आज़म खान और शाहीन बाग़ समेत आज के दिन की बड़ी ख़बरें

  • 26 फरवरी 2020
अब्दुल्लाह आजम़ स्वार-टांडा सीट से विधायक हैं इमेज कॉपीरइट FB/ABDULLAH AZAM KHAN

आज़म खान ने आज परिवार समेत रामपुर जि़ला कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

उनके ख़िलाफ़ 84 मामले दर्ज हैं। कल कुर्की का नोटिस जारी हुआ था.

उन्हें 2 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

आज़म खान पर जमीन क़ब्जाने, भैंस चोरी समेत मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए रामपुर के ऐतिहासिक आलिया मदरसे से किताब चोरी करने का मामला दर्ज है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

उनके बेटे पर बर्थ सर्टिफीकेट में गलत जानकारी देने का मामला चल रहा है.

शाहीनबाग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शाहीन बाग़ मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली में जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन फिलहाल इस पर कोर्ट तुरंत कोई आदेश नहीं देगी.

कोर्ट ने कहा है कि सुनवाई अब 23 मार्च को होगी और इस बीच कोर्ट शाहीन बाग़ पर वार्ताकारों की रिपोर्ट देखेगी.

मामले की सुनवाई जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ़ की बेंच ने की.

जस्टिस कौल ने कहा कि हम मामले याचिका के दायरे को नहीं बढ़ा रहे हैं और सीमित मुद्दों पर ही सुनवाई कर रहे हैं, जो याचिका में दर्ज़ है.

उन्होंने कहा, "हमें इस बात की जानकारी है कि जो कुछ दिल्ली में हुआ है वो दुर्भाग्यपूर्ण है, कोर्ट इन्हीं मामलों पर विचार कर रही है."

उन्होंने कहा कि हम शाहीन बाग़ में रास्ता बंद होने से जुड़ी याचिका की सुनवाई कर रहे हैं और इसी मुद्दे पर बने रहें तो बेहतर होगा.

जजों की बेंच ने दिल्ली हिंसा की जांच के लिए कोर्ट की निगरानी में स्पेशल जांच दल के गठन की मांग करने वाली भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद और सामाजिक कार्यकर्ता सैय्यद बहादुर अब्बास नक़वी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई हो रही है.

दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की याचिका पर सुनवाई करने वाली है.

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

इमेज कॉपीरइट Reuters

पुलिस ने जिस तरह पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी उस पर जस्टिस केएम जोसेफ़ ने ऐतराज़ जताया और कहा, "आपको देखना चाहिए कि इंग्लैड की पुलिस कैसे काम करती है. आपको तुरंत स्थिति को काबू में करने के लिए कदम उठाने चाहिए."

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा में एक हेड कॉन्सटेबल की मौत हो गई है और हमें ये नहीं पता कि पुलिस किस स्थिति में काम कर रही है.

इस पर कोर्ट ने कहा कि, "ये बेहद गंभीर मामला है, अब तक 13 से अधिक मौतें हो चुकी हैं. हर व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है और ये ज़रूरी है कि सिस्टम पूरी तरह से काम करे."

जस्टिस कौल ने कहा कि हमें लगता कि वार्ताकारों ने अपना काम कर दिया है.

याचिकाकर्ता डॉ नंद किशोर गर्ग की तरफ से पेश हुए वकील शशांक देव सुधी ने कोर्ट से इस संबंध में कोई आदेश देने की दर्ख़ास्त की लेकिन कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम आदेश नहीं देगी.

बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ कदम उठाने की मांग

इमेज कॉपीरइट Reuters

पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर की याचिका के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से कहा है कि वो सुनिश्चित करें कि मामले की जानकरी रखने वाले कोई आला अधिकारी सुनवाई के दौरान मौजूद रहें.

इस याचिका की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की डिवीज़नल बेंच कर रही है, जिसमें जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह शामिल हैं.

याचिका में भड़काऊ भाषण देने वाले बीजेपी के नेता अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और परवेश साहिब सिंह की गिरफ्तारी की मांग की गई है.

साथ ही याचिका में मांग की गई है कि एक हिंसा की जांच के लिए स्पेशल जांच दल का गठन किया जाए जिसमें दिल्ली के बाहर के अधिकारी शामिल हों.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार