दिल्ली हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा हेट स्पीच मामले की सुनवाई 6 मार्च को हो- प्रेस रिव्यू

चीफ़ जस्टिस एसए बोबड़े

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि वो उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े एक मामले की सुनवाई शुक्रवार यानी 6 मार्च को करे.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार इस मामले से संबंधित एक याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में 26 फरवरी से लंबित है. 2 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में दायर एक याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया था. इसी पर बुधवार को सुनवाई हुई.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले को अधिक दिनों के लिए आगे बढ़ाने को सही नहीं ठहराया जा सकता.

अख़बार के अनुसार चीफ़ जस्टिस ने कहा कि अदालती शिष्टाचार को मानते हुए जब ये मामला दिल्ली हाई कोर्ट में है तब हम इस पर सुनवाई नहीं कर सकते, लेकिन हम हाई कोर्ट से गुज़ारिश कर सकते हैं ताकि वो जल्द से जल्द सभी मामलों का निपटारा करे और शांतिपूर्ण हल तलाशने की कोशिश करे.

इससे पहले 26 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, परवेश वर्मा और अन्य पर कथित तौर पर दिल्ली में हिंसा भड़काने के लिए भड़काऊ भाषण देने के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की गई थी.

इस मामले में की सुनवाई 26 तारीख को जस्टिस एस मुरलीधर के आवास में हुई जिसके बाद 27 तारीख को उन्ही के कोर्ट में इस पर आगे सुनवाई हुई.

सुनवाई के दौरान जस्टिस मुरलीधर ने नेताओं के ख़िलाफ़ एक्शन ना लेने पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी. इस सनुवाई के बाद ही उनका तबादला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में करने का नोटिफ़िकेशन आया था.

इसके बाद मामले की सुनवाई में हाई कोर्ट ने अगली तारीख 13 अप्रैल मुकर्रर की थी.

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2020-21 के लिए जेएनयू ने बढ़ाई फ़ीस

अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार फ़ीस में बढ़ोतरी के लिए बीते साल चर्चा में रहे दिल्ली जवाहर लाल विश्वविद्याय के प्रशासन ने साल 2020-21 के अकादमिक साल के लिए छात्रों की फ़ीस दोगुना से अधिक बढ़ा दी है.

यूनिवर्सिटी ने एक बार लिए जाने वाले मेडिकल फ़ीस को नौ रूपये से बढ़ा कर 1000 रूपये कर दिया है

2019-20 तक एमफ़िल और पीएचडी छात्रों को प्रति सेमेस्टेर 295 रूपये (जीएसटी के बिना) की फ़ीस देनी होती थी. इसे अब बढ़ा कर 780 प्रति सेमेस्टर कर दिया गया है. साथ ही 2019-20 तक ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों को प्रति सेमेस्टर 283 रूपये की फ़ीस देनी होती थी जिसके अब बढ़ा कर 768 रूपये प्रति सेमेस्टर कर दिया गया है.

जेएनयू छात्रसंघ पहले की होस्टल की फ़ीस में बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में गया है.

अख़बार लिखता है कि छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष ने कहा है कि फ़ीस बढ़ोतरी का विरोध किया जाएगा और इसके लिए जेएनयू के लोगों को एक होना पड़ेगा.

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एयर इंडिया में NRI कर सकेंगे 100 प्रतिशत निवेश

प्रवासी भारतीयों के भारतीय विमानन कंपनी एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है.

इकोनोमिक्स टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार सरकार घाटे में चल रही एयर इंडिया में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में हैं लेकिन अब तक उसे इसके लिए ख़रीदार नहीं मिल रहे हैं.

अख़बार के अनुसार सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में मंत्रिमंडल की बैठक हुई जिसमें एनआरआई को एयर इंडिया में सौ फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी गई.

इससे पहले एनआरआई एयर इंडिया में 49 फ़ीसदी की हिस्सेदारी ही ख़रीद सकते थे और इससे अधिक के लिए उन्हें सरकार की अनुमति की ज़रूरत होती.

कैबिनेट की इस बैठक में सरकार ने कंपनी क़ानून में भी संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

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अख़बार जनसत्ता के अनुसार कंपनी क़ानूनों में 72 संशोधन प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई है जिसमें 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार में विलय भी शामिल है.

ये संशोधन देश आसानी से कारोबार बढ़ाने और छोटी-मोटी ग़लतियों में कंपनियों को दी जाने वाली सज़ा के प्रावधानों को ख़त्म करने या जुर्माना कम करने को लेकर हैं. कुछ ग़लतियों को अपराध की श्रेणी से हटाने के प्रस्ताव है.

साथ ही इसके अनुसार जिन कंपनियों पर कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलीटी (सीएसआर) के ख़र्च का दायित्व 50 लाख से कम है उन्हें सीएसआर कमिटी बनाने की ज़रूरत भी ख़त्म कर दी जाएगी.

साथ ही अब भारतीय कंपनियों को विदेशी शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने की भी अनुमति दे दी गई है.

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