, कई इलाक़ों में आग धधक रही थी लकिन भारी बहुमत से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल सिर्फ़ ट्वीट कर रहे थे.

अपने पहले ट्वीट में अरविंद केजरीवाल ने कहा, "दिल्ली के कुछ हिंसों से शांति व्यवस्था बिगड़ने की परेशान करने वाली ख़बरें आ रही हैं. मैं लेफ्टिनेंट गवर्नर और गृहमंत्री से क़ानून व्यवस्था बनाए रखने और शांति बहाल करने की अपील करता हूं."

दिल्ली पुलिस हिंसा-आगज़नी के दौरान आख़िर कर क्या रही थी?

इसके बाद केजरीवाल ने एलजी अनिल बैजल से बात की और शांति बनाए रखने की विनती करते हुए एक और ट्वीट किया.

केजरीवाल ने कहा, "कृपया हिंसा त्याग दीजिए। इस से किसी का फ़ायदा नहीं. शांति से ही सभी समस्याओं का हल निकलेगा."

आम आदमी पार्टी के अन्य नेता भी ट्विटर पर शांति बनाए रखने की अपील करते रहे और केजरीवाल उन्हें रिट्वीट करते रहे.

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दिल्ली की हिंसा में जिसका सब कुछ जलकर ख़ाक हो गया

केजरीवाल का बयान

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने भी ट्वीट करके उस डर का इज़हार किया जो उन्होंने तीन दशकों में दिल्ली में पहली बार महसूस किया था.

इसके बाद मंगलवार सुबह नौ बजे एक बार फिर केजरीवाल ने ट्वीट करके दिल्ली के हालात पर चिंता ज़ाहिर की.

इस दौरान दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा फैलने की ख़बरें आने लगीं थीं.

मंगलवार दोपहर क़रीब बारह बजे केजरीवाल ने एक प्रेसवार्ता की और बताया कि वो दिल्ली के हालात पर कितने चिंतित है. उन्होंने फिर दिल्ली के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.

केजरीवाल ने कहा, "जिसके जो भी मसले हैं, सभी का समाधान बैठकर निकाला जाएगा, हिंसा से किसी का समाधान नहीं निकलेगा. मेरी सबसे अपील है शांत हो जाए."

उन्होंने हिंसा में मारे गए लोगों का ज़िक्र करते हुए कहा, "जो भी लोग मारे गए हैं वो भी हमारे ही लोग हैं, हिंसा बढ़ती है तो किसी का नंबर भी आ सकता है."

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CAA को लेकर दिल्ली के गोकुलपुरी में पथराव की ख़बरें

अमित शाह के साथ मुलाकात

इसके थोड़ी देर बाद अरविंद केजरीवाल ने एलजी अनिल बैजल के साथ गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की.

मुलाक़ात के बाद उन्होंने कहा कि दिल्ली में पुलिस सुरक्षा बढ़ाई जा रही है. गृहमंत्री से मिलने के बाद केजरीवाल पार्टी नेताओं के साथ राजघाट गए और दिल्ली में शांति के लिए प्रार्थना की.

लेकिन इस सब से न हिंसा रुकी और न ही लोगों को राहत मिली. सवाल उठ रहा है कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर और भी बहुत कुछ था जो केजरीवाल कर सकते थे.

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी कहते हैं, "दिल्ली के मुख्यमंत्री की पहली जिम्मेदारी बनती है कि वहां पहुंचे जहां ऐसे हालात बन रहे हैं. उन्हें प्रभावशाली लोगों के दल बनाकर लोगों से मिलना चाहिए और हिंसा रुकवानी चाहिए."

प्रमोद जोशी कहते हैं, "दिल्ली के मुख्यमंत्री होने के नाते केजरीवाल ख़ुद भी प्रभावशाली हैं, उनके मंत्रीमंडल के सदस्य हैं, विधायक हैं, पूरा एक संगठन हैं, जिसके ज़रिए जनसंपर्क किया जा सकता है और लोगों को समझाया जा सकता है."

जोशी कहते हैं, "ये सिर्फ़ क़ानून व्यवस्था का ही मसला नहीं है बल्कि लोगों में भ्रम की स्थिति भी होती है और जनता के साथ संपर्क बनाकर उसे दूर करने का प्रयास किया जा सकता है."

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Image caption दिल्ली में तैनात पुलिस

आम आदमी पार्टी का पक्ष

वहीं आम आदमी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह का कहना है कि आम आदमी पार्टी के विधायक और नेता ज़मीन पर लोगों से लगातार मिल रहे हैं और शांति बहाल करने की अपील कर रहे हैं.

संजय सिंह राजधानी में बिगड़े हालात के लिए सीधे तौर पर गृहमंत्री अमित शाह को ज़िम्मेदार बताते हुए कहते हैं, "जब हालात बिगड़ रहे थे उसी वक़्त गृहमंत्री को सेना को बुलाने का, कर्फ्यू लगाने का प्रयास करना चाहिए था. समय पर ये प्रयास नहीं किए गए जिसकी वजह से हालात ख़राब होते गए."

संजय सिंह कहते हैं, "हिंसा फैलाने वाले लोग किसका संरक्षण पा रहे हैं और क्यों इन्हें नहीं रोका जा रहा है ये हैरान करने वाला है. अमित शाह जब से देश के गृहमंत्री बने हैं, दिल्ली की क़ानून व्यवस्था लगातार ख़राब हो रही है."

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दिल्ली की क़ानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी और दिल्ली पुलिस का नियंत्रण केंद्रीय गृहमंत्रालय के हाथ में है. जब भी दिल्ली में क़ानून व्यवस्था का कोई संकट पैदा होता है, केजरीवाल गृह मंत्रालय पर सवाल उठाकर, दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार को सौंपने की मांग करते हैं.

लेकिन क्या वो सिर्फ़ ये कहकर अपनी ज़िम्मेदारी से बच सकते हैं? इस सवाल पर प्रमोद जोशी कहते हैं, "दिल्ली सरकार के अधीन पुलिस नहीं है, ऐसे में बहुत से काम ऐसे हैं जो दिल्ली सरकार के लिए करना संभव नहीं है. लेकिन केजरीवाल के पास प्रशासनिक मशीनरी है, पार्टी कार्यकर्ता हैं. केजरीवाल बहुत लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता भी हैं, ट्वीट करने के अलावा और भी बहुत कुछ है जो वो एक मुख्यमंत्री के तौर पर कर सकते हैं."

जोशी कहते हैं, "केजरीवाल को लोगों के बीच जाना चाहिए. ऐसे ही मौके होते हैं जब आपको सीधे मैदान में उतरना होता है. जनता के बीच जाना होता है. सद्भावना व्यक्त करनी होती है. लोगों को समझाना होता है. ये दिन रात एक करके करने के काम है."

"पुलिस का पास न होना सिर्फ़ एक बहाने जैसा ही लगता है क्योंकि उन्होंने वो सब भी नहीं किया जो वो एक मुख्यमंत्री के तौर पर कर सकते थे."

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वहीं इसी तरह के आरोपों पर संजय सिंह कहते हैं, "हमारे विधायक रात में ही एलजी के घर पहुंचे थे. लेकिन वो नहीं मिले. हमारे प्रतिनिधी पुलिस कमिश्नर से भी मिलने पहुंचे. सुबह होते ही अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के सभी नेताओं को जनसंपर्क करने और पीस मार्च निकालने के लिए कहा था."

संजय कहते हैं, "हमने दिल्ली को शांत करने की हर संभव कोशिश की है. एक मुख्यमंत्री जिसके पास पुलिस बल नहीं है, उसने हर वो संभव कोशिश की है जो वो कर सकता है."

आम आदमी पार्टी ने इसी महीने भारी बहुमत से दोबारा दिल्ली की सत्ता हासिल की है. संजय सिंह कहते हैं, "दिल्ली को अशांत करने की बहुत बड़ी साज़िश की गई है. केंद्रीय सत्ता इन बिगड़े हुए हालातों के लिए ज़िम्मेदार है. अमित शाह नहीं चाहते कि दिल्ली में शांति हो."

राजधानी दिल्ली में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ दो महीने से अधिक से प्रदर्शन चल रहे हैं. इस दौरान अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इन प्रदर्शनों से दूरी बनाए रखी है.

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प्रमोद जोशी कहते हैं, "जब से ये आंदोलन चल रहा है, आम आदमी पार्टी को, केजरीवाल को पहले से इन इलाक़ों में संपर्क को बनाकर रखना चाहिए था. ऐसा लगता है कि किसी राजनीतिक कारण की वजह से उन्होंने इन इलाक़ों से सोची समझी दूरी बनाए रखी."

वहीं कई पत्रकारों ने भी अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, "केजरीवाल जी कुछ बोलिए, आप दिल्ली के सीएम हैं. ये चालाकी नहीं है बल्कि कायरता है. जो लोग पीड़ित हैं उनका समर्थन करो."

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने केजरीवाल से कहा कि ट्वीट करने से ज़्यादा करो. केजरीवाल ने इस ट्वीट के बाद स्वरा भास्कर को ट्विटर पर अनफॉलो कर दिया.

राजधानी दिल्ली में लगातार तीसरे दिन हिंसा हुई. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाक़ों में घरों और दुकानों में आग लगा दी गई. धर्मस्थलों को निशाना बनाया गया.

20 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और डेढ़ सौ से अधिक घायल हैं जिनमें कई की हालत गंभीर है.

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