कितने हज़ार करोड़ रुपये रिश्वत दे देते हैं ट्रक ड्राइवर

  • प्रदीप कुमार
  • बीबीसी संवाददाता
ट्रक ड्राइवर

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भारत के ट्रक ड्राइवर अमूमन कितने रुपए बतौर रिश्वत दे देते हैं? आपको यक़ीन भले ना हो लेकिन रिश्वत की यह रकम सैकड़ों नहीं, हज़ारों करोड़ रुपए तक पहुंचती है.

भारत सरकार के केंद्रीय भूतल परिवहन राज्य मंत्री वीके सिंह ने पिछले दिनों भारत में ट्रक ड्राइवरों की स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की है. स्टेटस ऑफ़ ट्रक ड्राइवर इन इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय सड़कों पर ट्रक ड्राइवर 48 हज़ार करोड़ रुपए की अनुमानित रिश्वत देते हैं.

सेव लाइफ़ फाउंडेशन की ओर से ये रिपोर्ट में ट्रक ट्रांसपोर्टेशन के लिहाज के 10 बड़े केंद्रों- दिल्ली एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, जयपुर, अहमदाबाद, गुवाहटी, कानपुर और विजयवाड़ा में 1200 से ज़्यादा ट्रक ड्राइवरों पर 100 से अधिक ट्रांसपोर्ट चलाने वाले यानी ट्रक मालिकों या ट्रकों का कारोबार संभालने वाले प्रबंधकों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है.

इस बातचीत के आधार पर मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट मेथेडॉलॉजी पर तैयार रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा समय में देशभर में चलने वाले ट्रकों में क़रीब 83 फ़ीसदी ट्रक ड्राइवरों को सड़क पर चलने के दौरान किसी ना किसी को रिश्वत देनी पड़ी है.

भारत में ट्रक ड्राइवर और भ्रष्टाचार के आपसी रिश्ते पर इससे पहले एक गंभीर अध्ययन क़रीब 15 साल पहले देखने को मिला था, 2005 में ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक़ उस वक्त सड़कों पर दौड़ने वाले ट्रक ड्राइवर साल में 22 हज़ार करोड़ रुपए की रिश्वत देते थे.

मोटे तौर पर उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एक कमर्शियल ट्रक के ड्राइवरों को साल भर में क़रीब 80 हज़ार रुपए की रिश्वत देनी पड़ती है.

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इस लिहाज से देखें तो बीते 15 सालों में भारतीय सड़कों पर ट्रक ड्राइवरों की ओर से दिए जाने वाला रिश्वत दोगुने से ज़्यादा हो चुका है.

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लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रक ड्राइवरों के चलते भ्रष्टाचार बढ़ा है. सेव इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख पीयूष तिवारी बताते हैं, "2005-06 की तुलना में अब हमारे यहां राजमार्ग की संख्या भी बढ़ी है और ट्रकों की संख्या भी ज़्यादा हुई है. यही वजह है कि रिश्वत में इतनी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि 15 सालों में ट्रक ड्राइवरों के बीच भ्रष्टाचार थोड़ा कम हुआ है."

पीयूष तिवारी के मुताबिक़ 2006-07 के दौरान ट्रक ड्राइवरों को अमूमन प्रति किलोमीटर 70 पैसे की दर से रिश्वत देनी पड़ती थी जो 2020 में कम हो कर 53 पैसे प्रति किलोमीटर हुई है.

लेकिन बनारस-लखनऊ में दर्जनों ट्रक वाला ट्रांसपोर्ट संभालने वाले रमेश कुमार बताते हैं, "मुझे नहीं लगता है कि सड़कों पर रिश्वत देने में कमी हुई है. ट्रक ड्राइवरों का काम रिश्वत के बिना नहीं चलता. खूब सारा रिश्वत देना होता है और आप जो आंकड़ा बता रहे हैं, उसकी तुलना में कहीं ज़्यादा पैसा रिश्वत में देना होता है. बिहार के डेयरी ऑन सोन से जौनपुर बनारस की दूरी तो 300 किलोमीटर भी नहीं है, लेकिन एक चक्कर लगाने में क़रीब छह हज़ार रुपए बतौर रिश्वत देने होते हैं. इससे अंदाज़ा लगा लीजिए."

हालांकि डेयरी ऑन सोन और बनारस की दूरी में इतनी रिश्वत इसलिए भी देनी पड़ रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश में खनन पर रोक चलते, बिहार के डेयरी ऑन सोन से मिट्टी और रेत मंगाने की मांग बहुत ज़्यादा है. लेकिन अलग-अलग वजहों से ऐसे मांग वाले रूटों की संख्या भी कम नहीं है. कुछ ट्रक ड्राइवरों के मुताबिक़ किसी भी राज्य की सीमा को क्रॉस करके दूसरे राज्य से गुज़रने के वक्त ही ज़्यादा रिश्वत देना होता है.

क्यों देना पड़ता है रिश्वत?

दरअसल ट्रक ट्रांसपोर्टेशन के कारोबार में ट्रक के पंजीयन, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट जैसे काग़ज़ बनवाने में भी रिश्वत देना होता है, लेकिन यह रिश्वत ट्रक के मालिकों को चुकाना होता है. जब ट्रक सड़कों पर दौड़ने की स्थिति में आ जाते हैं तो ड्राइवर और हेल्परों का सामना मोटे तौर पर परिवहन अधिकारी, ट्रैफिक/हाइवे पुलिस, चेक पोस्ट, आयकर अधिकारी और स्थानीय रंगदारों से पड़ता है.

स्टेटस ऑफ़ ट्रक ड्राइवर इन इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रत्येक 10 में से नौ ट्रक ड्राइवर को सड़कों पर परिवहन अधिकारी और ट्रैफिक/हाइवे पुलिस का सामना करना पड़ता है और उन्हें रिश्वत देनी होती है.

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इन अधिकारियों के पास कई प्रावधानों में ट्रक ड्रावरों के चालान काटने का सुविधा होती है, इससे बचने के लिए ट्रक ड्राइवर पैसा देना ही बेहतर समझते हैं.

ट्रक ड्राइवरों में अधिकांश पढ़े लिखे नहीं होते हैं, उनके काम की शर्तें भी ऐसी होती हैं कि उन्हें लगातार सड़कों पर ट्रक दौड़ाना होता है, लिहाजा वे अधिकारियों से बहस करने की स्थिति में नहीं होते.

जनरल वीके सिंह ने अपना अनुभव साझा किया

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए केंद्रीय भूतल परिवहन राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने सड़कों पर रिश्वत देने की शैली को व्यवस्थागत माइंडसेट से जोड़कर एक दिलचस्प अनुभव भी बताया.

उन्होंने अपने सेना से जुड़े अनुभवों को याद करते हुए बताया, "सेना में हर साल में इस बात की जांच होती है कि कितने वाहन हैं जो इमरजेंसी के लिए तैयार हैं. इसके लिए चेक पोस्ट बनाए जाते हैं और गुज़रने वाले ट्रक को जांचते हैं, उसमें कितना सामान ढोया जा सकता है, कितना तेज़ भगाया जा सकता है."

"जब जब ऐसी जांच होती है तब चेक पोस्ट के पास आकर ट्रक ड्राइवर, ट्रक धीमी करके हाथ से नोट निकाल लेता है. उसे सेना के लोग बताते हैं कि पैसे नहीं चाहिए गाड़ी के बारे में जानकारी चाहिए. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि व्यवस्था ही ऐसी बनी हुई. यह तभी बदेलगा जब ट्रक ड्राइवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा. उनकी स्थिति को बेहतर बनाया जाए. चेक पोस्टों पर इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिज्म विकसित किया जाए."

जनरल वीके सिंह के मुताबिक़ मोदी सरकार का भूतल परिवहन मंत्रालय ग्रामीण इलाकों में ट्रक ड्राइवरों के एजुकेशन और ट्रेनिंग पर फोकस करने की कोशिश कर रहा है.

क्या चालान से बचने का ज़रिया है रिश्वत?

बिहार में ट्रक ट्रांसपोर्टेशन का काम चलाने वाले नवल सिंह बताते हैं, "कई बार तो बिना किसी भी वजह भी ट्रक ड्राइवरों का चालान कट जाता है, इससे बचने के लिए रिश्वत ही सही लगता है. एक बार गाड़ी किसी प्रमाण पत्र के अभाव में पकड़ी गई तो हज़ारों रुपए का ख़र्चा बैठता है, कई बार लाख के पार पहुंच जाता है. ऐसे में कुछ सौ-हज़ार देकर हम लोग अपना काम करा लेते हैं."

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'स्टेटस ऑफ़ ट्रक ड्राइवर इन इंडिया' रिपोर्ट के मुताबिक़ ट्रैफिक और हाईवे पुलिस सबसे ज़्यादा ट्रक ड्राइवरों से वसूली करते हैं. करीब 40 फ़ीसदी मामलों में बिना किसी वजह के भी ये लोग रिश्वत वसूल लेते हैं. सीट बेल्ट नहीं पहनकर गाड़ी चलाने के मामले 13 फ़ीसदी से कम आंके गए हैं.

अमूमन यह भी माना जाता है कि ट्रक ड्राइवर ओवर स्पीडिंग करते हैं और ओवरलोडिंग करते हैं.

लेकिन ओवर स्पीडिंग के मामले 11 प्रतिशत से कम आंके गए हैं और ओवर लोडिंग के मामले 10 प्रतिशत से कम. ठीक दस प्रतिशत मामलों में ग़लत जगह पार्किंग करने के चलते भी ड्राइवरों को रिश्वत देनी होती है.

इसके बाद सबसे ज़्यादा परिवहन अधिकारी ट्रक ड्राइवरों से वसूली करते हैं और ये अधिकारी भी बिना किसी वजह के करीब 30 फ़ीसदी मामलों में वसूली कर लेते हैं.

इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रंगदारी के नाम पर भी बड़े पैमाने पर ट्रक ड्राइवरों को भुगतान करना होता है, कई बार यह माता के जागरण से लेकर कोई आयोजन उत्सव के नाम पर भी होता है. क़रीब 26 प्रतिशत ट्रक ड्राइवरों के मुताबिक़ स्थानीय स्तर पर माफियाओं को पैसे का भुगतान करना होता है.

इस अध्ययन में यह बात भी उभर कर सामने आई है कि ट्रक ड्राइवरों को अमूमन हर चेक पोस्ट पर रिश्वत देनी होती है, लेकिन कुछ जागरूक ट्रक ड्राइवर और ट्रक मालिकों को इससे निजात मिल जाती है, क्योंकि किसी एक चेक पोस्ट पर पैसा देकर वे आगे के लिए टोकन हासिल कर लेते हैं. लेकिन ऐसे ट्रक ड्राइवरों की संख्या महज 13 प्रतिशत के आसपास है. जिनके मुताबिक़ उन्हें आगे दिखानी के लिए पर्ची मिल जाती है.

भूतल परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि 31 मार्च, 2019 तक भारत में पंजीकृत ट्रकों की संख्या 59,03,370 है और उसके चलाने वाले ड्राइवर हर रोज 222 रुपए के औसत से साल भर में क़रीब 48 हज़ार करोड़ रुपये की रिश्वत दे देते हैं.

हालांकि इस रिपोर्ट में यह तस्वीर भी उभरती है कि डिजिटलाइजेशन और जीएसटी की वजह से कर वसूली में होने वाला भ्रष्टाचार बेहद कम हुआ है. महज दो प्रतिशत ट्रक वालों के मुताबिक़ उन्हें कर अधिकारियों को रिश्वत देने की नौबत आई है.

इसके अलावा पीयूष तिवारी एक और बदलाव की ओर इशारा करते हैं, उनके मुताबिक़ सोशल मीडिया के बढ़ते असर और मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीर लेने की सुविधा से भी रिश्वत के मामले कम हुए हैं, क्योंकि कोई भी ऑन कैमरा रिश्वत लेते हुए रिकॉर्ड नहीं होना चाहता है.

पीयूष तिवारी मानते हैं कि अगर सरकार ट्रक ड्राइवरों को उपयुक्त प्रशिक्षण और सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराए तो सड़कों पर रिश्वत के इस खुले बाज़ार पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है.

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